तनाव, घबराहट और दिल की बीमारियों को दूर रखने के लिए रोज़ करें हृदय मुद्रा, जानें करने का सही तरीका और फायदे

Hridaya Mudra karne ke Fayde: अव्यवस्थित जीवनशैली इंसान को दिन-ब-दिन बीमार करती जा रही है. ऐसे में योगासन को दिनचर्या का हिस्सा बनाकर तन मन दोनों को सेहतमंद रखा जा सकता है. योग एक्सपर्ट हृदय मुद्रा के अभ्यास की सलाह देते हैं. यह मुद्रा ब्लड सर्कुलेशन सुधारती है और हृदय संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद करती है.

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Hridaya Mudra karne ke Fayde:
IANS

Hridaya Mudra karne ke Fayde: अव्यवस्थित जीवनशैली इंसान को दिन-ब-दिन बीमार करती जा रही है. यह बीमारी न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक भी है.ऐसे में योगासन (Yogasan) को दिनचर्या का हिस्सा बनाकर तन मन दोनों को सेहतमंद रखा जा सकता है. योग एक्सपर्ट (Yoga Expert) हृदय मुद्रा के अभ्यास की सलाह देते हैं, इसे अपान वायु मुद्रा या मृत्संजीवनी मुद्रा भी कहा जाता है. मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा ने हृदय स्वास्थ्य (Heart Health) और भावनात्मक मजबूती के लिए हृदय मुद्रा (Hridaya Mudra) को बहुत प्रभावी बताया है. यह एक आसान हस्त मुद्रा है, जो प्राण ऊर्जा को हाथों के माध्यम से हृदय क्षेत्र की ओर प्रवाहित करती है. इससे हृदय की ताकत और ऊर्जा बढ़ती है, साथ ही हृदय से जुड़ी नाड़ियां सक्रिय होती हैं.

तनाव, भावनात्मक बोझ और हृदय स्वास्थ्य पर होता है हृदय मुद्रा का असर

हृदय मुद्रा का नियमित अभ्यास हृदय को मजबूत बनाता है और भावनात्मक बोझ को कम करता है. यह दबी हुई भावनाओं को मुक्त करने में मदद करता है. तनाव, मानसिक संघर्ष या किसी संकट की स्थिति में यह मुद्रा बहुत उपयोगी साबित होती है. यह अनाहत चक्र (हृदय चक्र) को जागृत करती है, जिससे व्यक्ति में शांति, प्रेम और संतुलन की भावना बढ़ती है.

ब्लड सर्कुलेशन, नर्वस सिस्टम और हृदय संबंधी लाभ

यही नहीं यह मुद्रा ब्लड सर्कुलेशन (Blood Circulation) सुधारती है, नर्वस सिस्टम (Nervous System) को शांत करती है और हृदय संबंधी समस्याओं (Heart Disease) को दूर करने में सहायक हो सकती है. यह मुद्रा आसानी से घर पर की जा सकती है.

हृदय मुद्रा कैसे करें? एक्सपर्ट की सलाह (How To Do Hridaya Mudra)

एक्सपर्ट के अनुसार, अभ्यास के लिए किसी आरामदायक स्थिति या सुखासन, पद्मासन की अवस्था में बैठें. रीढ़ सीधी रखें. दोनों हाथों को घुटनों पर रखें, हथेलियां ऊपर की ओर. तर्जनी उंगली को मोड़कर अंगूठे के आधार पर लगाएं. इसके बाद मध्यमा और अनामिका उंगलियों के सिरों को अंगूठे के सिरे से स्पर्श कराएं. छोटी उंगली को सीधा और ढीला रखें. आंखें बंद करके गहरी सांस लें और ध्यान हृदय क्षेत्र पर केंद्रित करें. एक्सपर्ट रोजाना 10 से 30 मिनट तक इस मुद्रा के अभ्यास की सलाह देते हैं.

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कौन कर सकता है यह मुद्रा? किन्हें सावधानी रखनी चाहिए?

यह मुद्रा आसान और कई फायदे देने वाली है और सभी उम्र के लोग कर सकते हैं. हालांकि, यदि किसी को गंभीर हृदय रोग है तो योग विशेषज्ञ की सलाह से शुरू करें.

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