सरसों एक रबी फसल है, इसे सर्दियों के मौसम में उगाते है. ये तेल निकालने वाली फसलों में से एक है. राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे कई शहरों में इस फसल की बहुत खेती होती है. सरसों की अच्छी पैदावार के लिए खेती के सही समय के साथ-साथ खेत की मिट्टी की तैयारी, बुवाई की गहराई, बीज की मात्रा और उनकी दूरी पर भी ध्यान देना होता है. अगर आप अपनी बालकनी में सरसों बोना चाहते हैं, तो बोने से पहले आप कुछ तैयारी कर लें. जैसे आप बड़े गमले ले लें, ताकि आप उनमें ज्यादा सरसों बो सके. इन सरसों को उगाकर आप कई दिन घर की ऑर्गेनिक सरसों का साग खा सकेंगे.
कब से करें सरसों की बुआई ?
पौधों की बुआई अगर सही समय पर की गई हो तो बीजों का अंकुरण और पौधों की शुरुआती ग्रोथ अच्छी होती है. वहीं अगर बुआई जल्दी या देर से की जाती है, तो फसल की लंबाई या उत्पादन पर असर साफ पड़ता है. आमतौर पर सितंबर के अंत या अक्टूबर से नवंबर तक सरसों की बुआई का सही समय माना गया है. सरसों की किस्म, खेत की मिट्टी, तापमान और बाकी कई कारणों के अनुसार बुआई का समय थोड़ा बदल भी सकता है. अपने क्षेत्र के कृषि विभाग द्वारा बताई बुआई अवधि के अनुसार ही बुआई की जाती है. अगर आप बालकनी में सरसों बो रहे हैं, तो आपको भी इन चीजों का ध्यान रखना होगा.
बुआई से पहले मिट्टी करें तैयार
अच्छी फसल पाने के लिए खेत की तैयारी बहुत जरूरी होती है. बुआई से पहले खेत को दो से तीन बार जोतना चाहिए. खेत जोतने के बाद पाटा चला लें, ताकि मिट्टी समानांतर हो जाए. इस से पानी खेत में अच्छे से फैलेगा और मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहेगी. इस तरह से बीजों का अंकुरण अच्छे से होता है.
बीज की सही मात्रा
बुआई के समय बीज की मात्रा पर ध्यान जरूर दें. एक एकड़ खेत में लगभग 1.5 से 2 किलो बीज काफी रहेगा. लेकिन बीज की मात्रा उसकी किस्म और बुआई के तरीके के अनुसार बदल भी सकती है. इससे ज्यादा बीज डालने पर पौधों की घनता बढ़ जाएगी और पौधों को हवा, पानी और रोशनी कम मिलेगी. वहीं अगर बीज कम डालेंगे, तो पौधों की संख्या कम रह जाएगी.
बुआई कितनी गहराई में करें
छोटे होने की वजह से सरसों के बीजों को ज़्यादा गहराई में नहीं बोना चाहिए. आमतौर पर बीजों को 2 से 3 सेंटीमीटर गहरा बोए. ज्यादा गहराई में बीज बोने से अंकुरण पर असर पड़ सकता है. 2 से 3 सेंटीमीटर की गहराई पर बुआई करें, ताकि बीजों को सही नमी मिल सके.

सरसों की बुवाई का सही समय
पौधों में रखें दूरी
फसल की बुआई के समय लाइन और पौधों के बीच सही दूरी रखना बहुत जरूरी है. लाइन से लाइन की दूरी लगभग 30 सेंटीमीटर रखें और पौधे से पौधे की दूरी लगभग 10 सेंटीमीटर रखें, ताकि पौधों को धूप और हवा सही से मिले. इस से गुड़ाई और निगरानी करने में भी आसानी होगी.
उपचार के लिए संतुलित पोषण
फसल को रोगों से बचाने के लिए बुआई करने से पहले बीज का उपचार करना बहुत जरूरी है. इसके लिए हमेशा प्रमाणित स्वस्थ बीजों को ही चुने. कृषि विभाग द्वारा आपके क्षेत्र और सरसों की किस्म के हिसाब से बताई गई विधि ही अपनाए.
सरसों की फसल के लिए खाद
पौधों की शुरुआती ग्रोथ के लिए संतुलित पोषण देना बहुत जरूरी होता है. सबसे पहले मिट्टी की जांच कराए और जांच के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फोरस, सल्फर या बाकी जरूरी पोषक तत्वों को मिट्टी में मिलाए. सभी पोषक तत्वों में से सल्फर सरसों की फसल में पौधे की ग्रोथ और तेल के निर्माण के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्व माना गया है.
सिंचाई करना ज़रुरी
पौधे की ग्रोथ के लिए फसल की बुआई के साथ-साथ सिंचाई भी सही समय पर से करें. पानी को खेत में जमा ना रहने दें , वरना जड़ों को नुकसान हो सकता है. इसलिए पानी को खेत से निकलने की जगह बनाए. खेत की मिट्टी में नमी कम ना होने दें. सिंचाई कब करनी है यह मिट्टी, मौसम और फसल के हिसाब से तय करें.
भूल कर भी ना करें ये गलतियां
1) सरसों की बुआई में बीज गहराई में ना डालें.
2) जरूरत से ज्यादा बीजों का इस्तेमाल ना करें.
3) पौधों के बीच उचित दूरी रखें.
4) ज्यादा मात्रा में उर्वरक ना डालें.
प्रस्तुति : दीपांशी
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