Midlife Squeeze: हम अक्सर सोचते हैं कि जिंदगी का सबसे मुश्किल दौर बचपन या बुढ़ापा होता है. लेकिन, सच तो यह है कि 40 की उम्र के आसपास इंसान सबसे ज्यादा दबाव महसूस करता है. इस समय तक वह करियर में जिम्मेदार हो चुका होता है, परिवार की जरूरतें बढ़ चुकी होती हैं और भविष्य की चिंता भी मन में घर करने लगती है. बाहर से सब ठीक लगता है, नौकरी होती है, बढ़िया कमाई होती है, परिवार होता है, लेकिन अंदर ही अंदर इंसान जिम्मेदारियों के लगातार बढ़ते बोझ से थकने लगता है. यही वो दौर है जिसे मिडलाइफ स्क्वीज यानी जिंदगी का दबाव वाला मोड़ कहा जाता है.
40 की उम्र का अनकहा दबाव | The Unspoken Pressure of Being 40 Years Old
1. हर तरफ से जिम्मेदारियां (Responsibilities from Every Side)
इस उम्र में बच्चों की पढ़ाई, उनका भविष्य, उनकी जरूरतें बढ़ रही होती हैं. उधर माता-पिता बूढ़े हो रहे होते हैं, उन्हें दवाइयों, डॉक्टर और देखभाल की जरूरत पड़ती है. ऑफिस में भी आपसे पहले से ज्यादा काम और जिम्मेदारी की उम्मीद की जाती है. इन सबके बीच खुद के लिए समय ही नहीं बचता.
2️. खर्च बढ़ते ही जाते हैं (Expenses Keep Rising)
घर की EMI, बच्चों की फीस, मेडिकल खर्च ऐसे तमाम खर्च एक साथ बढ़ते हैं. कमाई बढ़ती है, लेकिन बचत नहीं हो पाती. बहुत लोग सोचते हैं कि इतना कमाने के बाद भी पैसा क्यों नहीं बचता? क्योंकि जिम्मेदारियां भी साथ में बढ़ती है. इस वजह से कई लोग अच्छा कमाने के बावजूद खुद को आर्थिक रूप से फंसा हुआ महसूस करते हैं. यह गलत मैनेजमेंट नहीं, बल्कि ज्यादा बोझ उठाने की मजबूरी होती है.
3️. भावनात्मक थकान (Emotional Burnout)
इस उम्र में सिर्फ पैसों का दबाव नहीं होता, मन भी थक जाता है. सब लोग आप पर निर्भर होते हैं, लेकिन आपकी बात सुनने वाला कोई कम ही होता है. नींद पूरी नहीं होती, छोटी-छोटी खुशियां भी महसूस नहीं होती. जिंदगी जीने से ज्यादा निभाने जैसी लगने लगती है.
4️. लेकिन यही दौर आपको मजबूत भी बनाता है (The Phase That Builds You)
यही Midlife Squeeze आपको तोड़ भी सकता है और बना भी सकता है. फर्क इस बात से पड़ता है कि आप क्या कदम उठाते हैं. हर चीज की जिम्मेदारी अकेले लेना जरूरी नहीं. ना कहना सीखना जरूरी है. पैसों की नई प्लानिंग शुरू करने का यही सही समय है. 40 वह उम्र है जहां अनुभव, समझ और धैर्य मिलकर आपको पहले से ज्यादा मजबूत बना सकते हैं.
यानी 40 की उम्र वाकई दबाव भरी होती है, लेकिन यही उम्र आपको मजबूत भी बनाती है. आपको समझ आने लगता है कि जिंदगी में सच में जरूरी क्या है. यह दौर मुश्किल जरूर है, लेकिन याद रखिए कि आप अकेले नहीं हैं, और यह दौर हमेशा नहीं रहेगा.