भारत में मेंटल हेल्थ की समस्या अब सिर्फ पर्सनल परेशानी नहीं रही, बल्कि धीरे-धीरे एक सामाजिक संकट बन रही है. संसद में 29 जनवरी को पेश इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, पिछले तीन सालों में टेली मानस हेल्पलाइन 14416 पर लगभग 32 लाख लोगों ने मेंटल स्ट्रेस, डिप्रेशन, एंग्जाइटी और इमोशनल परेशानी के लिए मदद मांगी है. यह आंकड़ा साफ बताता है कि देश मेंटल हेल्थ को लेकर चिंता कितनी तेजी से बढ़ रही है. Tele MANAS यानी टेली मेंटल हेल्थ असिस्टेंस एंड नेटवर्किंग सर्विस को केंद्र सरकार ने मेंटल हेल्थ सहायता को हर व्यक्ति तक पहुंचाने के मकसद से शुरू किया था. 24x7 चलने वाली यह हेल्पलाइन छात्रों, युवाओं, कामकाजी लोगों और बुजुर्गों के लिए सहारा बन चुकी है. कॉल करने वालों में सबसे ज्यादा संख्या उन लोगों की है जो अकेलापन, करियर प्रेशर, फैमिली स्ट्रेस और नींद की समस्याओं से जूझ रहे हैं.
डिजिटल लाइफस्टाइल और मेंटल प्रेशर
इकनॉमिक सर्वे में बताया गया है कि स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और डिजिटल एक्सपोजर ने मेंटल हेल्थ पर गहरा असर डाला है. लगातार स्क्रीन देखना जैसी आदत लोगों को अंदर से थका रही है. खासतौर पर युवा और बच्चे इस प्रेशर को झेल नहीं पा रहे, जिससे एंग्जायटी और डिप्रेशन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.
समय पर मदद जरूरी
मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि समय पर काउंसलिंग और सपोर्ट मिलने से गंभीर समस्याओं को रोका जा सकता है. Tele MANAS जैसे प्लेटफॉर्म इसलिए जरूरी हैं क्योंकि यहां बिना किसी डर और झिझक के बात की जा सकती है. यह सर्विस इलाज के साथ ही इमोशनल सपोर्ट का भी काम कर रही है.
मेंटल हेल्थ को समझा जाए प्रिवेंटिव हेल्थ
इकोनॉमिक सर्वे में साफ कहा गया है कि मेंटल हेल्थ को अब प्रिवेंटिव हेल्थ के तौर पर देखने की जरूरत है. सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल में बदलाव, सोशल कनेक्शन, फिजिकल एक्टिविटी और डिजिटल बैलेंस पर फोकस करना होगा. Tele MANAS को मजबूत करना इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.