Mahashivrati 2025: देवों के देव महादेव के लिए महाशिवरात्रि का व्रत रखा जाता है. मान्यतानुसार महाशिवरात्रि पर पूरे मनोभाव से भगवान शिव की पूजा की जाए तो अच्छे वर की प्राप्ति होती है और वैवाहिक जीवन भी सुखमय बनता है. ऐसे में लड़कियां खासतौर से इस व्रत को रखती हैं. महाशिवरात्रि का व्रत (Mahashivratri Vrat) निर्जला व्रत नहीं होता है इसीलिए इस व्रत में बीच-बीच में फलाहार और सात्विक भोजन किया जा सकता है. यदि खानपान का सही तरह से ख्याल ना रखा जाए तो शरीर में कमजोरी होने लगती है और ऊर्जा की कमी भी हो जाती है. ऐसे में भक्त अपने आराध्य शिव की भक्ति सही तरह से करने में भी असमर्थ होते हैं. आपके साथ ऐसा ना हो इसीलिए यहां जानिए व्रत में किन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए और महाशिवरात्रि पर किस तरह का खानपान होना चाहिए.
महाशिवरात्रि व्रत में खाएं ये चीजें
साबुदाने की खिचड़ीमहाशिवरात्रि के व्रत में साबुदाने की खिचड़ी खाई जा सकती है. साबुदाना (Sabudana) आसानी से पच जाता है और बेहद हल्का भी होता है. इससे पेट खराब होने की संभावना भी नहीं रहती है. वहीं, साबुदाने की खिचड़ी खाने पर शरीर को तुंरत ऊर्जा भी मिल जाती है.
शिवरात्रि पर महादेव को सफेद चीजों का भोग लगाया जाता है. साथ ही इस दिन सफेद प्रसाद का भी अत्यधिक महत्व होता है. ऐसे में महाशिवरात्रि पर साबुदाने की खीर बनाकर खाई जा सकती है. खीर मीठी होती है और स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी है अच्छी है.
व्रत के दौरान कुट्टू की पूड़ी भी खाई जा सकती है. महाशिवरात्रि के व्रत में गेंहू का आटा नहीं खाया जाता है. ऐसे में कुट्टू के आटे से बने पकवान खाना अच्छा ऑप्शन है. कुट्टू ग्लूटन फ्री होता है और सेहत के लिए बेहद अच्छा है. कुट्टू की पूड़ी को आलू के आटे के साथ पकाकर खाया जा सकता है.
शरीर में ऊर्जा बनी रहे और पेट में दर्द भी ना हो इसके लिए महाशिवरात्रि पर लस्सी (Lassi) पी जा सकती है. व्रत में मीठी लस्सी पीना खासतौर से फायदेमंद है. कई बार व्रत के कारण पेट में जलन और एसिडिटी की दिक्कत हो जाती है. ऐसे में मीठी लस्सी फायदेमंद साबित होगी और इससे पेट को कूलिंग इफेक्ट्स भी मिलेंगे.
आलू को उबालकर उसे कड़ाही में तेल, जीरा और सेंधा नमक डालकर पकाया जा सकता है. इस व्रत वाले आलू को सादा भी खाया जा सकता है या फिर इसे कुट्टू के आटे से बनी पूड़ी के साथ खा सकते हैं.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)