इजरायल और ईरान का युद्ध किसी से छिपा नहीं है. जब राष्ट्र युद्ध में उतरते हैं, तो नुकसान केवल आर्थिक ही नहीं होता, नागरिकों, बुनियादी ढांचे और अनगिनत अन्य संसाधनों का भी नुकसान उठाना पड़ता है. तेहरान पर हुए हवाई हमले में, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, गोलेस्तान पैलेस को कथित तौर पर नुकसान पहुंचा है. हालिया खबरों के अनुसार, ईरान में मौजूद कई यूनेस्को (UNESCO) वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स धमाकों की गूंज और मलबे की मार झेल रहे हैं. तेहरान से लेकर इस्फहान तक, सदियों पुराने महल और मस्जिदें अब टूटे हुए कांच और बिखरी हुई टाइलों की गवाह बन कर रह गई है.
क्यों ये हेरिटेज पूरी दुनिया के लिए इतने मायने रखती हैं-
1. गोलेस्तान पैलेस, तेहरान-
तेहरान का गोलेस्तान पैलेस (Golestan Palace) ईरान की शान माना जाता है. मार्च 2026 की शुरुआत में हुए हवाई हमलों के बाद इसकी तस्वीरें सामने आईं, जिसने दिल को तोड़ दिया.
क्या हुआ- पास में हुए धमाके की लहर (Shockwave) इतनी तेज़ थी कि महल के मशहूर 'हॉल ऑफ मिरर्स' (Mirror Hall) की छत और दीवारों पर जड़े बारीक कांच टूटकर फर्श पर बिछ गए.
इतिहास- गोलेस्तान पैलेस (Golestan Palace) तेहरान, ईरान में स्थित एक 16वीं-19वीं शताब्दी का ऐतिहासिक शाही परिसर है. यह महल काजर राजवंश (Qajar era) की कला का बेजोड़ नमूना है. यहां फारसी शिल्पकारी के साथ यूरोपीय आर्किटेक्चर का संगम दिखता है. यूनेस्को ने इसे 2013 में वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया था.
Photo: UNESCO
2. चेहेल सोतौन, इस्फहान-
इस्फहान शहर को आधा जहां (Half of the world) कहा जाता है क्योंकि, यहां दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारतें हैं. यहां का चेहेल सोतौन पैलेस (Chehel Sotoun Palace) भी हमलों की चपेट में आया है.
क्या हुआ- रिपोर्ट्स के मुताबिक, 17वीं सदी के इस महल के लकड़ी के खंभों और दरवाजों को भारी नुकसान पहुंचा है. महल के चारों ओर बिखरा मलबा आपको साफ नजर आ सकता है.
इतिहास- यह सफ़वी राजवंश के राजा शाह अब्बास द्वितीय ने बनवाया था. इसके सामने बने तालाब में जब महल के 20 स्तंभों की परछाई पड़ती है, तो वे 40 दिखाई देते हैं, इसीलिए इसे 'चेहेल सोतौन' 40 स्तंभ के नाम से जाना जाता है.
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3. जामे मस्जिद-
इस्फहान की यह मस्जिद ईरान की सबसे पुरानी मस्जिदों में से एक है. खबरों के अनुसार, इसके गुंबद और नीली टाइलों वाली दीवारों को भी नुकसान पहुंचा है.
इतिहास- 1200 साल से भी ज्यादा पुराने इस ढांचे का क्षतिग्रस्त होना इतिहास के एक पन्ने को मिटाने से कम नहीं है.
Photo: UNESCO
4. फलक-ओल-अफलाक- -
पश्चिमी ईरान में स्थित यह किला और इसके आसपास की घाटी मानव सभ्यता के सबसे पुराने सबूतों में से एक है. साल 2025 में ही यूनेस्को ने इसे अपनी लिस्ट में शामिल किया था. हालिया हमलों में किले के पास स्थित कल्चरल हेरिटेज ऑफिस पूरी तरह तबाह हो गया है.
इतिहास- इसका निर्माण तीसरी शताब्दी में सासानी काल (Sassanid era) के दौरान किया गया था. यह पत्थर, ईंट, मिट्टी और चूने से बना है.
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ईरान की इन धरोहरों को नुकसान पहुंचने पर दुनिया भर के इतिहासकार और संस्कृति प्रेमी इसका विरोध कर रहे हैं.
यूनेस्को की चेतावनी- यूनेस्को के महानिदेशक ने गहरी चिंता जताई है और कहा है कि सांस्कृतिक संपत्तियों को युद्ध में निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों (1954 हेग कन्वेंशन) का उल्लंघन है.
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