इंटरमिटेंट फास्टिंग छोड़ने के बाद आपका वजन दोबारा क्यों बढ़ जाता है, हार्वर्ड के एक डॉक्टर ने समझाया पूरा खेल

Intermittent Fasting: इंटरमिटेंट फास्टिंग आजकल ऑनलाइन सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाले खाने के तरीकों में से एक है. वजन घटाने से लेकर लंबी उम्र तक, इसे अक्सर सेहत के बड़े लक्ष्यों का आसान समाधान बताकर पेश किया जाता है.

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क्या सच में इंटरमिटेंट फास्टिंग काम करती है?

Intermittent Fasting: इंटरमिटेंट फास्टिंग आजकल ऑनलाइन सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाले खाने के तरीकों में से एक है. वजन घटाने से लेकर लंबी उम्र तक, इसे अक्सर सेहत के बड़े लक्ष्यों का आसान समाधान बताकर पेश किया जाता है. लेकिन इस ट्रेंड पर भरोसा करने से पहले यह समझना जरूरी है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग असल में है क्या.

इंटरमिटेंट फास्टिंग है क्या?

इंटरमिटेंट फास्टिंग इस बात पर नहीं, बल्कि कब खाते हैं इस पर ज़्यादा ध्यान देती है. इसमें आमतौर पर एक तय समय सीमा में खाना शामिल होता है, जैसे दिन में 8 घंटे के अंदर खाना खा लेना है, या हफ्ते में एक-दो दिन फास्ट रखना. कई लोग इसे जल्दी रिजल्ट पाने के लिए इसको अपनाते हैं, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या ये वजन घटाने के लिए लंबे समय तक टिकाऊ है?

यही सवाल डॉ. त्रिशा पासरिचा (@trishapasrichamd) ने द वॉशिंगटन पोस्ट द्वारा इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में उठाया है. डॉ. पासरिचा बेथ इजराइल डीकॉनेस मेडिकल सेंटर में डॉक्टर हैं और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में मेडिसिन की असिस्टेंट प्रोफेसर भी हैं. इस वीडियो में वह बताती हैं कि इंटरमिटेंट फास्टिंग को लेकर विज्ञान वास्तव में क्या कहता है.

इंटरमिटेंट फास्टिंग असल में क्या करती है

डॉ. पासरिचा के मुताबिक, इंटरमिटेंट फास्टिंग खाने के समय पर फोकस करती है. इसमें आप आठ घंटे की विंडो में खाना खा सकते हैं या एक-दो दिन पूरी तरह फास्ट रख सकते हैं. रिसर्च बताती है कि इससे कुछ महीनों तक वजन कम हो सकता है. लेकिन समस्या यह है कि “इसे लंबे समय तक कर पाना बहुत मुश्किल होता है और अक्सर घटा हुआ वजन वापस आ जाता है.”

डॉ. पासरिचा यह भी बताती हैं कि इंसानों पर हुई स्टडीज में यह साबित नहीं हुआ है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग दिल की बीमारी, कैंसर से बचाव करती है या उम्र बढ़ाती है. यानी शॉर्ट टर्म में फायदा दिख सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म फायदे अभी साफ नहीं हैं.

क्यों जरूरी है टिकाऊ तरीका

इंटरमिटेंट फास्टिंग की सबसे बड़ी दिक्कत है रेगुलेशन. सख्त खाने के समय ऑफिस, सोशल लाइफ और रोजमर्रा के कामों से टकरा जाते हैं. जब कोई डाइट बहुत ज़्यादा कड़ी लगती है, तो लोग उसे छोड़ देते हैं. और जब ऐसा होता है, तो वजन फिर बढ़ना आम बात है.

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दो आसान आदतें जो ज़्यादा कारगर हैं

हार्ड फास्टिंग की जगह, डॉ. पासरिचा थोड़ा आसान तरीका अपनाने की सलाह देती हैं.

1. नाश्ता जल्दी करें

उठने के एक घंटे के नाश्ता करें. नाश्ता प्रोटीन और फाइबर से भरपूर हो. वो कहती हैं, “मीठे सीरियल या पेस्ट्री नहीं.” अच्छा नाश्ता करने से दिन में क्रेविंग्स और दोपहर के समय बेवजह खाने की आदत कम होती है.

2. सोने से पहले खाना बंद करें

सोने से दो से तीन घंटे पहले खाना खत्म कर दें. देर रात खाना खाने से शरीर कैलोरी जलाने और फैट स्टोर करने के तरीके पर असर पड़ता है, जिससे मोटापे का खतरा बढ़ सकता है.

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खाने का समय नहीं, खाना क्या है, यह ज़्यादा मायने रखता है.

डॉ. पासरिचा साफ शब्दों में कहती हैं, “ईमानदारी से कहूं तो हम क्या खाते हैं, यह कब खाते हैं उससे ज़्यादा जरूरी है.”

फल, सब्ज़ियां, दालें, साबुत अनाज, नट्स और बीजों से भरपूर डाइट—और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की कम मात्रा—सबसे मज़बूत वैज्ञानिक सबूतों पर आधारित है. ये डाइट्स भले ही ट्रेंडी न हों, लेकिन वाकई असरदार हैं.

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