सुबह उठकर सबसे पहले क्या करना चाहिए? Sri Sri Ravi Shankar ने बताया पूरे दिन को खुशनुमा बना देगी ये आदत

How To Start Your Mornings Positively: सुबह की शुरुआत जैसी होती है, दिन भी अक्सर वैसा ही गुजरता है. आर्ट ऑफ लिविंग के फाउंडर श्री श्री रविशंकर भी मानते हैं कि अगर सुबह का पहला ख्याल सही हो, तो दिन अपने आप हल्का, खुश और पॉजिटिव बन जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं सुबह उठकर सबसे पहले क्या करना चाहिए-

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सुबह उठकर सबसे पहले क्या करना चाहिए?

How To Start Your Mornings Positively: हमारा पूरा दिन अक्सर इस बात पर निर्भर करता है कि सुबह उठते ही हमारा मन किस दिशा में जाता है. यानी दिन की शुरुआत अच्छी हो, तो बाकी दिन भी अच्छा ही निकलता है. इसी विषय पर आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में उन्होंने दिन की सही शुरुआत करने का तरीका बताया है. श्री श्री रविशंकर बताते हैं, रोज सुबह सोकर उठने के बाद केवल एक काम करने से आप अपने पूरे दिन को सकारात्मक और शांत बना सकता है. इस आदत को संस्कृत में 'प्रातः स्मरणीय' कहा गया है. आइए जानते हैं इस बारे में- 

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क्या होता है प्रातः स्मरणीय?

प्रातः स्मरणीय का मतलब है- सुबह उठते ही किसी अच्छी और प्रेरणादायक शख्सियत को याद करना. पुराने समय में लोग मानते थे कि सुबह दिमाग सबसे शांत और खुला होता है. उस वक्त जो सोच मन में जाती है, वही पूरे दिन असर दिखाती है.

अक्सर हम नींद खुलते ही टेंशन, ऑफिस का प्रेशर, घर की परेशानियां या किसी से हुआ झगड़ा याद करने लगते हैं. ऐसा करने से दिमाग तुरंत स्ट्रेस मोड में चला जाता है. मन भारी लगता है और दिन की शुरुआत ही थकान के साथ होती है. श्री श्री रविशंकर कहते हैं कि इसकी जगह अगर हम सुबह किसी महान व्यक्ति को याद करें, तो सोच अपने आप पॉजिटिव हो जाती है. ऐसे लोगों के बारे में सोचने से मन में अच्छे विचार आते हैं और नेगेटिविटी धीरे-धीरे कम होने लगती है.

वे यह भी बताते हैं कि शांत और खुश रहने के लिए हमें रोजमर्रा की जिंदगी में चार आसान बातें अपनानी चाहिए. 

  1. अच्छे और सच्चे लोगों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखें. 
  2. जो दुख में हैं, उनके लिए दिल में करुणा रखें. 
  3. जब कोई आगे बढ़े या अच्छा करे, तो जलन नहीं बल्कि खुशी महसूस करें. 
  4. इन सब से अलग जो लोग बार-बार गलत काम करते हैं और समझाने पर भी नहीं मानते, उन्हें इग्नोर करना सीखें.

इन आदतों से मन में एक अलग-सी शांति आती है, जिसे 'चित्त प्रसादनम्' कहा जाता है. यानी अंदर से अच्छा महसूस होना. यह कोई मुश्किल योग या तपस्या नहीं है, बल्कि सोच बदलने का आसान तरीका है.

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श्री श्री रविशंकर के मुताबिक, सुबह की यह छोटी-सी आदत आपके मूड, फोकस और रिश्तों तक पर असर डाल सकती है. इसलिए सुबह अलार्म बंद करते ही दिमाग में सबसे पहले किसी अच्छी सोच को जगह दें, क्योंकि खुशहाल दिन की शुरुआत हमेशा अच्छे ख्याल से होती है. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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