वजन कम करना हर व्यक्ति के लिए अलग मायने रखता है. किसी के लिए यह बेहतर दिखने का सवाल है, तो किसी के लिए यह सेहत, आत्मविश्वास और नई जिंदगी की शुरुआत. सच्चाई यह है कि वजन घटाने (Weight Loss) का सफर आसान नहीं होता. इसमें जादुई शॉर्टकट नहीं होते. रोज छोटे-छोटे सही फैसले, अनुशासन और धैर्य ही असली बदलाव लाते हैं. 22 वर्षीय ट्यूनिशियाई छात्रा हिबा अल्लाह अयादी की कहानी इसी सच्चाई को साबित करती है. 177 सेंटीमीटर लंबी हिबा का वजन कभी 133.3 किलो था. यह सिर्फ एक संख्या नहीं थी यह उनकी थकान, आत्मविश्वास की कमी और असहज लाइफस्टाइल की पहचान बन चुका था. लेकिन 11 महीनों में उन्होंने 52.45 किलो वजन घटाकर खुद को पूरी तरह बदल दिया वह भी बिना जिम जाए.
वो दिन जिसने सब बदल दिया
हिबा को आज भी वह दिन याद है जब उन्होंने तराजू पर 133.3 किलो देखा. उन्हें महसूस हुआ कि अब बदलाव जरूरी है. यह फैसला दिखावे के लिए नहीं, बल्कि अपनी सेहत और भविष्य के लिए था. उन्होंने परफेक्ट प्लान का इंतजार नहीं किया. उन्होंने बस शुरुआत की और यही सबसे बड़ा कदम था.
डाइट में समझदारी, भूख नहीं
आमतौर पर लोग वजन घटाने के दौरान खाना कम खाने लगते हैं. हिबा ने खुद को भूखा नहीं रखा. उन्होंने खाने की क्वालिटी बदली, मात्रा कंट्रोल की.
नाश्ता:
तीन अंडों का ऑमलेट, सब्जियों के साथ. थोड़ा सा ब्रान ब्रेड. चाय या कॉफी बिना चीनी. पानी भरपूर. ये सभी उनकी डाइट का हिस्सा था.
दोपहर का खाना:
चावल, पास्ता या ब्रेड सीमित मात्रा में. साथ में प्रोटीन चिकन या अंडे. प्लेट का बड़ा हिस्सा सलाद और सब्जियों का. रोज एक फल.
रात का खाना:
हल्का सूप या सलाद के साथ अंडा. तेल और नमक कम. उनकी डाइट जटिल नहीं थी, बस बैलेंस और रेगुलर थी.
वजन घटाने की जर्नी में सूप, सलाद और अंडा काफी मदद कर सकता है.
जिम नहीं, सिर्फ चलना
हिबा के पास जिम की सुविधा नहीं थी. लेकिन उन्होंने इसे बहाना नहीं बनने दिया. उन्होंने चलना शुरू किया. वॉकिंग उनके रोजमर्रा का हिस्सा बन गई. कभी धीमी, कभी तेज लेकिन लगातार. चलने से न केवल कैलोरी बर्न हुई, बल्कि उनका मन भी हल्का हुआ. यही साधारण आदत उनके लिए सबसे बड़ा बदलाव बन गई.
इमोशनल कॉन्फ्लिक्ट से भी था असली युद्ध
वजन की समस्या सिर्फ शारीरिक नहीं थी. हिबा ने स्वीकार किया कि आईने में खुद को देखना मुश्किल होता था. मनचाहे कपड़े पहनना संभव नहीं था. सेहत को लेकर डर बना रहता था. लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानी. उनका एक सपना था, भारत घूमने का. यही सपना कठिन दिनों में उनका हौसला बना.
हिबा ने स्वीकार किया कि आईने में खुद को देखना मुश्किल होता था.
असली बदलाव दिमाग से शुरू होता है
52 किलो से ज्यादा वजन घटाने के बाद हिबा समझ चुकी हैं कि असली परिवर्तन शरीर से पहले दिमाग में होता है. अनुशासन, निरंतरता और खुद के प्रति सम्मान, यही असली मंत्र है. आज वह खुद को सिर्फ हल्का नहीं, बल्कि आजाद महसूस करती हैं. उनकी कहानी बताती है कि वजन घटाने के लिए बहुत ज्यादा उपाय जरूरी नहीं. जरूरी है सही आदतें, रेगुलेरिटी और खुद पर विश्वास.