Most Powerful Medicine: अपोलो डॉक्‍टर ने बताई 'सबसे ताकतवर दवा', जो हार्ट अ‍टैक, डायबिटीज और स्ट्रोक के खतरे को करती है कम

Most Powerful Medicine to Reduce Risk of Heart Attack: डॉ. सुधीर कुमार ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसी आदत के फायदे बताए. उनका कहना है कि रोज वॉक करना कई दवाओं से ज्यादा असर दिखा सकता है.

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Most Powerful Medicine to Reduce Risk of Heart Attack.

Most powerful medicine to reduce risk of heart attack: अगर आपसे पूछा जाए कि ऐसी कौन सी दवा है जो दिल की बीमारी, स्ट्रोक, डायबिटीज और डिप्रेशन का खतरा कम कर सकती है और इसके लिए कोई पैसा खर्च नहीं करना पड़ता, तो शायद जवाब देना मुश्किल हो. लेकिन हैदराबाद के अपोलो हॉस्पिटल में काम करने वाले न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार का कहना है कि ऐसी “दवा” सच में मौजूद है और वह है रोज पैदल चलना.  डॉ. सुधीर कुमार ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसी आदत के फायदे बताए. उनका कहना है कि रोज वॉक करना कई दवाओं से ज्यादा असर दिखा सकता है.

'सबसे ताकतवर दवा'

डॉ. सुधीर कुमार की सलाह को फॉलो करना बहुत आसान है. वह लोगों को रोज करीब 30 मिनट वॉक करने की सलाह देते हैं. उनका कहना है कि यह साधारण सी आदत दिल की बीमारी, स्ट्रोक, टाइप 2 डायबिटीज, मूड से जुड़ी परेशानियां और दिमागी गिरावट का खतरा कम कर सकती है. सबसे खास बात यह है कि इसके लिए पैसे की भी जरूरत नहीं है. इसके “साइड इफेक्ट” भी अच्छे हैं, जैसे बेहतर नींद और अच्छा मूड.

10 हजार कदम से जुड़े फायदे (The 30-Minute Daily Habit Dr. Kumar Recommends)

JAMA जर्नल में पब्लिश एक स्टडी में भी पाया गया कि रोज चलने से कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. रिसर्च के मुताबिक जो लोग रोज करीब 10 हजार कदम चलते हैं, उनकी कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ बेहतर रहती है. इतनी वॉक करने से स्ट्रोक, हार्ट फेलियर और दिल की बीमारी का जोखिम कम हो सकता है. इसके साथ ही कम से कम 13 तरह के कैंसर का खतरा भी घट सकता है. डिमेंशिया का खतरा करीब 50 प्रतिशत तक कम होने की बात भी सामने आई है.

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दिलचस्प बात यह है कि 10 हजार कदम का लक्ष्य असल में 1960 के दशक में जापान की एक पेडोमीटर कंपनी के मार्केटिंग कैंपेन से लोकप्रिय हुआ था. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि पैदल चलना खासकर तेज वॉक शरीर के लिए काफी फायदेमंद है.

वॉक करने से शरीर के अंदर क्या होता है

  • पैदल चलने से दिल और ब्लड वेसल्स का काम बेहतर होता है क्योंकि इससे ऑक्सीजन वाला खून मसल्स और दूसरे अंगों तक बेहतर तरीके से पहुंचता है. साथ ही वॉक करने से शरीर में कई बायोलॉजिकल चेंज होते हैं जो कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद करते हैं. एक्सरसाइज के बाद शरीर में कई तरह के  बायोलॉजिकल चेंज देखे गए हैं.
  • नियमित वॉक या एक्सरसाइज का असर सिर्फ मसल्स तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शरीर के अंदर कई अहम बदलाव भी होते हैं. एक्टिव रहने पर शरीर की कोशिकाओं में मौजूद माइटोकॉन्ड्रिया बेहतर तरीके से काम करने लगते हैं. इन्हें कोशिकाओं की एनर्जी बनाने वाला सिस्टम माना जाता है.
  • फिजिकल एक्टिविटी के दौरान मसल्स में हल्का ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बनता है. इससे शरीर ज्यादा माइटोकॉन्ड्रिया बनाने लगता है, जिससे शरीर की एनर्जी बनाने की क्षमता बेहतर हो सकती है. तेज एक्टिविटी के दौरान बनने वाला लैक्टिक एसिड भी इस प्रक्रिया में भूमिका निभाता है.

कुल मिलाकर नियमित वॉक या हल्की एक्सरसाइज शरीर के कई सिस्टम पर एक साथ असर डालती है. यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे सेहत के लिए सबसे आसान और असरदार आदतों में से एक मानते हैं.

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