- इजरायल में स्वतंत्रता दिवस पर मशाल जलाने की परंपरा 1949 में माउंट हर्ज़ल पर शुरू हुई थी
- मशाल जलाने के समारोह में नेसेट अध्यक्ष मुख्य मशाल जलाते हैं और 12 नायक बारी-बारी से मशालें जलाते हैं
- मशाल जलाने वालों का चयन इजरायल के संस्कृति और खेल मंत्रालय द्वारा गठित सार्वजनिक सलाहकार समिति करती है
इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने फ्लाईदुबई के पायलट स्मित मच्छार और पीएम मोदी को अपने देश के स्वतंत्रता दिवस पर मशाल जलाने के लिए आमंत्रित किया है. उन्होंने इसे इजरायल का सबसे बड़ा सम्मान बताया है. ऐसे में एनडीटीवी ने ये जानने की कोशिश की इस सम्मान का इजरायल में कितना महत्व है?
कब और कैसे शुरू हुआ
इजरायल में मशाल जलाने की परंपरा 1949 में शुरू हुई थी. इजरायल के पहले स्वतंत्रता दिवस पर गदना (सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम) के सदस्यों और नेसेट (संसद) के तत्कालीन अध्यक्ष यरूशलेम में माउंट हर्ज़ल पर थियोडोर हर्ज़ल की समाधि स्थल पर मशाल लेकर गए थे. इसके बाद इसे सरकारी रस्म बना दिया गया. उसके बाद से हर साल ये समारोह यरूशलेम में माउंट हर्ज़ल में ही होता है.
समारोह में क्या होता है
समारोह की शुरुआत ठीक शाम 7.45 बजे नेसेट अध्यक्ष के आगमन और सैन्य परेड के साथ होती है. रात आठ बजे झुके हुए राष्ट्रीय ध्वज को शीर्ष पर ले जाया जाता है. यह पल गहरे दुख से राष्ट्रीय गौरव के उत्सव में बदल जाता है. इसके बाद नेसेट के स्पीकर मुख्य मशाल जलाते हैं. फिर चुने गए 12 नायक बारी-बारी से अपनी मशालें जलाती हैं. मशाल जलाते समय प्रत्येक व्यक्ति राष्ट्र और समाज के सम्मान में एक छोटा फाषण देता है. इसके बाद रंगारंग कार्यक्रम होते हैं.
मशाल जलाने वालों को कौन चुनता है
मशाल जलाने वालों को चुनने के लिए एक पूरी प्रक्रिया है. इसके लिए इजरायल का संस्कृति और खेल मंत्रालय एक सार्वजनिक सलाहकार समिति का गठन करता है. इस समिति में इजरायली संसद, प्रधानमंत्री कार्यालय और नागरिक समाज के 8-10 सदस्य शामिल होते हैं. खास बात ये है कि हर साल एक विशेष थीम पर लोगों को चुना जाता है. मशाल जलाने वालों की पात्रता ये हैं कि उन्होंने कोई असाधारण नागरिक योगदान दिया हो.
तो 12 मशालें ही क्यों
ये इजरायल के 12 कबीलों का प्रतिनिधित्व करते हैं. तोराह के अनुसार, इजरायल में मूल रूप से 12 कबीले माने जाते हैं. इन कबीलों का आधार इब्राहीम के पोते और आइजैक के बेटे याकूब थे, जिन्हें ईश्वर ने 'इजरायल' नाम दिया था. याकूब के 12 बेटों के वंशज ही आगे चलकर इजरायल के 12 कबीले बने.
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