क्या है 'फांसी घर', जिसे लेकर दिल्ली विधानसभा में पेश होंगे अरविंद केजरीवाल

Delhi Fansi Ghar Controversy: दिल्ली विधानसभा में फांसी घर विवाद फिर चर्चा में है. इसी मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के सामने पेश होना है. विवाद 2022 में विधानसभा परिसर में एक कमरे को ब्रिटिश काल का फांसी घर बताने से शुरू हुआ था.

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Delhi Fansi Ghar Controversy: फांसी घर मामले में पेश होंगे केजरीवाल

Delhi Fansi Ghar Controversy: दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर एक पुराना मुद्दा चर्चा में आ गया है. आज पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के सामने पेश होने वाले हैं. मामला कथित 'फांसी घर' विवाद का है, जो पिछले कुछ सालों से राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है. यह विवाद सिर्फ एक कमरे या इमारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें इतिहास, सरकारी खर्च और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप सब शामिल हैं. इसी वजह से यह मामला अब विधानसभा की जांच समिति तक पहुंच गया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि 'फांसी घर' क्या है. आइए जानते हैं.. 

'फांसी घर' क्या है

यह मामला साल 2022 से जुड़ा है. उस समय दिल्ली विधानसभा परिसर के एक हिस्से का नवीनीकरण किया गया था. उद्घाटन के दौरान इसे ब्रिटिश काल का 'फांसी घर' बताया गया था. दावा किया गया कि आजादी के समय इस जगह का इस्तेमाल स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी देने के लिए किया जाता था. इसे एक ऐतिहासिक स्थल की तरह पेश किया गया और बताया गया कि यह देशभक्ति और बलिदान की याद दिलाने वाला स्थान है. लेकिन उद्घाटन के बाद ही इस दावे को लेकर सवाल उठने लगे. कुछ लोगों ने कहा कि जिस जगह को 'फांसी घर' बताया जा रहा है, वह असल में कोई साधारण कमरा था.

क्यों बढ़ा विवाद?

इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तब तेज हो गई, जब विपक्षी दल बीजेपी ने इस पर सवाल उठाए. बीजेपी का कहना था कि जिस जगह को ऐतिहासिक फांसी घर बताया गया, उसके समर्थन में पक्के ऐतिहासिक सबूत नहीं हैं. उनका आरोप था कि यह सिर्फ एक सामान्य कमरा था, जिसे बाद में 'फांसी घर' कह दिया गया. इसी वजह से इस मामले की जांच की मांग उठी और मामला दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति तक पहुंच गया.

'फांसी घर'

विधानसभा में पहले दी गई जानकारी के मुताबिक, इस कथित 'फांसी घर' के नवीनीकरण और तैयार करने पर करीब 1.4 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. यही वजह है कि यह मुद्दा और ज्यादा चर्चा में आ गया, क्योंकि विपक्ष का कहना है कि अगर ऐतिहासिक आधार ही साफ नहीं है, तो इतने पैसे क्यों खर्च किए गए.

अब क्यों पेश हो रहे हैं केजरीवाल

अब इस पूरे विवाद पर बयान दर्ज कराने के लिए अरविंद केजरीवाल को समिति के सामने बुलाया गया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि वह आज दोपहर समिति के सामने पेश होंगे और अपना पक्ष रखेंगे. साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि पूरी कार्यवाही का लाइव प्रसारण किया जाए, ताकि जनता खुद देख सके कि जांच कैसे चल रही है. उनका कहना है कि पारदर्शिता के लिए यह जरूरी है.

किन-किन नेताओं को बुलाया गया

इस मामले में सिर्फ एक से नहीं, बल्कि कई नेताओं से जवाब मांगा गया है. समिति ने पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल और पूर्व उप-स्पीकर राखी बिड़ला को भी उपस्थित होने के लिए कहा है. इन सभी से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है.

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