भारत के किन राज्यों में बनते हैं ट्रेन के डिब्बे? एक बनाने में इतने करोड़ होते हैं खर्च

भारतीय ट्रेन के डिब्बे किन राज्यों के कोच कारखानों में तैयार होते हैं और एक कोच बनाने में औसतन कितना खर्च आता है. आपको बता दें कि तमिलनाडु, पंजाब, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल कोच निर्माण के बड़े हब हैं. जहां ट्रेन के डिब्बे तैयार होते हैं.

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कहां बनते हैं ट्रेनों के कोच

देशभर में चलने वाली लंबी लंबी ट्रेनें देखकर अक्सर लोग इस सोच में पड़ जाते हैं कि एक ट्रेन बनाने में कितना खर्च आया होगा या इतनी बड़ी ट्रेन बनती कहां होगी. आपको बता दें कि भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है और इसके लिए बड़े स्तर पर कोच निर्माण किया जाता है. दिलचस्प बात ये है कि देश के कुछ खास राज्यों में ही बड़े बड़े कोच कारखाने मौजूद हैं, जहां आधुनिक तकनीक से हर साल हजारों डिब्बे तैयार होते हैं. इन कोचों में सामान्य से लेकर एसी और हाई स्पीड ट्रेन तक के डिब्बे शामिल होते हैं. इसी वजह से ये जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर ये डिब्बे किन राज्यों में बनते हैं और इनकी कीमत कितनी होती है.

कहां तैयार होते हैं भारतीय ट्रेन के डिब्बे?

ट्रेन के डिब्बों का सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र तमिलनाडु के चेन्नई में स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) है. यहीं से देश के सबसे ज्यादा कोच तैयार होकर बाहर आते हैं. इसके अलावा पंजाब के कपूरथला में रेल कोच फैक्ट्री (RCF) स्थित है, जहां मुख्य रूप से LHB यानी जर्मन तकनीक वाले आधुनिक कोच बनाए जाते हैं.

वहीं उत्तर प्रदेश के रायबरेली में मॉडर्न कोच फैक्ट्री (MCF) हाई-स्पीड कम्पैटिबल कोच तैयार करती है. इसके साथ ही कर्नाटक के बेंगलुरु में BEML में मेट्रो और कुछ खास रेल रेक तैयार किए जाते हैं. पश्चिम बंगाल में भी प्रायवेट प्लांट में मालगाड़ी और विशेष उपयोग वाले रेक बनाते हैं.

एक कोच बनाने में कितने लाख का खर्च?

कोच की लागत उसके प्रकार और सुविधाओं पर निर्भर करती है. सामान्य या नॉन एसी LHB कोच को तैयार करने में लगभग 1.5 से 2 करोड़ रुपये तक का खर्च आता है. वहीं एसी चेयर कार या 3AC कोच की कीमत औसतन 2.5 से 3.5 करोड़ रुपये के बीच होती है. 2AC या प्रीमियम श्रेणी के कोच की लागत 3.5 से 4.5 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. सेमी-हाईस्पीड और वंदे भारत जैसे एडवांस कोच इससे भी महंगे होते हैं. लागत में स्टील बॉडी, बोगी, ब्रेकिंग सिस्टम, सिक्योरिटी फीचर, फायर एक्सटेंग्विशर सामग्री और इंटीरियर फिटिंग्स का खर्च शामिल होता है. 

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