आर्मी, एयरफोर्स और नेवी के जवान अलग तरह से सैल्यूट क्यों करते हैं? जान लीजिए इसके पीछे की वजह

Indian Defence Force Salute: भारत की तीनों सेनाओं के आगे कोई भी नहीं टिक पाता है, तीनों भारत की ताकत हैं. तीनों सेनाओं के जवान जब सैल्यूट मारते हैं तो उसका तरीका थोड़ा सा अलग रहता है, ऐसे में कुछ लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर ऐसा क्यों है.

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तीनों सेनाओं के अलग सैल्यूट क्यों

Indian Defence Force Salute: भारत ने 26 जनवरी को अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाया. इस मौके पर कर्तव्य पथ पर भारत की तीनों सेनाओं का जलवा दिखा और उनकी दहाड़ दुश्मनों के कानों तक सुनाई दी. इस परेड को भारत के शहरों के अलावा गांवों में भी लोग टकटकी लगाकर देखते हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में परेड देखने के बाद सवाल आता है कि आखिर भारतीय सेना, एयरफोर्स और नेवी के जवान अलग-अलग तरह से सैल्यूट क्यों मारते हैं? आज हम आपको बताएंगे कि आखिर ऐसा करने की वजह क्या है और क्यों तीनों सेनाओं के सैल्यूट थोड़े अलग होते हैं. 

तीनों सेनाओं के सैल्यूट में अंतर

भारतीय सेनाओं के अलग सैल्यूट करने के पीछे कोई सदियों से चली आ रही परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे ऐतिहासिक और रणनीतिक कारण छिपे हैं. आइए पहले ये समझ लेते हैं कि तीनों सेनाएं कैसे सैल्यूट करती हैं और इनमें क्या बड़ा अंतर है. 

इंडियन आर्मी का सैल्यूट

भारतीय सेना के जवान अपनी पूरी हथेली को सामने की ओर खोलकर सैल्यूट करते हैं. इसमें उंगलियां और अंगूठा आपस में सटे होते हैं और बीच वाली उंगली माथे को छूती है. इसके पीछे की वजह सैल्यूट लेने वाले के प्रति 'पारदर्शिता और विश्वास' को दर्शाना है. जवानों की खुली हथेली यह संकेत देती है कि सैनिक के हाथ में कोई हथियार नहीं है और वह पूरी तरह से निहत्थे होकर अपने वरिष्ठ अधिकारी का सम्मान कर रहा है. यह अनुशासन और आपसी भरोसे का प्रतीक भी है. 

भारतीय नौसेना का सैल्यूट

नौसेना में सैल्यूट थोड़ा अलग तरह से होता है, इसमें नौसैनिक हथेली को जमीन की ओर झुकाकर रखते हैं और 90 डिग्री का कोण बनता है. इसमें हथेली सामने से दिखाई नहीं देती है. अब इसके पीछे की वजह भी जान लेते हैं. दरअसल पुराने वक्त में नौसैनिक जहाजों पर काम करते थे, जहां उन्हें भारी मशीनों, ग्रीस और तेल के बीच रहना पड़ता था. काम के दौरान उनके हाथ गंदे और काले हो जाते थे. ऐसे में गंदी हथेली से सैल्यूट करने के बजाय इसे नीचे झुकाकर रखा जाता है. इस तरह ये परंपरा कई दशकों तक चलती रही और आज भी इसका पालन किया जा रहा है. 

इंडियन एयरफोर्स का सैल्यूट

भारतीय वायु सेना का सैल्यूट पहले आर्मी जैसा ही था, लेकिन 2006 में इसमें बदलाव किया गया. अब वायु सेना के जवान अपनी हथेली को जमीन से 45 डिग्री के कोण पर रखकर सैल्यूट करते हैं. ये ऐसा एंगल होता है, जिसमें आसमान की ओर हथेली उठती है, जो आकाश की ऊंचाइयों की तरफ इशारा करता है. एयरफोर्स का ये सैल्यूट वायु सेना के आदर्श वाक्य 'नभ: स्पृशं दीप्तम्' (शान के साथ आकाश को छूना) की भावना को जीवंत करता है. 

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