26 जनवरी परेड में शामिल होने वाले जवानों को देने होते हैं ये टेस्ट, हथियार भी होते हैं चेक

Republic Day 2026 Parade: 26 जनवरी की गणतंत्र दिवस परेड देश की सुरक्षा, अनुशासन और सैन्य ताकत का प्रतीक है. इस परेड में शामिल होने वाले जवानों को महीनों की ट्रेनिंग, कई स्तर की सुरक्षा जांच और हथियारों की सख्त जांच से गुजरना पड़ता है. परेड की हर एक्टिविटी पहले से तय होती है.

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26 जनवरी परेड

Republic Day 2026 Parade:  हर साल 26 जनवरी को भारत अपना गणतंत्र दिवस मनाता है. इसी दिन 1950 में देश में संविधान लागू हुआ था. साल 2026 में भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाएगा. इस दिन राष्ट्रपति राष्ट्र को संबोधित करते हैं और राजधानी दिल्ली में होने वाली परेड देश की सांस्कृतिक विरासत और सैन्य ताकत को दुनिया के सामने दिखाती है. हर साल करीब दो लाख लोग परेड को अपनी आंखों से देखने पहुंचते हैं. विदेशी मेहमान भी इसका हिस्सा बनते हैं. लेकिन बहुत कम लोग ही जानते हैं कि रिपब्लिक डे परेड में शामिल होने वाले जवानों का सेलेक्शन कैसे होता है और फाइनल परेड में जाने से पहले क्या-क्या टेस्ट देने पड़ते हैं. आइए जानते हैं कौन-कौन से टेस्ट पास कर जवान परेड का हिस्सा बनते हैं.

परेड की जिम्मेदारी किसके पास होती है

26 जनवरी की परेड का पूरा आयोजन रक्षा मंत्रालय की निगरानी में होता है. सेना, वायुसेना, नौसेना के साथ कई अन्य सरकारी एजेंसियां इसमें मदद करती हैं. हर एक गतिविधि पहले से तय होती है, क्योंकि यहां एक सेकंड की देरी भी बड़ी चूक मानी जाती है.

परेड के दिन कैसे होती है शुरुआत

परेड की शुरुआत राष्ट्रपति के आगमन से होती है. राष्ट्रपति के अंगरक्षक राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देते हैं, राष्ट्रगान बजता है और 21 तोपों की सलामी दी जाती है. खास बात यह है कि ये सलामी 21 तोपों से नहीं, बल्कि सेना की 7 तोपों से तीन राउंड में दी जाती है.

जवानों की तैयारी महीनों पहले शुरू हो जाती है

परेड में शामिल होने वाले जवानों की तैयारी जुलाई महीने से ही शुरू हो जाती है. पहले वे अपने-अपने रेजिमेंट सेंटर में रिहर्सल करते हैं और दिसंबर तक दिल्ली पहुंचते हैं. 26 जनवरी से पहले हर जवान करीब 600 घंटे की ट्रेनिंग पूरी करता है. परेड के दिन जवान रात 2 बजे तक तैयार हो जाते हैं और 3 बजे तक कर्तव्यपथ पहुंच जाते हैं. परेड में शामिल झांकियां करीब 5 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं, ताकि दर्शक उन्हें ठीक से देख सकें. हैरानी की बात यह है कि झांकी के ड्राइवर बहुत छोटी खिड़की से वाहन चलाते हैं.

परेड में शामिल जवानों को कौन-कौन से टेस्ट देने होते हैं

परेड में शामिल हर जवान को चार स्तर की सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ता है. उनकी पहचान, बैकग्राउंड और रिकॉर्ड को बारीकी से चेक किया जाता है. इसके साथ ही उनके हथियारों की पूरी जांच होती है, ताकि कोई भी हथियार लाइव गोलियों से लोड न हो. यह जांच इसलिए जरूरी होती है ताकि परेड के दौरान किसी भी तरह की चूक या खतरे की संभावना न रहे.

हथियार और मिलिट्री इक्विपमेंट्स की भी होती है सख्त जांच

परेड में शामिल टैंक, तोप, बख्तरबंद वाहन और अन्य आधुनिक उपकरणों के लिए इंडिया गेट के पास अलग से कैंप लगाया जाता है. हर हथियार और वाहन की कई स्तरों पर जांच होती है और सफाई से लेकर तकनीकी जांच तक की जाती है. रिहर्सल के दौरान हर ग्रुप करीब 12 किलोमीटर तक मार्च करता है, जबकि 26 जनवरी के दिन यह दूरी करीब 9 किलोमीटर होती है. पूरे रास्ते जज बैठे होते हैं, जो लगभग 200 फैक्टर्स पर हर ग्रुप को देखते हैं. इन्हीं के आधार पर बेस्ट मार्चिंग टुकड़ी का सेलेक्शन भी होता है.

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