Municipal Corporation vs Municipality: महाराष्ट्र में इन दिनों निकाय चुनावों का माहौल है. 16 जनवरी को आए रिजल्ट में बीजेपी के एकतरफा जीत हासिल की है और ज्यादातर सीटें अपने खाते में डाल ली है. यहां तक की एशिया के सबसे बड़े नगर निगम BMC में पार्टी पहली बार अपना मेयर बनाने की पोजिशन में आई है. अक्सर आप अलग-अलग राज्यों में इन चुनावों के बारें में सुनते होंगे. निकाय चुनाव में नगर निगम और नगर पालिका दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहते हैं. लेकिन क्या आप इन दोनों के बीच अंतर जानते हैं. अगर नहीं तो चलिए जानते हैं..
स्थानीय निकाय क्या होते हैं
देश में शहरों और कस्बों को चलाने के लिए जो स्थानीय स्तर की सरकार होती है, उसे स्थानीय निकाय कहा जाता है. सड़क, पानी, सफाई, लाइट, नाली, पार्क, ये सारे काम इन्हीं के जिम्मे होते हैं. अब शहर छोटा है या बड़ा, इसी हिसाब से तय होता है कि वहां नगर निगम होगा या नगर पालिका.
नगर निगम क्या होता है
नगर निगम बड़े शहरों के लिए बनाया जाता है. जहां आबादी आमतौर पर 5 लाख या उससे ज्यादा होती है. इलाका काफी बड़ा होता है, काम भी ज्यादा और सिस्टम भी बड़ा होता है. मुंबई ही नहीं दिल्ली, पुणे, बेंगलुरु, भोपाल जैसे शहर नगर निगम के तहत आते हैं. नगर निगम को कई वार्डों में बांटा जाता है. हर वार्ड से जनता एक प्रतिनिधि चुनती है, जिसे पार्षद कहा जाता है. ये सभी पार्षद मिलकर शहर के फैसले लेते हैं, बजट पास करते हैं, विकास के काम तय करते हैं. नगर निगम का मुखिया मेयर होता है. कई राज्यों में मेयर का चुनाव सीधे जनता करती है, जबकि कुछ जगह पार्षद मिलकर चुनते हैं. नगर निगम अपने काम के लिए प्रॉपर्टी टैक्स, पानी टैक्स, विज्ञापन टैक्स, पार्किंग फीस जैसे कई स्थानीय टैक्स वसूलता है.
नगर पालिका क्या होती है
नगर पालिका उन शहरों या कस्बों में होती है, जहां आबादी 1 लाख से 5 लाख के बीच होती है. इलाका नगर निगम से छोटा होता है. ये न तो बहुत छोटा कस्बा होता है और न ही बड़ा महानगर. नगर पालिका भी वार्डों में बंटी होती है, जनता अपने वार्ड से प्रतिनिधि चुनती है, लेकिन यहां प्रमुख को नगर पालिका अध्यक्ष कहा जाता है. अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता करती है, वही प्रशासन और विकास का जिम्मा संभालता है. काम लगभग वही होते हैं जैसे सफाई, सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट, लेकिन स्तर थोड़ा छोटा होता है.














