कुवैत ने गलती से गिराए अमेरिका के तीन फाइटर जेट, दोस्त और दुश्मन की पहचान कैसे करता है एयर डिफेंस सिस्टम?

How Air Defense System Works: ईरान पर हमले के बीच कुवैत ने गलती से अमेरिका के तीन फाइटर जेट्स पर ही हमला बोल दिया, एयर डिफेंस सिस्टम ने इन्हें दुश्मन का विमान समझकर मिसाइल फायर कर दीं.

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How Air Defense System Works: IFF इंटर्रोगेटर्स एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हैं, जो एक खास फ्रीक्वेंसी पर रेडियो सिग्नल भेजते हैं.

What is an air defense system : अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर बड़ा हमला किया है, जिसके बाद ईरान की तरफ से मिडिल ईस्ट के उन देशों को टारगेट किया जा रहा है, जिनका इस्तेमाल अमेरिका ईरान पर हमले के लिए कर रहा है. इसी बीच हर तरफ से मिसाइलों और फाइटर जेट्स की गड़गड़ाहट सुनाई दे रही है. ऐसे में कुवैत ने गलती से अमेरिका के 3 F-15E स्ट्राइक ईगल (Strike Eagle) लड़ाकू विमानों को मार गिराया. कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम ने इन्हें दुश्मन के विमान समझकर फायर कर दिया और तीनों विमान क्रैश हो गए. हालांकि तीनों में सवार पायलट सुरक्षित तरीके से इजेक्ट हो गए. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि कैसे एयर डिफेंस सिस्टम अपने और पराये की पहचान करते हैं और युद्ध जैसी स्थिति में इस तरह की गलती से कैसे बचा जाता है. 

एयर डिफेंस सिस्टम क्या होता है?

सबसे पहले ये समझ लेते हैं कि आखिर एयर डिफेंस सिस्टम क्या होता है. हर देश के पास खुद को हमलों से बचाने के लिए ऐसा सिस्टम होता है, जो खतरे को भांपकर उसे हवा में ही खत्म कर सकता हो. इस तरह के मिसाइल सिस्टम को ही एयर डिफेंस सिस्टम कहा जाता है. इसका काम दुश्मन की मिसाइलों, एयरक्राफ्ट और ड्रोन्स को इंटरसेप्ट करना और उन्हें खत्म करना होता है. एयर डिफेंस सिस्टम में अलग-अलग तरह की मिसाइलें लगी होती हैं, जो टारगेट के हिसाब से दागी जाती हैं. भारत के पास आकाश और एस-400 जैसे एयर डिफेंस सिस्टम हैं, जिनके काम की झलक हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर में दिखी थी. 

एयर डिफेंस सिस्टम काम कैसे करता है?

  • एयर डिफेंस सिस्टम मैनुअल और ऑटोमैटिक, दोनों तरह से काम कर सकते हैं. 
  • एयर डिफेंस सिस्टम सबसे पहले खतरे का पता लगाते हैं, फिर उसे ट्रैक किया जाता है और आखिर में तबाह कर देते हैं. 
  • दुश्मन के विमानों या मिसाइल का पता लगाने के लिए रडार सिस्टम लगा होता है, जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स भेजकर दुश्मन के विमान या ड्रोन की जानकारी वापस सिस्टम तक भेजता है. 
  • दुश्मन के विमान या मिसाइल की जानकारी मिलते ही एयर डिफेंस सिस्टम तुरंत एक्टिवेट होता है और नुकसान पहुंचने से पहले ही उसे खत्म कर देता है. 
डिफेंस एक्सपर्ट मनोज जोशी ने एनडीटीवी से बातचीत में बताया कि एयर डिफेंस सिस्टम लगातार काम करता रहता है, ये सभी एयरक्राफ्ट्स को ट्रैक करता है. युद्ध जैसी स्थिति में ये और ज्यादा एक्टिव हो जाता है. कई बार सिस्टम ऑटोमेटिक तरीके से काम करता है, जो खुद ही टारगेट को ट्रैक करके और उसकी पहचान करके फायर करता है. जैसे ही खतरे का पता चलता है, इंटरसेप्शन शुरू हो जाता है.

कैसे होती है अपने विमानों की पहचान?

युद्ध जैसी स्थिति में दुश्मन और अपने विमान हवा में काफी पास हो सकते हैं, ऐसे में एयर डिफेंस सिस्टम को ये जानकारी होना जरूरी होता है कि वो किस विमान पर मिसाइल दाग रहा है. इसके लिए IFF (Identification Friend or Foe) तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इससे फ्रेंडली फायर की घटनाएं लगभग ना के बराबर हो जाती हैं. 

IFF इंटर्रोगेटर्स एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हैं, जो एक खास फ्रीक्वेंसी पर रेडियो सिग्नल भेजते हैं. ये सिग्नल हवा में उड़ रहे विमान पर लगे ट्रांसपोंडर से  पहचान करते हैं कि विमान अपना है या फिर दुश्मन का... ये एक एन्क्रिप्टेड सिस्टम होता है, जिसे दुश्मन डिक्रिप्ट नहीं कर सकता है. इस सिस्टम से कोई दुश्मन का विमान खुद की पहचान बदलकर भी हमला नहीं कर सकता है. 

सवाल का जवाब मिलना जरूरी

आसान भाषा में समझें तो ये एक ऐसा सिस्टम है, जिसमें रडार रेडियो सिग्नल से ये पता लगा लेता है कि दुश्मन का विमान हवा में है या फिर अपना... ये एक तरह का सवाल-जवाब होता है, रडार सवाल पूछता है और हवा में उड़ रही चीज में लगे डिवाइस से उसे जवाब मिलता है. अगर जवाब मैच नहीं होता है तो एयर डिफेंस सिस्टम को पता चल जाता है कि ये दुश्मन का विमान है. जवाब मैच होने पर मिसाइल फायर नहीं होती है.  

क्यों मारे गए अमेरिका के विमान?

अब सवाल है कि अमेरिका के विमानों को कैसे कुवैत ने गलती से मार गिराया. दरअसल जैसा कि हमने आपको बताया, हर देश ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम और अपने हथियारों के बीच एक कम्युनिकेशन सिस्टम बनाया है. ऐसे में अपने विमानों या फिर ड्रोनों की पहचान तो वो कर लेते हैं, लेकिन दूसरे देश के विमानों की पहचान करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है, फिर चाहे वो दोस्त देश का ही क्यों न हो. युद्ध जैसी स्थिति में ऐसी गलतियां होना काफी आम है. 

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