दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम से कितने KM दूर है जेवर एयरपोर्ट? जाने कहां से कितना लगेगा टाइम

गुरुग्राम से जेवर एयरपोर्ट थोड़ा दूर पड़ता है. यहां से दूरी करीब 75 से 95 किलोमीटर तक है. ट्रैफिक के हिसाब से यहां पहुंचने में दो से ढाई घंटे तक लग सकते हैं. हालांकि आने वाले समय में नए एक्सप्रेसवे और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स से ये समय कम होने की उम्मीद है.

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नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लिए ये एयरपोर्ट सबसे नजदीकी साबित होने वाला है

दिल्ली-एनसीआर में बना नया एयरपोर्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट इन दिनों लोगों के बीच जबरदस्त चर्चा में है. फ्लाइट्स शुरू होने से पहले ही हर कोई ये जानना चाहता है कि आखिर उनके घर से यहां तक पहुंचने में कितना वक्त लगेगा और दूरी कितनी है. खासकर दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम के लोगों के लिए ये सवाल बेहद अहम बन गया है, क्योंकि आने वाले समय में यही शहर इस एयरपोर्ट के सबसे बड़े यूजर बनने वाले हैं. ऐसे में आइए आसान भाषा में समझते हैं कि किस शहर से कितना सफर तय करना पड़ेगा.

दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट

दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट की दूरी आपकी लोकेशन पर डिपेंड करती है. साउथ दिल्ली से ये दूरी करीब 60 से 65 किलोमीटर है, जबकि सेंट्रल दिल्ली से लगभग 70 किलोमीटर पड़ती है. वहीं नॉर्थ और वेस्ट दिल्ली के लोगों को 75 से 80 किलोमीटर तक का सफर करना पड़ सकता है. आम ट्रैफिक में यहां पहुंचने में करीब डेढ़ से दो घंटे का समय लग सकता है. नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे इस सफर को आसान बनाते हैं.

नोएडा और ग्रेटर नोएडा से दूरी

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लिए ये एयरपोर्ट सबसे नजदीकी साबित होने वाला है. नोएडा के सेक्टर 18 या सेक्टर 62 से दूरी लगभग 35 से 45 किलोमीटर है. वहीं ग्रेटर नोएडा से ये महज 20 से 30 किलोमीटर दूर है. ऐसे में यहां रहने वाले लोग सिर्फ 40 मिनट से एक घंटे के अंदर एयरपोर्ट पहुंच सकते हैं. यमुना एक्सप्रेसवे इस रूट को तेज और स्मूद बनाता है.

गुरुग्राम से कितना लगेगा टाइम

गुरुग्राम से जेवर एयरपोर्ट थोड़ा दूर पड़ता है. यहां से दूरी करीब 75 से 95 किलोमीटर तक है. ट्रैफिक के हिसाब से यहां पहुंचने में दो से ढाई घंटे तक लग सकते हैं. हालांकि आने वाले समय में नए एक्सप्रेसवे और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स से ये समय कम होने की उम्मीद है.

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क्यों खास है जेवर एयरपोर्ट

जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद दिल्ली-एनसीआर का ट्रैवल सिस्टम पूरी तरह बदल सकता है. बेहतर रोड नेटवर्क, मेट्रो कनेक्टिविटी और रैपिड रेल जैसे प्रोजेक्ट इसे एक बड़ा एविएशन हब बना देंगे. इससे न सिर्फ दिल्ली एयरपोर्ट का दबाव कम होगा, बल्कि आसपास के शहरों के लिए सफर भी ज्यादा आसान हो जाएगा.

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