तब जापान, अब ईरान... कामिकाजी अटैक ने अमेरिका को दिलाई दूसरे विश्वयुद्ध की याद

Iran Kamikaze Drone Attack: ईरान ने इजरायल और अमेरिका के खिलाफ अपने कामिकाजी ड्रोन्स का इस्तेमाल किया है, जो अमेरिकी सेना को काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं. इस कामिकाजी हमले ने पहली बार अमेरिका की नाक में दम नहीं किया है, इससे पहले जापान ऐसा कर चुका है.

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ईरान ने अमेरिका पर किया कामिकाजी अटैक
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Iran Kamikaze Drone Attack: अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के साथ लड़ रहे हैं. सुप्रीम लीडर आयतुल्ला खामेनेई की मौत के बाद अब ईरान बदले की आग में झुलस रहा है और लगातार हमले कर रहा है. इस दौरान ईरान की तरफ से अपने कामिकाजी ड्रोन्स को काम पर लगाया गया और इन्होंने अमेरिकी सेना की नाक में दम कर दिया. बताया जा रहा है कि कामिकाजी अटैक के बाद अमेरिकी सेना को काफी नुकसान हुआ है. हालांकि ये पहली बार नहीं है, जब इस तरह के हमले ने अमेरिका को परेशान किया हो. इससे पहले द्वितीय विश्व युद्ध में जापान ने कामिकाजी अटैक से ही अमेरिकी सेना को भयंकर नुकसान पहुंचाया था, जिसके बाद हताश होकर अमेरिका ने जापान पर परमाणु बम गिराए थे.

कामिकाजी का मतलब क्या होता है?

कामिकाजी शब्द का इस्तेमाल पहली बार द्वितीय विश्व युद्ध में हुआ था. जब जापान की सेना ने अमेरिका पर आत्मघाती हमले शुरू किए थे. कामिकाजी का मतलब ही आत्मघाती होता है. ऐसी चीज, जो दुश्मन के इलाके में या उसके किसी हथियार पर जाकर टकरा जाए और खुद को भी तबाह कर ले, ऐसे हमलों को कामिकाजी कहा जाता है. 

जापान के कामिकाजी पायलट 

द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिका नहीं कूद रहा था, लेकिन तभी जापान ने अमेरिका के पर्ल हार्बर नौसेना बेस पर एक ऐस हमला किया, जिसने अमेरिका को बड़ा नुकसान पहुंचा दिया. ये एक कामिकाजी अटैक था, जिसमें फाइटर प्लेन उड़ाने वाले पायलट्स ने सीधे बंदरगाह पर खड़े नौसेना के जहाजों से प्लेन क्रैश कर दिया था. जापान के कई पायलट्स मौत का सामान बनकर अमेरिकी सेना पर टूट पड़े. इसके बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने युद्ध का ऐलान कर दिया. 

युद्ध में भी कामिकाजी हमले

जापान के सामने अमेरिका की ताकत काफी ज्यादा थी, लेकिन इस पर कब्जा करना इस देश के लिए सिर दर्द बन चुका था. जैसे ही अमेरिकी नौसेना या थल सेना जापान की सीमा को पार करती, वैसे ही कामिकाजी पायलट्स को काम पर लगा दिया जाता. ये आत्मघाती प्लेन अमेरिका के जहाजों पर कहर बनकर टूट रहे थे. 

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आखिरकार हुआ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल

जापान के साथ लड़ाई में अमेरिका ने अपने 12 हजार से ज्यादा जवान खो दिए, वहीं कई युद्धपोत और बाकी चीजों को भी भारी नुकसान पहुंचा. जब अमेरिका की कोई कोशिश काम न आई तो आखिरकार 6 अगस्त 1945 को सुबह करीब आठ बजकर 15 मिनट पर हिरोशिमा पर परमाणु बम गिरा दिया गया. इसके बाद जापान के शासक को सरेंडर करने का मौका दिया गया, लेकिन उसने ऐसा करने से इनकार कर दिया. इस बात से नाराज अमेरिका ने तीन दिन बाद फिर नागासाकी शहर पर दूसरा परमाणु बम गिराया. इसे इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी कहा जाता है, जिसमें लाखों लोगों की कुछ ही सेकेंड्स में मौत हो गई थी. 

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