क्या सेना का जवान भी बन सकता है अफसर? जानें कहां तक मिलता है प्रमोशन

भारतीय सेना में सिपाही से लेकर अफसर तक प्रमोशन की एक तय व्यवस्था होती है. सिपाही मेहनत और सर्विस के आधार पर NCO और फिर JCO तक प्रमोट हो सकता है, लेकिन आर्मी चीफ बनने के लिए आमतौर पर शुरुआत से कमीशंड ऑफिसर होना जरूरी होता है.

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सेना का सिपाही भी अफसर बन सकता है, लेकिन यह बिल्कुल भी आसान नहीं है.

Indian Army Promotion Process: भारतीय सेना में जॉब सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि सम्मान और देश सेवा माना जाता है. हर साल बड़ी संख्या में कैंडिडेट्स NDA-CDS जैसे एग्जाम देकर ऑफिसर बनने का सपना देखते हैं. लाखों लोग सेना के जवान बनने की प्रक्रिया में भी शामिल होते हैं, लेकिन क्या सेना का जवान अफसर बन सकता है. प्रमोशन का तरीका क्या होता है, सेना में प्रमोशन कहां मिलता है. क्या कोई जवान प्रमोशन के दम पर आर्मी चीफ की पद तक भी पहुंच सकता है. इस आर्टिकल में जानिए हर सवाल का जवाब..

भारतीय सेना की रैंक कैसे काम करती है

भारतीय सेना में रैंक सिस्टम तीन हिस्सों में बंटा होता है. सबसे ऊपर कमीशंड ऑफिसर (CO) होते हैं, जिनमें लेफ्टिनेंट से लेकर जनरल तक की रैंक आती है. इसके बाद जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) होते हैं, जैसे नायब सूबेदार, सूबेदार और सूबेदार मेजर. तीसरी कैटेगरी नॉन-कमीशंड ऑफिसर (NCO) और सोल्जर की होती है, जिसमें सिपाही, लांस नायक, नायक और हवलदार शामिल हैं.

क्या सेना का जवान भी अफसर बन सकता है

एक्सपर्ट्स के अनुसार, सेना का सिपाही भी अफसर बन सकता है, लेकिन यह बिल्कुल भी आसान नहीं है. सामान्य तौर पर सेना में अफसर बनने के लिए एनडीए, सीडीएस जैसी परीक्षाएं पास करनी होती हैं. यानी ज्यादातर अफसर सीधे अफसर एंट्री से ही आते हैं. हालांकि, सेना में कुछ सीमित व्यवस्थाएं होती हैं, जिनके जरिए जवान भी JCO तक प्रमोट हो सकता है। जेसीओ बनने के बाद कुछ मामलों में स्पेशल सेलेक्शन और ट्रेनिंग के जरिए कमीशंड ऑफिसर बनने का मौका मिलता है, लेकिन यह बेहद कठिन होता है.

सेना में जवान को कहां तक मिलता है प्रमोशन

एक जवान मेहनत, अनुशासन और सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर पहले लांस नायक, फिर नायक और उसके बाद हवलदार बन सकता है. इसके बाद चयन और खाली पदों के आधार पर वह नायब सूबेदार, सूबेदार और अंत में सूबेदार मेजर बनता है. यहीं पर ज्यादातर जवानों का प्रमोशन ग्राफ खत्म हो जाता है. सूबेदार मेजर, JCO कैडर का सबसे ऊंचा पद होता है.

अफसरों का प्रमोशन सिस्टम कैसा है

जो उम्मीदवार NDA, CDS या अन्य अफसर एंट्री से सेना में आते हैं, उन्हें ट्रेनिंग के बाद लेफ्टिनेंट रैंक मिलती है. समय और परीक्षा के आधार पर वे कैप्टन, मेजर, लेफ्टिनेंट कर्नल, कर्नल बनते हैं. इसके बाद चयन के जरिए ब्रिगेडियर, मेजर जनरल, लेफ्टिनेंट जनरल और अंत में आर्मी चीफ (जनरल) तक पहुंचा जा सकता है. यही वजह है कि सेना प्रमुख बनने के लिए अफसर एंट्री लगभग अनिवार्य मानी जाती है.

क्या सिपाही आर्मी चीफ बन सकता है

सिपाही से सीधे आर्मी चीफ बनना लगभग नामुमकिन है. आर्मी चीफ वही बनता है, जिसने शुरुआत से कमीशंड ऑफिसर के तौर पर करियर शुरू किया हो और दशकों तक बेहतरीन सर्विस दी हो. प्रमोशन यहां सिर्फ सीनियरिटी नहीं, बल्कि योग्यता, नेतृत्व क्षमता और रिकॉर्ड पर बेस्ड होता है.

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भारतीय सेना प्रमोशन नियम, क्या सिपाही अफसर बन सकता है, सेना में प्रमोशन कैसे मिलता है

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