कैसे काम करते हैं ट्रेन के ब्रेक, लगाने के कितनी देर बाद रुक जाती है गाड़ी?

बहुत कम लोग जानते हैं कि इतनी भारी भरकम ट्रेन आखिर रुकती कैसे है. कार या बाइक की तरह ट्रेन के ब्रेक तुरंत नहीं लगते. ट्रेन की रफ्तार, वजन और ट्रैक की स्थिति के हिसाब से ब्रेक काम करते हैं.

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इमरजेंसी ब्रेक खींचते ही हवा का दबाव अचानक बहुत तेजी से गिरता है.

भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है. रोजाना करोड़ों यात्री ट्रेन से सफर करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इतनी भारी भरकम ट्रेन आखिर रुकती कैसे है. कार या बाइक की तरह ट्रेन के ब्रेक तुरंत नहीं लगते. ट्रेन की रफ्तार, वजन और ट्रैक की स्थिति के हिसाब से ब्रेक काम करते हैं. यही वजह है कि ट्रेन को रोकने में समय और दूरी दोनों लगते हैं. आइए समझते हैं कि ट्रेन के ब्रेक कैसे काम करते हैं और ब्रेक लगाने के बाद ट्रेन कितनी देर में रुकती है.

ट्रेन में कौन से ब्रेक होते हैं?

ट्रेन में मुख्य रूप से एयर ब्रेक सिस्टम का इस्तेमाल होता है. हर डिब्बे में ब्रेक सिलेंडर लगे होते हैं. जो हवा के दबाव से काम करते हैं. इसके अलावा इंजन में डायनेमिक ब्रेक भी होते हैं. जिनमें मोटर खुद जनरेटर की तरह काम करके ट्रेन की रफ्तार कम करती है. कुछ हालात में हैंड ब्रेक और इमरजेंसी ब्रेक का भी उपयोग किया जाता है.

एयर ब्रेक सिस्टम कैसे काम करता है?

ट्रेन के इंजन में एक एयर कंप्रेसर होता है, जो पूरी ट्रेन में हवा का दबाव बनाए रखता है. जब लोको पायलट ब्रेक लगाता है, तो पाइप में हवा का दबाव कम हो जाता है. दबाव कम होते ही हर डिब्बे के ब्रेक पैड पहियों पर दबाव डालते हैं और ट्रेन धीरे धीरे रुकने लगती है. ये प्रोसेस एक साथ पूरी ट्रेन में होती है.

ब्रेक लगाने के बाद कितनी देर में रुकती है ट्रेन?

ये ट्रेन की स्पीड पर निर्भर करता है. अगर ट्रेन 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही है, तो उसे पूरी तरह रुकने में लगभग 1 से 1.5 किलोमीटर की दूरी और 1 से 2 मिनट तक का समय लग सकता है. ज्यादा रफ्तार और ज्यादा वजन होने पर ये दूरी और समय दोनों बढ़ जाते हैं.

इमरजेंसी ब्रेक में क्या होता है?

इमरजेंसी ब्रेक खींचते ही हवा का दबाव अचानक बहुत तेजी से गिरता है. इससे सभी डिब्बों के ब्रेक एक साथ पूरी ताकत से लगते हैं. हालांकि इससे ट्रेन जल्दी रुकती है. लेकिन यात्रियों को झटका लग सकता है.

ट्रेन को तुरंत क्यों नहीं रोका जा सकता?

ट्रेन का वजन हजारों टन होता है. इतनी भारी गाड़ी को अचानक रोकना न सिर्फ मुश्किल है, बल्कि खतरनाक भी हो सकता है. इसलिए ट्रेन के ब्रेक धीरे धीरे काम करते हैं. ताकि यात्रियों की सुरक्षा बनी रहे और ट्रेन पटरी से न उतरे. 

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ट्रेन को रोकना कार या बाइक जितना आसान नहीं होता. . ट्रेन की स्पीड और वजन के हिसाब से इसका ब्रेक काम करता है. ब्रेक लगाने के बाद ट्रेन को रुकने में समय और दूरी दोनों लगते हैं, ताकि यात्रियों की सुरक्षा बनी रहे.

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