IAS Mock interview question : बिहार में गंगा कितने जिलों से होकर गुजरती है? जानिए यहां सही जवाब

बिहार के 38 जिलों में से कई गंगा नदी के तट पर बसे हैं. बिहार में गंगा करीब 445 किलोमीटर का सफर तय करती है. नदी के किनारे बसे जिले ऐतिहासिक, प्रशासनिक और पर्यावरण के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं.

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बिहार में गंगा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि जीवन और संस्कृति की धारा हैं.

Bihar Ganga River Districts List: उत्तर भारत में बिहार सबसे अहम राज्यों में से एक है. यह अपनी सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक महत्व और अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता है. यही वजह है कि हर साल यहां बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं. इसके साथ ही बिहार में कई प्रमुख नदियां बहती हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण गंगा नदी हैं. यह सिर्फ राज्य की जल जीवनधारा नहीं है, बल्कि कई जिलों के प्रशासनिक और आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाती है. UPSC हो या कोई कॉम्पटेटिव एग्जाम ज्यादातर में बिहार और यहां की नदियों से जुड़े सवाल अक्सर पूछे जाते हैं. ऐसा ही एक सवाल है- 'बिहार में गंगा नदी के तट पर कितने जिला मुख्यालय हैं. आइए जानते हैं इसका जवाब...

बिहार में कुल कितने जिले हैं

बिहार में कुल 38 जिले हैं, जो 9 प्रमंडल में बंटे हुए हैं. प्रमुख प्रमंडल पटना, तिरहुत, सारण, दरभंगा, कोसी, पूर्णिया, भागलपुर, मुंगेर और मगध है. प्रदेश में 101 डिवीजन और 534 ब्लॉक हैं. यह जानकारी UPSC और राज्य लोक सेवा परीक्षा के लिए बेसिक जनरल नॉलेज के रूप में बेहद काम आती है.

बिहार में गंगा नदी का प्रवाह

गंगा नदी की कुल लंबाई 2525 किलोमीटर है. यह उत्तराखंड से निकलकर उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल होते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है. बिहार में गंगा नदी का कुल प्रवाह 445 किलोमीटर है. गंगा नदी बिहार के कुल 12 जिलों से होकर निकलती हैं.

बिहार में गंगा नदी के तट पर कितने और कौन-कौन से जिला मुख्यालय हैं

1. पटना

2. वैशाली

3. बक्सर

4. भोजपुर

5. सारण

6. समस्तीपुर

7. बेगूसराय

8. मुंगेर

9. कटिहार

10. भागलपुर

11. लखीसराय

12. खगड़िया

बिहार के लिए गंगा का महत्व

बिहार में गंगा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि जीवन और संस्कृति की धारा हैं. इस नदी के बिना कई गांवों की रोजमर्रा की जिंदगी, खेती-बाड़ी, पशुपालन और घरेलू कामकाज की कल्पना करना मुश्किल है. गंगा के पानी को लोग सिर्फ पीने के लिए ही नहीं, बल्कि इसे पवित्र मानकर पूजा, धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी इस्तेमाल करते हैं. गंगा के तट पर बसे मछुआरों की आजीविका सीधे इस नदी पर निर्भर है. उनकी जिंदगी में गंगा सिर्फ आर्थिक स्रोत नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व भी रखती है. मछुआरे इसे मां की तरह पूजते हैं और इसके साथ उनका रिश्ता गहरा जुड़ा हुआ है. बिहार के शहरों में आयोजित गंगा आरती और धार्मिक मेले इस नदी की महिमा और संस्कृति का प्रतीक हैं. दूर-दूर से लोग इन आयोजनों में शामिल होते हैं. गंगा को बिहार के लोगों के लिए जीवन, धर्म और संस्कृति का संगम माना जाता है.

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