Chandra Grahan 2026: इस साल का पहला चंद्र ग्रहण आज यानी 3 मार्च को लगने जा रहा है. भारत में इसे साइंस के अलावा धार्मिक महत्व से भी देखा जाता है, यही वजह है कि लाखों लोगों की दिलचस्पी ग्रहण को लेकर होती है. इस मौके पर कई तरह की चीजों को लेकर सावधानी बरतनी होती है. इसी बीच आज हम आपको बताएंगे कि हमेशा चंद्र ग्रहण सूर्य ग्रहण के बाद ही क्यों लगता है? इसका जवाब साइंस ने दिया है. आइए जानते हैं कि चंद्र ग्रहण क्यों लगता है और आमतौर पर ये सूर्य ग्रहण के ठीक बाद क्यों आता है.
साल में कब लगता है ग्रहण?
ग्रहणों का सीक्वेंस देखा जाए तो लगभग हर बार यही होता है कि पहले सूर्य ग्रहण लगता है और उसके ठीक बाद चंद्र ग्रहण होता है. इसे eclipse season भी कहा जाता है. यानी इसमें एक साथ लगातार दो ग्रहण लगते हैं. ऐसा चंद्रमा के ऑर्बिट के थोड़ा झुके होने के कारण होता है. आमतौर पर हर 6 महीने में ऐसा होता है.
किस वजह से लगता है ग्रहण?
चंद्रमा की कक्षा सूरज के चारों ओर पृथ्वी की कक्षा के सापेक्ष लगभग पांच डिग्री झुकी हुई होती है. इस झुकाव के चलते चंद्रमा अक्सर सूरज के नीचे से या ऊपर से गुजर जाता है और इस दौरान ग्रहण जैसी स्थिति नहीं बनती है. हालांकि साल में दो बार ये कक्षाएं दो बिंदुओं पर एक दूसरे को काटती हैं, जिसे नोड्स कहा जाता है.
कब बदल सकता है क्रम?
ज्यादातर बार पहले सूर्य ग्रहण लगता है और फिर चंद्र ग्रहण की स्थिति बनती है, लेकिन ये क्रम बदल भी सकता है. ये इस बात पर निर्भर करता है कि चंद्रमा अपने 'नोड' (Node) पर पूर्णिमा के वक्त पहले पहुंच रहा है या अमावस्या के वक्त...
क्या होता है Eclipse Season?
eclipse season का मतलब 34 दिनों का वो पीरियड होता है, जब सूर्य, पृथ्वी और नोड्स एक सीध में होते हैं. चंद्रमा 14 दिनों में पृथ्वी के एक तरफ से दूसरी तरफ चला जाता है, इसमें पहले सूर्य ग्रहण होता है और फिर दो हफ्ते बाद चंद्र ग्रहण लग जाता है. नोड्स किसी दरवाजे की तरह होते हैं, जिनके खुले रहने पर ग्रहण लगता है. चंद्रमा अमावस्या के दौरान पहले दरवाजे पर होता है, जब सूर्य ग्रहण की स्थिति बनती है. वहीं 14 दिन बाद पूर्णिमा पर वो दूसरे दरवाजे पर पहुंच जाता है, जिससे चंद्र ग्रहण जैसी स्थिति बनती है.














