क्या होता है एनालॉग पनीर, जिस पर FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने लगा दिया बैन?

Analog Paneer : महाराष्ट्र सरकार ने एक साल के लिए एनालॉग (नॉन-डेयरी) पनीर पर रोक लगा दी है. इसके बाद लोग जानना चाहते हैं कि यह आखिर क्या होता है, कैसे बनता है, क्या यह असली पनीर है और इसे लेकर विवाद क्यों खड़ा हुआ.

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एनालॉग पनीर को लेकर सख्त हुआ FDA

Analog Paneer : महाराष्ट्र सरकार ने एनालॉग (नॉन डेयरी) पनीर के प्रोडक्शन, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन, डिस्ट्रीब्यूशन और  बिक्री पर एक साल के लिए रोक लगा दी है. इसके बाद यह नाम अचानक चर्चा में आ गया है. बहुत से लोगों ने पहली बार एनालॉग पनीर के बारे में सुना है और उनके मन में सवाल है कि आखिर यह होता क्या है? क्या यह नकली पनीर है, इसे कैसे बनाया जाता है और क्या इसे खाना सुरक्षित है? अगर आपके मन में भी ऐसे सवाल हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. आसान भाषा में समझिए कि आखिर एनालॉग पनीर क्या है और महाराष्ट्र में इसे लेकर इतना बड़ा फैसला क्यों लिया गया.

आखिर क्या होता है एनालॉग पनीर?

एनालॉग पनीर ऐसा खाद्य उत्पाद है, जिसे देखने और स्वाद में पारंपरिक पनीर जैसा बनाया जाता है, लेकिन इसे तैयार करने का तरीका अलग होता है. यह हमेशा सिर्फ दूध से नहीं बनता. इसे तैयार करने में वनस्पति तेल, दूध पाउडर, स्टार्च और दूसरी खाद्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है. कुछ खाद्य उद्योग, रेस्टोरेंट और प्रोसेस्ड फूड बनाने वाली कंपनियां लागत कम रखने और एक जैसी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इसका इस्तेमाल करती हैं.

जहां पारंपरिक पनीर दूध को फाड़कर बनाया जाता है, वहीं एनालॉग पनीर में वनस्पति वसा, प्रोटीन, इमल्सीफायर, स्टार्च और फ्लेवरिंग एजेंट्स को मिलाकर पनीर जैसी बनावट तैयार की जाती है. इसके बाद इस मिश्रण को सांचे में जमाया जाता है. 

क्या ये नकली पनीर है?

एनलॉग पनीर नकली पनीर हो ऐसा जरूरी नहीं है. अगर एनालॉग पनीर तय खाद्य मानकों के अनुसार बनाया गया है और उसकी सही जानकारी दी गई है, तो इसे नकली या अवैध नहीं कहा जा सकता. समस्या तब होती है, जब इसे असली पनीर बताकर बेचा जाए. अगर इसे बनाने में प्रोसेस्ड फैट, नमक या दूसरे एडिटिव्स ज्यादा मात्रा में हों, तो इसका बार-बार सेवन सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता. वहीं, अगर इसे तय खाद्य मानकों के अनुसार बनाया गया है तो इसे सुरक्षित माना जाता है. 

दरअसल महाराष्ट्र में इसकी जांच के दौरान कई नमूने सबस्टैंडर्ड व अनसेफ पाए गए थे. जांच में कई नमूनों में दूध के नैचुरल फैट की जगह दूसरे नॉन डेयरी तत्वों के इस्तेमाल की पुष्टि हुई. विभाग का कहना है कि इस उत्पाद के लिए स्पष्ट खाद्य मानक तय नहीं हैं. इसी वजह से लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया. FDA कमिश्नर बनते ही IAS तुकाराम मुंढे एक बार फिर चर्चा में हैं और वो ऐसी मिलावटी चीजों को लेकर सख्त कार्रवाई कर रहे हैं. 

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