इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की तरफ से आयोजित नागरिक पुलिस उप-निरीक्षक और समकक्ष पदों की सीधी भर्ती 2025 में फाइनल आंसर-की और अंतिम चयन परिणाम को चुनौती देने वाली सभी रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया है. जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की सिंगल बेंच ने याची श्याम सुंदर और अन्य 116 याचिकाकर्ताओं की ओर से दाखिल 22 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि विषय विशेषज्ञों की राय लेकर परीक्षा नियामक संस्था की तय की गई आंसर की में किसी प्रकार की अवैधता या मनमाना रवैया नहीं पाया गया है. इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्ति पत्रों के बांटने पर पूर्व में लगाई गई अंतरिम रोक भी निष्प्रभावी हो गई है, जिससे चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल ये पूरा मामला 12 अगस्त 2025 को जारी विज्ञापन से जुड़ा हुआ है, जिसके तहत नागरिक पुलिस में उप-निरीक्षक और समकक्ष पदों के कुल 4543 पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे. विज्ञापन के नियमों और शर्तों के अनुसार लिखित परीक्षा के बाद बोर्ड की तरफ से उत्तर कुंजी जारी कर अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आपत्तियां आमंत्रित की जानी थी. ये भी तय था कि अगर कोई प्रश्न या उसके सभी विकल्प गलत पाए जाते हैं तो ऐसे प्रश्नों को निरस्त कर इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2009 में पवन कुमार अग्रहरि बनाम उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग मामले में प्रतिपादित सूत्र के अनुसार अंकों का समान वितरण किया जाएगा.
साथ ही अगर किसी प्रश्न के एक से अधिक विकल्प सही पाए जाते हैं तो उनमें से किसी एक सही विकल्प को चुनने वाले अभ्यर्थियों को पूरे अंक दिए जाने का प्रावधान था. इस भर्ती के तहत लिखित परीक्षा का आयोजन 14 और 15 मार्च 2026 को किया गया था. इसके बाद भर्ती बोर्ड ने 23 मार्च 2026 को अस्थाई उत्तर कुंजी जारी की और अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगी. कई अभ्यर्थियों ने तमाम सवालों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं.
फाइनल रिजल्ट के बाद कोर्ट में याचिका
फाइनल आंसर-की जारी होने के दिन ही सात मई 2026 को लिखित परीक्षा का परिणाम भी घोषित कर दिया गया. कुल 4543 पदों के सापेक्ष 12,333 अभ्यर्थियों को सफल घोषित कर 15 से 17 जून 2026 के बीच अभिलेखों की जांच और शारीरिक मानक परीक्षण के लिए बुलाया गया. इसके बाद सफल अभ्यर्थियों की शारीरिक दक्षता परीक्षा 29 जून से 4 जुलाई 2026 तक आयोजित की गई. सभी चरणों के पूरा होने के बाद बोर्ड ने 14 जुलाई 2026 को अंतिम चयन परिणाम घोषित कर दिया. इस परिणाम में असफल रहे अभ्यर्थियों और कुछ ऐसे उम्मीदवार शामिल थे जो लिखित परीक्षा ही पास नहीं कर सके थे, उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और फाइनल आंसर-की व अंतिम परिणाम की वैधता पर सवाल खड़े किए.
याचिकाकर्ताओं ने दी थी ये दलील
याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभाकर अवस्थी सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा जबकि राज्य सरकार और बोर्ड की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने पैरवी की. याचियों की मुख्य दलील यह थी कि वो दो श्रेणियों में बंटे हुए थे. पहली श्रेणी उन अभ्यर्थियों की थी, जिन्होंने प्रोविजनल आंसर की पर आपत्तियां दर्ज कराई थी, जबकि दूसरी श्रेणी में वो अभ्यर्थी थे जिनके उत्तर प्रोविजनल उत्तर कुंजी के अनुसार सही थे और उन्हें आपत्ति जताने की जरूरत नहीं पड़ी थी.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचियों के अधिवक्ताओं से सीधा सवाल किया कि क्या बोर्ड ने फाइनल आंसर-की तैयार करने में कोई दुर्भावना, पक्षपात या अनुचित साधन अपनाया था. इस पर याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता बोर्ड की कार्यप्रणाली में किसी तरह के पूर्वाग्रह या दुर्भावना का कोई ठोस प्रमाण नहीं दे सके. राज्य सरकार की ओर से पेश जवाब में बताया गया कि पूरी प्रक्रिया तय नियमों के तहत विषय विशेषज्ञों की राय लेकर पूरी पारदर्शिता से की गई है. याचिकाकर्ताओं ने इस पर कोई प्रति-शपथपत्र दाखिल करने से भी मना कर दिया.
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि विभिन्न विशेषज्ञों के बीच किसी प्रश्न के उत्तर को लेकर मतभेद होना स्वाभाविक है और किसी भी राय को एकमात्र अंतिम राय नहीं माना जा सकता. परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था होने के नाते यह भर्ती बोर्ड का वैधानिक अधिकार है कि वह विषय विशेषज्ञों की राय के आधार पर सही उत्तर का निर्धारण करे. कोर्ट ने कहा कि फाइनल आंसर-की जारी होने के बाद दोबारा आपत्तियां मांगने की मांग पूरी तरह से आधारहीन है, क्योंकि यदि ऐसा करने की अनुमति दी गई तो यह एक कभी न खत्म होने वाला सिलसिला बन जाएगा और किसी भी भर्ती परीक्षा का परिणाम कभी अंतिम रूप नहीं ले सकेगा.
कोर्ट ने 4543 पदों पर लगभग पूरी हो चुकी चयन प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए श्याम सुंदर सहित सभी संबंधित अन्य 21 रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया. इससे पहले 30 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती 2025 के नियुक्ति पत्र जारी करने पर अंतरिम रोक लगा दी थी.
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