नौकरी छोड़ने से पहले रिलीविंग सर्टिफिकेट लेना जरूरी या नहीं? जान लीजिए ये नियम

Labour Law : नौकरी छोड़ने से पहले रिलीविंग लेटर लेना जरूरी है या नहीं. क्या इसके बिना नई कंपनी में जॉब नहीं मिलेगी. अगर पुरानी कंपनी लेटर देने में आनाकानी करे, तो आपके पास क्या ऑप्शन हैं. जानिए रिलीविंग सर्टिफिकेट से जुड़ा लेबर लॉ क्या कहता है.

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अगर आपने सब कुछ सही किया है और फिर भी कंपनी लेटर नहीं दे रही, तो सबसे पहले HR और अपने मैनेजर को औपचारिक ईमेल भेजें.

Relieving Letter Rule: अक्सर लोग जोश-जोश में पुरानी नौकरी को बाय-बाय कह देते हैं, लेकिन जाते-जाते एक कागज लेना भूल जाते हैं, जिसे रिलीविंग लेटर (Relieving Letter) कहते हैं. बाद में जब नई कंपनी जॉइन करने की बारी आती है, तो HR इसी कागज के लिए अड़ जाता है. अगर आप भी किसी वजह से अपनी कंपनी से रिजाइन करने वाले हैं या कर चुके हैं या जॉब स्विच कर रहे हैं, तो जान लीजिए कि ये रिलीविंग सर्टिफिकेट लेना जरूरी है या नहीं और अगर कंपनी न दे तो आपके पास क्या-क्या ऑप्शन हैं.

क्या रिलीविंग लेटर लेना जरूरी है

भारत के लेबर लॉ (Labour Laws) में ऐसा कोई साफ नियम नहीं है जो कहे कि कंपनी को ये लेटर देना ही पड़ेगा. 1946 का एक पुराना एक्ट (Standing Orders Act) कहता है कि कर्मचारी को उसके काम का रिकॉर्ड मिलना चाहिए, लेकिन रिलीविंग लेटर शब्द का सीधा जिक्र वहां भी नहीं है. मतलब कानूनी रूप से यह कंपलसरी नहीं है, लेकिन प्रोफेशनल दुनिया का दस्तूर यही है कि कंपनी इसे खुशी-खुशी देती है.

रिलीविंग लेटर और एक्सपीरियंस लेटर में अंतर क्या है

लोग अक्सर इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन ये अलग-अलग हैं. रिलीविंग लेटर आपका एग्जिट पास होता है. यह सबूत है कि आपने नोटिस पीरियड पूरा किया, कंपनी का लैपटॉप-ID कार्ड लौटा दिया और अब आप पर कोई बकाया नहीं है. एक्सपीरियंस लेटर (Experience Letter) आपके काम और काम करने के तरीके का सर्टिफिकेट होता है. इसमें लिखा होता है कि आपने कितने साल काम किया और आपका रोल क्या था.

नई नौकरी में रिलीविंग लेटर के बिना क्या परेशानी आती है

कानूनी तौर पर भले ही रिलीविंग लेटर का कहीं जिक्र नहीं है, लेकिन बड़ी कंपनियां (MNCs) और कई सरकारी विभाग बिना रिलीविंग लेटर के जॉइनिंग नहीं देते हैं. नई कंपनी चेक करती है कि आपने पुरानी नौकरी (Background Verification) सही तरीके से छोड़ी है या नहीं. बिना इस लेटर के आप पेंडिंग लिस्ट में डाल दिए जा सकते हैं. कई बार PF ट्रांसफर और अन्य कागजी कामों में भी इसकी जरूरत पड़ सकती है.

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कंपनी कब रिलीविंग लेटर रोक सकती है

1. आपने नोटिस पीरियड (Notice Period) पूरा न किया हो.

2. कंपनी का सामान (लैपटॉप, मोबाइल, चाबियां) न लौटाया हो.

3. आपके खिलाफ कोई अनुशासन की जांच (Disciplinary Enquiry) चल रही हो.

अगर कंपनी रिलीविंग लेटर न दे, तो क्या करें

अगर आपने सब कुछ सही किया है और फिर भी कंपनी लेटर नहीं दे रही, तो सबसे पहले HR और अपने मैनेजर को औपचारिक ईमेल भेजें. ईमेल का रिकॉर्ड (Trail) संभाल कर रखें. अगर ईमेल से बात न बने, तो किसी वकील के जरिए कंपनी को लीगल नोटिस भेजें. ज्यादातर कंपनियां कोर्ट-कचहरी के नाम से ही लेटर दे देती हैं. आप अपने शहर के लेबर कमिश्नर ऑफिस में शिकायत कर सकते हैं या केंद्र सरकार की ऑनलाइन पोर्टल पर भी शिकायत कर सकते हैं.

अगर रिलीविंग लेटर न मिले तो क्या कोई ऑप्शन है

अगर पुरानी कंपनी बहुत ज्यादा परेशान कर रही है, तो आप नई कंपनी को कुछ सबूत दिखा सकते हैं. इसमें रिजाइन एक्सेप्ट होने वाला ईमेल (Resignation Acceptance Email), आखिरी महीने की सैलरी स्लिप, बैंक स्टेटमेंट या फिर आप एक एफिडेविट दे सकते हैं, जिसमें लिखना होता है कि आपने जॉब सही तरह से छोड़ी है.

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