Minimum wages : महंगाई के इस दौर में एक आम मजदूर के लिए घर चलाना किसी चुनौती से कम नहीं है. दिल्ली-NCR के औद्योगिक इलाकों (नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद) में काम करने वाले लाखों प्रवासी मजदूर आज बेहतर वेतन की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. उनका कहना है कि कमरे का किराया और खाने-पीने के खर्च के बाद हाथ में कुछ नहीं बचता. ऐसे में आइए जानते हैं, दिल्ली से लेकर बिहार तक क्या है न्यूनतम मजदूरी.
दिल्ली: देश में सबसे बेहतर भुगतान
- अकुशल (Unskilled): 19,846 प्रति माह (763 प्रतिदिन)
- अर्द्ध-कुशल (Semi-skilled): 21,813 प्रति माह (839 प्रतिदिन)
- कुशल (Skilled): 23,905 प्रति माह (919 प्रतिदिन)
ग्रेजुएट स्टाफ: जो क्लर्क या सुपरवाइजर स्नातक हैं, उन्हें कम से कम 25,876 रुपये प्रति माह (995 प्रतिदिन) मिलना अनिवार्य है.
उत्तर प्रदेश: आबादी बड़ी, पर मजदूरी कम?
उत्तर प्रदेश में दरों में सुधार तो हुआ है, लेकिन यह दिल्ली के मुकाबले काफी कम है. यहां की दरें कुछ इस प्रकार हैं:
- अकुशल: 11,313 प्रति माह (435.14 प्रतिदिन)
- अर्द्ध-कुशल: 12,120 प्रति माह (478.65 प्रतिदिन)
- कुशल: 13,940.37 प्रति माह (536.16 प्रतिदिन)
बिहार: नई दरों से कितनी मिली राहत?
बिहार में भी 1 अप्रैल 2026 से VDA (Variable Dearness Allowance) जोड़कर नई दरें लागू कर दी गई हैं.
- अकुशल - 13080 प्रतिमाह (प्रतिदन 436.00 रुपये)
- अर्द्ध-कुशल - 13560 प्रतिमाह (प्रतिदन 452.00 रुपये)
- कुशल - 16530 प्रतिमाह (प्रतिदन 551.00 रुपये)
- अति-कुशल - 20,160 प्रतिमाह (प्रतिदन 672.00 रुपये)
आंकड़ों पर गौर करें तो दिल्ली और यूपी-बिहार की मजदूरी में जमीन-आसमान का अंतर है. जहां दिल्ली में एक अकुशल मजदूर महीने के लगभग 20,000 कमा सकता है, वहीं यूपी में यह आंकड़ा 11,000 के आसपास सिमट जाता है. यही कारण है कि भारी संख्या में लोग बिहार और यूपी से पलायन कर दिल्ली-NCR का रुख करते हैं. हालांकि, NCR में रहने की लागत (Cost of Living) भी उतनी ही अधिक है.
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