राज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड में एक बार फिर इंडिया गठबंधन के बीच खींचतान दिखने लगा है. झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होने वाला है. आंकड़ों के गणित के मुताबिक, यह दोनों सीट सत्ताधारी गठबंधन के खाते में ही आएगी. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि गठबंधन में ही प्रेशर पॉलिटिक्स शुरू हो गया है. बीते गुरुवार (4 जून) की शाम को JMM प्रमुख और राज्य के सीएम हमेंत सोरेन से बिना किसी सहमति के कांग्रेस पार्टी ने प्रत्याशी का ऐलान कर दिया. इसके बाद सीएम हेमंत सोरेन ने शुक्रवार (5 जून) को पार्टी के विधायकों और मंत्रियों की आपात बैठक बुलाई. बैठक में राज्यसभा चुनाव की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई.
बैठक के बाद खबर सामने आई है कि सभी विधायकों और मंत्रियों ने एक स्वर में राज्यसभा की दोनों सीटों पर जेएमएम उम्मीदवार उतारने का समर्थन किया. हालांकि पार्टी की ओर से उम्मीदवारों के नामों की घोषणा अभी नहीं की गई है और इस पर अंतिम निर्णय होना बाकी है.
5 जून को होना था प्रत्याशी पर फैसला
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री की तरफ से कांग्रेस पार्टी को यह कहा गया था कि 5 जून को राज्यसभा चुनाव को लेकर फैसला लिया जाएगा. लेकिन इससे पहले ही कांग्रेस पार्टी ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के सलाहकार प्रणव झा को राज्यसभा प्रत्याशी घोषित कर दिया गया. माना जा रहा है कि इसके पीछे कांग्रेस की मंशा JMM पर दवाब बनाने की है.
अध्यक्ष जल्द लेंगे फैसला
दूसरी ओर कांग्रेस के इस कदम के बाद देर रात ही जेएमएम ने अपने सभी विधायकों को फोन किया, जिसमें कहा गया कि मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है जिसमें राज्यसभा चुनाव को लेकर चर्चा होगी. जेएमएम के लगभग सभी विधायकों के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैठक की और फैसला लिया कि जेएमएम दोनों सीटों पर प्रत्याशी उतारेगा. बैठक के बाद झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे ने बताया कि जेएमएम के सभी विधायक और मंत्री ने अपनी भावना से अवगत कराया है हमारे अध्यक्ष इसपर जल्द ही निर्णय ले लेंगे.
नंबर के गणित का कांग्रेस को नहीं रहा ध्यान
राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने गुरुवार को प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर जेएमएम पर जो दाव चला वह उल्टा पड़ गया. विधानसभा में विधायकों का जो आंकड़ा है उसके हिसाब से कांग्रेस मुश्किल में दिखाई दे रही है. कांग्रेस पार्टी के पास 16 विधायक हैं. जीत के लिए प्रथम वरीयता के 28 विधायकों का समर्थन जरूरी है. यानि कांग्रेस को 12 विधायक और जुटाने होंगे जो फिलहाल संभव होता नहीं दिख रहा है. सत्ताधारी गठबंधन में राजद के 4, माले के 2 विधायक हैं. राजद कोटे से सरकार में एक मंत्री भी हैं जाहिर है कि वे किसी भी हालत में कांग्रेस के साथ नहीं जा सकते हैं.
बीजेपी के लिए खुला रास्ता
झारखंड में विपक्षी गठबंधन के पास 24 विधायक हैं जिसमें भाजपा के 21, जदयू, लोजपा और आजसू के एक-एक विधायक हैं. भाजपा को जीत के जादुई आँकड़े के लिए चार विधायकों का जुगाड़ करना होगा. जो स्थिति बन रही है उसमें यह संभावना प्रबल हो गई है कि अब द्वितीय वरीयता का वोट फिर निर्णायक हो सकता है.
राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं का दौर जारी है. आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नाम सामने आने के साथ चुनावी तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है.
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