Baharagora News: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा स्थित स्वर्णरेखा नदी में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब वहां द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के समय के दो विशालकाय जिंदा बम बरामद हुए. 227 किलो वजनी इन विनाशकारी बमों के खतरे को देखते हुए भारतीय सेना ने बुधवार को एक बेहद जटिल ऑपरेशन चलाकर इन्हें सफलतापूर्वक डिफ्यूज कर दिया.
खाली करावा लिए गए आसपास के गांव
इस हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह और कैप्टन आयुष कुमार सिंह ने किया, जिनके साथ सेना के 50 जांबाज इंजीनियरों की टीम मौजूद थी. खतरे की गंभीरता को देखते हुए सेना ने ऑपरेशन सेंटर को मुख्य स्थल से करीब 1.5 किलोमीटर दूर रखा था. धमाके के असर से जान-माल का नुकसान न हो, इसके लिए आसपास के गांवों को पूरी तरह खाली करा लिया गया था और जमीन से लेकर आसमान तक सुरक्षा का कड़ा पहरा बिठाया गया था.
बालू की बोरियों से बनाया गया मजबूत सुरक्षा घेरा
बम को डिफ्यूज करने की प्रक्रिया किसी फिल्म के सीन जैसी रोमांचक थी. मंगलवार को पूरे दिन भौगोलिक स्थिति और नदी के बहाव का बारीकी से अध्ययन करने के बाद बुधवार को सेना ने रणनीति बदली. जहां बम को डिफ्यूज करना था, वहां जमीन के अंदर करीब 15 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया. बमों को इस गड्ढे में रखने के बाद चारों ओर से बालू से भरी बोरियों का एक मजबूत सुरक्षा घेरा (Bunker) बनाया गया, ताकि विस्फोट की ऊर्जा नीचे की ओर ही सीमित रहे.
भारत माता के जयकारों से गूंज उठा इलाका
जैसे ही सेना ने सुरक्षित दूरी से बमों को डिफ्यूज किया, एक तेज धमाका हुआ और सदियों पुराना खतरा हमेशा के लिए खत्म हो गया. ऑपरेशन के सफल होते ही वहां मौजूद ग्रामीणों ने खुशी से तालियां बजाईं और 'भारत माता की जय' के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा. ग्रामीणों ने सेना के साहस को सलाम किया, जिसने इतनी बड़ी मुसीबत को बिना किसी नुकसान के टाल दिया.














