झारखंड में मिले अमेरिकी बम का कितना खतरनाक विस्फोट होगा? सेना ने बारीकी से की जांच

अमेरिकी बम को करीब 8 दिन पहले पूर्वी सिंहभूम के बहरागोड़ा प्रखंड के पानीपड़ा-नागुड़साई क्षेत्र में सुवर्णरेखा नदी के किनारे स्थानीय लोगों ने देखा था. बम का आकार गैस सिलेंडर जैसा है.

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सेना ने अमेरिकी बम की बारीकी से की जांच

झारखंड के सुवर्णरेखा नदी में मिले द्वितीय विश्व युद्ध के समय के अमेरिकी जिंदा बम को लेकर सेना ने कार्रवाई तेज कर दी है. रांची से पहुंची सेना की टीम ने मौके पर पहुंचकर बारीकी से अमेरिकी बम का निरीक्षण किया और बम का मेजरमेंट भी किया गया. इस दौरान ड्रोन कैमरे की मदद से आसपास के पूरे इलाके और गांवों का सर्वे भी किया गया है. सेना की टीम अपनी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपेगी. इसके बाद सीनियर अधिकारियों के निर्देश पर बम को डिफ्यूज करने पर फैसला लिया जाएगा. 

विस्फोट की तीव्रता का आकलन

अमेरिकी बम की जांच करने पहुंची सेना की टीम का नेतृत्व कर रहे कैप्टन आयुष कुमार सिंह ने बताया कि यह एक जिंदा बम है और इसके विस्फोट की तीव्रता का आकलन किया जा रहा है. मेजरमेंट किया गया है. विस्फोट कितना बड़ा होगा, इसका आकलन किया जा रहा है. सेना की टीम अपनी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपेगी और उन्हीं के निर्देश के बाद बम को डिफ्यूज करने की कार्रवाई की जाएगी. 

बम का निरीक्षण करने पहुंची सेना की टीम

8 दिन पहले नदी किनारे मिला था बम

बता दें कि करीब 8 दिन पहले पूर्वी सिंहभूम के बहरागोड़ा प्रखंड के पानीपड़ा-नागुड़साई क्षेत्र में सुवर्णरेखा नदी के किनारे स्थानीय लोगों ने इस बम को देखा था. जिसके बाद तुरंत बहरागोड़ा पुलिस को इसकी सूचना दी गई थी. बम का आकार गैस सिलेंडर जैसा है. यह अमेरिकी जिंदा बम द्वितीय विश्व युद्ध के समय का बताया जा रहा है. जो मिट्टी और बालू के नीचे दबा हुआ था. गैस सिलेंडर के आकार वाले बम पर लिखा है-AN-M64 500-LB… American Made… Unexploded (UXO). 

अभी एक दिन पहले ही इस खतरनाक अमेरिकी जिंदा बम के साथ खिलौना की तरह स्थानीय लोग फोटो खिंचवाते नजर आए. प्रशासन की अपील के बावजूद लोग बेखौफ होकर उसके करीब पहुंचे और कई ग्रामीणों ने बम के साथ सेल्फी ली. बड़ी बात है कि प्रशासन ने साफ कहा था कि बम के पास जाने की मनाही है. किसी भी तरह की छेड़छाड़ पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. फिर भी लोग जान जोखिम में डालकर तस्वीरें लेते दिखाई दिए.

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