बेकाबू मालगाड़ी ने स्कॉर्पियो को मारी जोरदार टक्कर, 500 मीटर तक घसीटा, ड्राइवर ने कूदकर बचाई जान

बोकारो थर्मल में बेकाबू मालगाड़ी ने गेट तोड़कर स्कॉर्पियो को 500 मीटर तक घसीटा. रेलवे प्रबंधन की लापरवाही पर सवाल खड़े हो गए हैं. पढ़िए रिपु सूदन की रिपोर्ट.

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हादसे के बाद रेलवे प्रबंधन सवालों के घेरे में है.

झारखंड के बोकारो थर्मल पावर प्लांट में रविवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. कोयला खाली कर चुकी एक मालगाड़ी अचानक बेकाबू हो गई और प्लांट के गेट को तोड़ते हुए बाहर निकल गई. इस घटना से पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई. तेज रफ्तार में निकली इस मालगाड़ी ने गेट के पास खड़ी एक स्कॉर्पियो को जोरदार टक्कर मार दी. टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ी को लगभग 400 से 500 मीटर तक घसीटते हुए ले गई. स्कॉर्पियो चालक अमरदीप ने समय रहते गाड़ी से कूदकर अपनी जान बचा ली. हालांकि, स्कॉर्पियो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 4 बजे कोयला लदा रैक प्लांट में दाखिल हुआ था और उसे खाली कर लिया गया. नियमों के मुताबिक, रैक को इंजन आगे की ओर रखकर बाहर निकाला जाना चाहिए था, लेकिन इसे रिवर्स में निकाला जा रहा था. पीछे गार्ड की बोगी भी मौजूद नहीं थी और न ही कोई सिग्नलिंग व्यवस्था थी.  

पैसेंजर ट्रेन से टकरा सकती थी मालगाड़ी

रफ्तार अधिक के कारण मालगाड़ी गेट तोड़ते हुए आगे बढ़ती रही और करीब 500 मीटर दूर जाकर उसका पिछला हिस्सा बेपटरी हो गया, जिसके बाद ट्रेन रुकी. अगर उसी समय मेन लाइन का गेट खुला होता तो गोमो-चोपन पैसेंजर ट्रेन के साथ बड़ा हादसा हो सकता था. गेट बंद होने के चलते एक बड़ी दुर्घटना टल गई.

प्रशासन ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, रेलवे अधिकारी और CISF की टीम मौके पर पहुंची. थाना प्रभारी पिंकू कुमार यादव, स्टेशन मैनेजर शैलेश कुमार और CISF निरीक्षक प्रशांत कुमार प्रसून ने स्थिति का जायजा लिया. रैक चालक अरुण कुमार के खिलाफ सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर जांच शुरू कर दी गई है.

स्थानीय लोगों में गुस्सा

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है. लोगों का कहना है कि अगर ओवरब्रिज का निर्माण समय पर पूरा हो गया होता तो ऐसी घटना नहीं होती. अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट और जिम्मेदारों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं.

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