योगी के कालनेमि वाले बयान से और बढ़ा मामला, NDTV पर अविमुक्तेश्वरानंद और रामभद्राचार्य में तीखी बहस

जगद्गुरु रामभद्राचार्य आपको शंकाराचार्य नहीं मानते इस सवाल पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वो मोदी जी के मित्र हैं, योगी जी के सगे-संबंधी हैं वो तो कहेंगे ही.  

विज्ञापन
Read Time: 5 mins
NDTV पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच चर्चा.
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना चौथे दिन भी जारी रहा और प्रशासन ने उनकी पालकी रोकी थी.
  • इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कालनेमि वाले बयान से यह मामला और बढ़ता नजर आ रहा है.
  • गुरुवार को एनडीटीवी पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई.

Swami Avimukteshwarananda Dharna: प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का धरना आज चौथे दिन भी जारी रहा. रविवार को मौनी अमावस्या के दिन पालकी के साथ संगम नोज पर जाते समय प्रशासन ने उन्हें रोक दिया था. इस दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अनुयायियों के साथ हाथापाई भी हुई थी. इस घटना के बाद धरने पर बैठे अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर यूपी की राजनीति तेज हो गई है. विपक्षी दल सपा के नेता अखिलेश यादव ने उनसे बात की. उन्होंने कहा कि किसी भी साधु-संत का अपमान होगा तो समाजवादी पार्टी उसके विरोध में खड़ा रहेगा. दूसरी ओर सीएम योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर हमला बोला. 

योगी ने कालनेमि का जिक्र कर साधा निशाना

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि ऐसे तमाम कालनेमि होंगे, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे होंगे. हमें उनसे सावधान होना होगा. हमें उनसे सतर्क रहना होगा. योगी आदित्यनाथ ने यह बयान गुरुवार को हरियाणा के सोनीपत में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दी. 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के धरने को लेकर संत समाज भी बंटा है. इस पूरे विवाद पर गुरुवार शाम NDTV पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और जगद्गुरु रामभद्राचार्य आमने-सामने नजर आए. इस दौरान दोनों संत एक-दूसरे पर आरोप लगाते नजर आए. 

Advertisement

'शिक्षा, स्वास्थ्य पर बात करें सीएम, धर्म की चर्चा धर्माचार्य पर छोड़ें'

सीएम योगी के कालेनमि वाले बयान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि एक राजनेता जो मुख्यमंत्री है, वो शिक्षा की बात नहीं करता, स्वास्थ्य की बात नहीं करता, लॉ एंड ऑर्डर की बात नहीं करता, प्रदेश की खुशहाली की बात नहीं करता, वो कालनेमि और धर्म-अधर्म के बारे में बात करता है, यहा कहां तक उचित है? मुख्यमंत्री को अपने प्रदेश की खुशहाली के बारे में चर्चा करना चाहिए, धर्म-अधर्म का बात धर्माचार्य पर छोड़ना चाहिए. 

योगी को लेकर कहा- कालनेमि तो वही सिद्ध होते हैं

कालनेमि का मतलब है कि जो जो नहीं है, वो बनके दिखाए. जब आप राजनेता हो, मुख्यमंत्री बने हो तो अपने आप को धर्माचार्य क्यों दिखा रहे हो. कालनेमि तो वहीं सिद्ध होते हैं. कोई व्यक्ति एक समय एक ही चीज हो सकता है, दो चीजें तो नहीं हो सकता है. कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री और धर्माचार्य तो नहीं हो सकता है. कालनेमि की परिभाषा चुंबक की तरह उन्हीं की ओर बढ़ रहा है. 

Advertisement

रामभद्राचार्य ने फिर कहा- अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य नहीं है

जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि योगी आदित्यनाथ मेरे स्नेहभाजन हैं, मेरे छोटे भाई है. किसी भी प्रकार का लाक्षण उनके चरित्र में नहीं आया है. उनको यदि कोई हुमांयू और औरंगजेब कहे तो यह किसी भी सुधि व्यक्ति को सहन नहीं होगा. और जिसने योगी को कालनेमि कहा वो व्यक्ति को इतना धृष्ट है कि उसने मेरे लिए कह दिया था वह विकलांग है, उन्हें संन्यास लेने का अधिकार नहीं. वास्तव में वह व्यक्ति शंकराचार्य भी नहीं है. कोर्ट में एक मामला चल रहा है. अमावस्या के दिन रथ लेकर गंगा के तट पर स्नान करने जा रहा है यह कितनी अशास्त्रीय बात है. 

जगद्गुरु रामभद्राचार्य आपको शंकाराचार्य नहीं मानते... इस सवाल पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वो मोदी जी के मित्र हैं, योगी जी के सगे-संबंधी हैं वो तो कहेंगे ही.  

शंकराचार्य में कौन सी संधि, इस बात का भी ज्ञान नहीं

मोदी-योगी के मित्र पर जगद्गुरु ने कहा कि मैं किसी का मित्र नहीं हूं. जो शास्त्र के विरुद्ध बात करेगा कि मैं उसका विरोध करता हूं. पहले तो इन्हें यह बताना चाहिए कि किसी को वाहन पर गंगा स्नान के लिए तट पर जाना चाहिए क्या? ये शंकराचार्य हैं पहले तो इसे प्रमाणित करें. शंकराचार्य शब्द में कौन सी संधि होगी, इस बात का भी इसको ज्ञान नहीं है. 

संत Vs संत की लड़ाई पर रामभद्राचार्य ने कहा यह संत vs संत नहीं संत vs असंत का मामला है. इसलिए उनको दंड मिला है. 

Advertisement

यूपी सीएम योगी है या नहीं, अविमुक्तेश्वरानंद बोले- पहले थे, अब नहीं

योगी आदित्यनाथ योगी हैं या नहीं, इस सवाल पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि योगी जी जब तक गद्दी पर बैठे थे, तब तक संत थे, नाथ सप्रदाय के योगी थे. लेकिन जब उन्होंने भाजपा ज्वाइन करके मुख्यमंत्री पद संभाल लिया तब से वो राजनेता हैं. संत और राजनेता दोनों एक बार नहीं होते. मुसलमानों में ऐसा होता है कि धर्माचार्य ही राजा होता है. हिंदुओं में ऐसा नहीं होता है. 

Advertisement

विपक्ष से पैसे लेने के आरोप पर क्या बोले अविमुक्तेश्वरानंद

मौनी अमावस्या के दिन गंगा तट पर हुई अव्यस्था के बारे में रामभद्राचार्य ने कहा कि अव्यवस्था इन्होंने फैलाई. उन्होंने विपक्ष से पैसे लेकर अव्यवस्था फैलाने का भी आरोप लगाया. इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जो जैसा होता है वैसा ही दूसरों के बारे में भी सोचता है. ये पैसा लेकर करते होंगे तभी उन्होंने हमपर आरोप लगाया. सपा नेता अखिलेश यादव के बयान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनको लगता है कि मेरा साथ देने से उनको फायदा होगा इसलिए वो बोल रहे हैं. भाजपा बोलती तो उन्हें भी फायदा होता. 

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- स्नान कर इस विषय का समापन करें अविमुक्तेश्वरानंद

संत VS संत की इस बहस में दोनों ओर से जमकर तर्क दिए गए. यह लड़ाई आगे कहां जाएगी, यह नहीं पता. लेकिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना वसंत पंचमी के दिन समाप्त होने की उम्मीद जगी है. डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने इसकी पहल की है. गुरुवार को आजमगढ़ पहुंचे डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा- मैं ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों में प्रणाम करता हूं. उनसे प्रार्थना है कि वह स्नान कर इस विषय का समापन करें. डिप्टी सीएम के बयान के बाद यह चर्चा है कि वसंत पंचमी के दिन स्नान के बाद शंकराचार्य अपना धरना समाप्त करें.

यह भी पढ़ें - प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का धरना जारी, योगी आदित्यनाथ ने कहा- कालनेमियों से सावधान रहें

Topics mentioned in this article
Swami Avimukteshwarananda
Jagadguru Rambhadracharya
Yogi Adityanath
Swami Avimukteshwarananda Vs Rambhadracharya
Prayagraj Magh Mela