2 साल अंधेरी कोठरी में रखा, थर्ड डिग्री दी, हाथ-पांव तोड़े, DNA टेस्ट ने खोली पुलिस की पोल

मलखान ने बताया कि कोरोना काल में वह देसी दवा बेचने पिनाना गया था, वहां चेतराम की मां ने उसे ‘धर्म पुत्र’ कहकर अपना लिया.11 दिसंबर 2023 को गोहाना CIA ने उसे चेतराम समझकर उठा लिया और 20 दिसंबर को कोर्ट में पेश कर दिया.

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हरियाणा पुलिस का गजब कारनामा.
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सोनीपत पुलिस ने हत्या के मामले में मलखान नाथ को चेतराम बनाकर गिरफ्तार किया था.
दो साल जेल में रहने के बाद डीएनए टेस्ट ने साबित किया कि मलखान नाथ चेतराम नहीं हैं.
मलखान नाथ ने बार-बार अपनी असलियत बताई लेकिन पुलिस ने उसकी बात नहीं मानी और थर्ड डिग्री दी.

हरियाणा में पुलिस की लापरवाही का अजब-गजब मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सोनीपत पुलिस ने हत्या के पुराने केस में करनाल के मलखान नाथ को किसी तरह चेतराम बनाकर न सिर्फ गिरफ्तार किया, बल्कि सीधे जेल भेज दिया.दो साल तक वह सलाखों के पीछे पड़ा रहा, उसकी आवाज़ किसी ने नहीं सुनी.

दो साल तक गलत कैदी, डीएनए ने खोली सच्चाई 

करीब दो साल जेल में रहने के बाद, जब मलखान और उसके माता-पिता और बच्चों का डीएनए टेस्ट कराया गया, तब जाकर अदालत ने साफ कहा "यह चेतराम नहीं… यह मलखान है. इसके बाद कोर्ट ने उसे डिस्चार्ज किया और पूरा मामला नई जांच के घेरे में आ गया.

1997 की हत्या, 2023 की गिरफ्तारी :

मलखान नाथ की शिकायत के अनुसार 1997 में पिनाना गांव में केला नाम की महिला की हत्या हुई थी. इस केस में असली आरोपी चेतराम गिरफ्तार हुआ, ट्रायल चला और उम्र कैद की सजा हुई. सन 2000 में वह पेरोल पर आया लेकिन जेल वापस नहीं लौटा.

मलखान ने बताया कि कोरोना काल में वह देसी दवा बेचने पिनाना गया था, वहां चेतराम की मां ने उसे ‘धर्म पुत्र' कहकर अपना लिया.11 दिसंबर 2023 को गोहाना CIA ने उसे चेतराम समझकर उठा लिया और 20 दिसंबर को कोर्ट में पेश कर दिया.

“मैं चेतराम नहीं हूं” लेकिन पुलिस ने नहीं सुनी 

मलखान का आरोप है कि उसने पुलिस को बार-बार बताया कि “मैं चेतराम नहीं, मलखान हूं. करनाल के ललयाणी गांव का निवासी हूं, लेकिन पुलिस ने एक नहीं सुनी. उल्टा उसे थर्ड डिग्री दी गई, हाथ-पांव तोड़ दिए गए, ज़बरदस्ती बयान दबाने की कोशिशें की गईं. दो साल तक जेल की अंधेरी कोठरी में उसने गलत पहचान की सजा झेली और उसकी जिंदगी जैसे थम-सी गई.

परिवार की पीड़ा, टूटा घर, टूटे सपने 

परिजनों का कहना है कि पुलिस की मारपीट ने मलखान को शारीरिक रूप से तोड़ दिया.चार बच्चों के पिता के घर में अन्न तक के लाले पड़ गए. दो साल तक हर दरवाजे पर गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.

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अब उठी कार्रवाई की मांग, कौन जिम्मेदार?

मलखान नाथ और उसके अधिवक्ता अशोक कुमार चंदानी ने मांग की है कि इस मामले में सिटी थाना सोनीपत और गन्नौर CIA के तत्कालीन जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए, केस दर्ज हो, और जांच निष्पक्ष हो. पीड़ित ने करनाल पुलिस अधीक्षक गंगाराम पूनिया को DGP के नाम शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई है. एसपी ने आश्वासन दिया है कि “पूरा मामला निष्पक्ष रूप से जांचा जाएगा.

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