- महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल के संसद में गिरने के बाद पक्ष और विपक्ष के बीच विवाद छिड़ गया है
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष और इंडी गठबंधन को महिला आरक्षण रोकने का जिम्मेदार ठहराया
- योगी ने कहा कि महिला आरक्षण बिल पास होता तो महिलाओं को सम्मान और अधिकार मिलते, लेकिन विपक्ष ने इसे रोक दिया
महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल संसद में गिरने के बाद अब सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शुक्रवार रात को देश के नाम संबोधन में विपक्ष पर महिलाओं को हक छीनने का आरोप लगाया.
रविवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए समाजवादी पार्टी और विपक्ष को घेरा. उन्होंने कहा कि अगर ये बिल पास होता तो महिलाओं को उनका हक मिलता लेकिन इंडी गठबंधन के कारण आरक्षण नहीं मिल पाया. वहीं, पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा संसद में तथाकथित महिला बिल की हार बीजेपी की हार है और यह बीजेपी की बदनीयत की हार भी है.
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योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा?
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अगर ये बिल पास होता तो नारी को सम्मान और अधिकार मिलता. ये लोग संविधान की दुहाई देते हैं लेकिन बाबा साहेब के सपने को पूरा करने में बाधा बनते हैं. उन्होंने कहा कि 'मैं सपा-कांग्रेस की रणनीति को लेकर पूछना चाहता हूं कि महिला आरक्षण से जुड़ा मुद्दा पुरुष का हक नहीं माना जा रहा था बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाने का अधिकार दिया जा रहा था.'
उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों ने कहा कि हमारा हक कम होगा लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्र ने इस बात के लिए आश्वस्त किया कि 2011 की जनगणना के आधार पर ही सीटें बढ़ेंगी. किसी की सीटें कम नहीं होना है.
सीएम योगी ने कहा कि 'जो दृश्य वास्तव में सदन के अंदर इंडी गठबंधन का रहा है. कांग्रेस, सपा, टीएमसी, डीएमके का रहा है. यह पूरी तरीके से एक बार उस दृश्य की ओर ध्यान आकर्षित करता है जो भरी सभा में द्रौपदी का चीरहरण जैसा दृश्य था.'
उन्होंने कहा कि 'इन सब आश्वासनों के बाद सर्वसम्मति से यह कार्य होता, तो स्वाभाविक रूप से पूरे सदन को इसका श्रेय मिलता. नारी को उसका हक मिलता, लेकिन इसमें ऐसी बातें की गई कि, जैसे समाजवादी पार्टी ने मुद्दा छेड़ा की मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण क्यों नही मिल पा रहा है? ये लोग संविधान की दुहाई देते हैं, लेकिन बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के भावनाओं के प्रतिकूल आचरण इनका यहां पर भी देखने को मिला.'
योगी ने कहा कि 'जब भारत का संविधान निर्माण हो रहा था, तब भी धर्म के आधार पर आरक्षण देने की मांग उठी थी. सर्वसम्मति से इसका तब सभी पक्षों ने विरोध किया था. बाबा साहेब ने इसपर तीखी टिप्पणी लिखी थी- "एकबार विभाजन हो गया है, भारत दूसरे विभाजन के लिए तैयार नही हो सकता". सरदार पटेल जी ने इसका विरोध किया. संविधान निर्माण समिति के सभी सदस्यों ने इसका पुरजोर विरोध किया. लेकिन समाजवादी पार्टी और उनके अन्य सहयोगी, कांग्रेस की उस रणनीति में साझीदार रहे.'
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अखिलेश यादव ने क्या कहा?
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इसे लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने यह बिल पास होने पर ऐतिहासिक दिन बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं रहा. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिला आरक्षण को राजनीतिक नारे में बदलना चाहती है.
अखिलेश ने कहा कि 'बीजेपी ‘CMF फॉर्मूला' पर काम कर रही है. Create, Mislead, Fear की राजनीति कर रही है. महिला आरक्षण के नाम पर असली मुद्दे छुपा रही है. यह विधेयक भाजपा की बदनीयत का काला दस्तावेज है.'
उन्होंने कहा कि विपक्ष की एकजुटता के कारण यह बिल पास नहीं हो सका. अखिलेश ने दावा किया कि सपा महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है. पार्टी ने जल्दबाजी में लाए गए बिल का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि महिलाओं को सम्मान और उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. सही प्रक्रिया के बिना आरक्षण लागू करना गलत है.
अखिलेश ने पहले जातीय जनगणना करवाने की मांग की. उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना से ही आरक्षण की असली तस्वीर सामने आएगी. भाजपा जानबूझकर जातीय जनगणना से बच रही है. आरक्षण की मांग मजबूत होने से डर रही है. उन्होंने कहा कि जनगणना के बाद यह बिल आता तो सभी दल इसका समर्थन करते.
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा अपने एजेंडे छुपाकर बिल लाना चाहती थी. विपक्ष ने मजबूती से इस बिल का विरोध किया.
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