महिला आरक्षण बिल के गिरने से किसे फायदा किसे नुकसान? क्या सोचती है कोलकाता की पब्लिक

महिला आरक्षण बिल के गिरने के बाद से इसे लेकर राजनीति गरमा गई है. इस बिल को लेकर जहां अब बीजेपी विपक्षी दलों को घेर रही है. वहीं इसे लेकर अब जनता का रुख भी अलग-अलग दिख रहा है. कोई इस बिल के गिरने को गलत बता रहा है तो कई ऐसे भी हैं जिनका मानना है कि संसद में हुई इस प्रक्रिया का चुनाव में असर नहीं पड़ेगा.

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महिला आरक्षण बिल गिरने पर क्या बोल रही है जनता
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  • संसद में महिला आरक्षण विधेयक विपक्ष की एकजुटता के कारण पारित नहीं हो सका और विधेयक धराशायी हो गया
  • विपक्षी दलों ने सीटों की संख्या बढ़ाने पर आपत्ति जताई जिससे विधेयक पर जोरदार चर्चा हुई
  • प्रधानमंत्री ने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए महिला आरक्षण बिल पास न होने पर आलोचना की
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कोलकाता:

संसद में महिला आरक्षण विधेयक पर जोरदार चर्चा हुई और विपक्ष की एकजुटता की वजह से यह विधेयक पास नहीं हुआ.विपक्ष की तरफ से कांग्रेस से लेकर तृणमूल कांग्रेस,डीएमके,समाजवादी पार्टी सभी ने इस बिल में सीटों को बढ़ाए जाने पर आपत्ति की और बिल धराशायी हो गया.प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित किया और विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इन्हें भ्रूण हत्या का पाप लगेगा.मगर कोलकाता की जनता क्या सोचती है यह जानने के लिए एनडीटीवी जा पहुंची एक चाय के दुकान पर महराज नाम की यह दुकान कोलकाता के रासबिहारी विधानसभा में आता है जहां लोगों का भारी भीड़ रहती है,लोग कचौड़ी सब्जी के साथ जलेबी का भी मजा लेते हैं.

यहीं एक जगह कुछ लोग बैठकर चाय पी रहे थे, जैसे ही मैंने पूछा कि महिला आरक्षण संशोधन बिल संसद में गिर गया क्या यह बंगाल में चुनावी मुद्दा बनेगा. तो कुछ लोगों ने कहा कि मुद्दा तो बनना चाहिए ये समय की मांग है. विपक्ष ने गलती की है उसे डिलीमेटेशन का विरोध नहीं करना चाहिए था.

जब जो सरकार में रहता है वो अपने हिसाब से चीजों को करता है.मगर तभी एक व्यक्ति बीच बहस में कूद पड़े और कहा कि मोदी जी ने इसकी शुरुआत की वो ठीक है मगर टाइमिंग ठीक नहीं था.मोदी जी को मालूम था कि आज के वातावरण में ये बिल पास नहीं होगा फिर वो क्यूं ले कर आए.बंगाल अलग है यहां का आदमी सोचता है,पढ़ा लिखा है किसी के बहकावे में नहीं जाता है,टाइम सटीक नहीं था.केवल महिला बिल ले कर आते तो पास हो जाता.पास ही एक महिला नाश्ता कर रही थीं.

उन्होंने कहा कि बिल तो पास होना ही चाहिए था इसका बंगाल में चुनाव पर क्या असर पड़ेगा यह तो वक्त ही बताएगा.एक और शख्स जो वहीं चाय पी रहे ने कहा कि यदि सिंगल बिल होता तो पास हो जाता.एक और आदमी जो वहीं इस बातचीत को सुन रहे थे ने कहा कि दीदी तो खुद महिला है उसका सबसे ज्यादा सांसद भी महिला है.

इस बिल से चुनाव जीतना का कोई संबंध नही है,चुनाव कुछ और मॉडल से जीता जाता है.यहां खेल कुछ और है.पास खड़े लोगों ने भी सहमति में सिर हिलाया और मुझे लगा कि बातचीत बंद कर मुझे भी हींग कचौड़ी और आलू की सब्जी का मजा लेना चाहिए.मगर इतना तो जरूर है कि बीजेपी महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर टीएमसी को जरूर घेरेगी और इसे मुद्दा भी बनाएगी.प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन पर एक व्यक्ति ने कहा कि कुछ ना कुछ तो ये असर तो जरूर डालेगा.ये कोलकाता है आम शहरी लोग हैं खुल कर बोलने से बचते हैं.

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