बिहार की तर्ज पर क्या मणिपुर में भी SIR? मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए शुरू किया गया ग्राउंड वर्क

ऐसी संभावना है कि बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) द्वारा मतदाता सूची का नियमित संशोधन बिहार की तरह विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) हो सकता है क्योंकि चुनाव आयोग एसआईआर को अन्य राज्यों में भी लागू कर सकता है,

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गुवाहाटी:

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को 6 महीने और बढ़ाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव के बीच राज्य में विशेष मतदाता सूची संशोधन (Special Intensive Revision - SIR) की तैयारी शुरू हो गई है. सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग के अधीन कार्यरत मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के ऑफिस ने राज्य में वोटर लिस्ट रिवीजन की ज़मीनी तैयारी शुरू कर दी है. हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है, लेकिन इससे संकेत मिल रहे हैं कि मणिपुर में यह प्रक्रिया बिहार मॉडल की तर्ज पर हो सकती है.

बिहार की तर्ज पर असम में SIR

बिहार SIR को लेकर विपक्ष रोज संसद में भी प्रदर्शन देखने को मिल रहा है. मणिपुर में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है. फिलहाल राज्य विधानसभा को भंग नहीं किया गया है. सूत्रों का कहना है कि अगर छह महीने के भीतर सरकार बहाल नहीं होती है, तो राज्य में जल्दी चुनाव कराए जा सकते हैं. अब इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

राजनीतिक दलों से बातचीत शुरू

सूत्रों के अनुसार, 25 जुलाई के दिन इंफाल में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. इसमें उन्हें बताया गया कि आगामी मतदाता सूची संशोधन में 01 जनवरी 2026 को आधार तिथि माना जाएगा और घर-घर जाकर सत्यापन (House-to-House Verification) किया जाएगा. राजनीतिक दलों को संकेत दिया गया है कि चुनाव आयोग देशभर में SIR लागू करने की योजना पर काम कर रहा है.

सूत्रों ने बताया कि राजनीतिक दलों को देश भर में एसआईआर आयोजित करने के चुनाव आयोग के प्रस्ताव के बारे में 'सूचना' दी गई है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब मणिपुर में घाटी क्षेत्र के बीजेपी विधायकों के बीच मतदाता सूची संशोधन को वापस लेने और एक सरकार बनाने की ज़ोरदार मांग उठ रही है. सूत्रों ने बताया कि मणिपुर में अधिकारियों ने मतदाता सूची संशोधन पर ज़िला-स्तरीय बैठकें शुरू कर दी हैं.

दलों के साथ बूथ-स्तरीय एजेंटों की नियुक्ति पर चर्चा

राज्य के पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों, दोनों में कई हिस्सों में मतदान केंद्रों को युक्तिसंगत बनाने और राजनीतिक दलों के साथ बूथ-स्तरीय एजेंटों की नियुक्ति पर चर्चा हो रही है. सूत्रों ने आगे बताया कि भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा ज़मीनी काम पूरा होने के बाद मणिपुर के लिए आधिकारिक तौर पर एक एसआईआर अधिसूचित किए जाने की पूरी संभावना है. सूत्रों ने आगे बताया कि इस समय ज़िला चुनाव अधिकारी ज़िला स्तर पर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर रहे हैं और उनसे आगामी मतदाता सूची संशोधन पर सुझाव मांग रहे हैं, जो एक 'गहन' प्रक्रिया होगी.

मणिपुर में एनआरसी की मांग 

नागरिक समाज और राजनीतिक दलों द्वारा भी मणिपुर में एनआरसी की मांग की जा रही है और आरोप लगाया जा रहा है कि पड़ोसी देश म्यांमार और यहां तक कि बांग्लादेश से आए अवैध अप्रवासी भी मतदाता सूची में शामिल हैं. पूर्वोत्तर के एक अन्य राज्य त्रिपुरा में, सत्तारूढ़ भाजपा की प्रमुख सहयोगी टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) ने चुनाव आयोग से मिलकर राज्य में बिहार जैसी एसआईआर लागू करने का आग्रह किया था.

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