रंग लाएगी छत्तीसगढ़-ओडिशा की पहल, सुलझेगा महानदी जल विवाद? जानिए अहम बैठक में क्या हुआ फैसला

महानदी जल विवाद सुलझाने के लिए छत्तीसगढ़ और ओडिशा ने पहल की है, जिसके तहत आज नई दिल्‍ली में एक अहम बैठक हुई. इसमें दोनों राज्‍यों के मुख्य सचिवों और जल संसाधन विभाग के सचिवों ने हिस्सा लिया.

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  • छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी नदी जल विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए नई दिल्ली में अहम बैठक हुई.
  • विवाद सुलझाने के लिए आयोजित बैठक में दोनों राज्‍यों के मुख्य सचिवों और जल संसाधन सचिवों ने हिस्सा लिया.
  • दोनों राज्यों ने माना कि समस्या पुरानी और कठिन है, लेकिन लोगों और राज्यों के भले के लिए समाधान निकालना होगा.
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नई दिल्‍ली :

छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी के पानी के बंटवारे को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा है. हालांकि अब महानदी जल विवाद सुलझाने के लिए दोनों राज्‍यों ने पहल की है. इस लंबे विवाद को बातचीत से हल करने के लिए नई दिल्ली में आज एक अहम बैठक हुई. इसमें दोनों राज्‍यों के मुख्य सचिवों और जल संसाधन विभाग के सचिवों ने हिस्सा लिया. महानदी देश की एक प्रमुख नदी है, जो छत्तीसगढ़ से निकलती है और ओडिशा से होकर बंगाल की खाड़ी तक जाती है.

बैठक में दोनों राज्यों ने माना कि यह समस्या बहुत पुरानी और कठिन है, लेकिन लोगों और दोनों राज्यों के भले के लिए इसका समाधान मिल-बैठकर निकालना ही होगा. 

सितंबर से हर हफ्ते बैठक करेंगी समितियां

बैठक में यह भी तय हुआ कि सितंबर 2025 से दोनों राज्यों की तकनीकी समितियां हर हफ्ते बैठक करेंगी. इन तकनीकी समितियों में इंजीनियर और विशेषज्ञ शामिल होंगे.  साथ ही ये समितियां मुख्य मुद्दों को पहचानेंगी और उनका हल निकालने की कोशिश करेंगी. साथ ही वे यह भी देखेंगी कि कैसे दोनों राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है. 

अक्टूबर 2025 में दोनों राज्यों के मुख्य सचिव एक और बैठक करेंगे. इसमें जल संसाधन सचिव भी शामिल होंगे. अगर सब कुछ ठीक रहा तो दिसंबर तक दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री भी मुलाकात कर सकते हैं और आगे की दिशा तय करेंगे. 

विवाद सुलझा तो देश भर के लिए होगी नजीर

दोनों राज्यों ने यह वादा किया कि वे ईमानदारी और खुले मन से बातचीत करेंगे, जिससे महानदी जल विवाद का हल ऐसा निकले जो सबके लिए लाभकारी हो. 

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह पहल सफल रही तो यह न सिर्फ ओडिशा और छत्तीसगढ़ के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल होगी कि बड़े और पुराने विवाद भी आपसी बातचीत और सहयोग से सुलझाए जा सकते हैं. 

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