क्या राज्यसभा जाएंगे बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन? बिहार से खाली हो रहीं राज्यसभा की 5 सीटें

नितिन नवीन अभी बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं. क्या भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष को दिल्ली में राज्यसभा में लाया जा सकता है. आइए जानते हैं पूरी इनसाइड स्टोरी

विज्ञापन
Read Time: 7 mins
Nitin Nabin
नई दिल्ली:

नितिन नवीन ने भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर मंगलवार को काम संभाल लिया. आते ही वो काम पर भी लग गए. पहला फैसला केरल विधानसभा और कुछ निगम चुनावों के लिए प्रभारियों और सह प्रभारियों की नियुक्ति का किया. आज वो प्रदेश अध्यक्षों, संगठन महासचिवों और राज्य प्रभारियों से दिन भर की बैठक में हिस्सा ले रहे हैं. जल्दी ही नितिन नवीन चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल का दौरा भी करेंगे. लेकिन प्रश्न यह उठ रहा है कि क्या वे दो फरवरी से शुरू हो रहे बिहार विधानसभा के बजट सत्र में हिस्सा लेंगे? यह सवाल इसलिए क्योंकि चाहे उन्होंने नीतीश सरकार से मंत्री पद पद से इस्तीफा दे दिया हो लेकिन वे बांकीपुर विधानसभा सीट से बीजेपी के विधायक अब भी बने हुए हैं. जब तक वह विधायक बने रहेंगे, उन्हें विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए पटना का दौरा भी करते रहना होगा.

वैसे अगर पार्टी चाहे तो उन्हें आसानी से राज्यसभा में ला सकती है ताकि वो दिल्ली में रहते हुए ही अपनी पूरी ऊर्जा और समय बीजेपी के संगठन के कामों में लगा सकें. इसी साल अप्रैल में बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं. बिहार से राज्य सभा का गणित पूरी तरह से एनडीए के पक्ष में है. पांच में से चार सीटों पर एनडीए की जीत तय है. इनमें से दो सीटें जेडीयू के खाते में जाएंगी और दो बीजेपी के खाते में. पांचवी सीट भी एनडीए जोर लगाए तो उसके खाते में आ सकती है. ऐसे में नितिन नवीन का बिहार से राज्य सभा आना कोई मुश्किल काम नहीं है. उन्हें दिल्ली में जो सरकारी घर दिया गया है वह भी संसद भवन के बहुत पास है. ऐसे में वे संसद और बीजेपी मुख्यालय आसानी से आ-जा सकते हैं.  यही नहीं, इस साल बीजेपी के राज्य सभा से 30 सांसद रिटायर हो रहे हैं और कम से कम 33 सीटें वह जीत सकती है. ऐसे में बिहार नहीं तो किसी अन्य राज्य से भी नवीन को आसानी से राज्य सभा लाया जा सकता है. 

बीजेपी के आला सूत्र इशारा कर रहे हैं कि फिलहाल नितिन नवीन विधायक ही बने रहेंगे और उन्हें अभी राज्यसभा लाने का पार्टी का कोई इरादा नहीं है. ऐसा इसलिए ताकि बिहार से उनका कनेक्शन बना रहे. आला सूत्र इसके लिए अमित शाह का उदाहरण देते हैं.

अमित शाह 1997 से लगातार गुजरात में विधायक रहे. 2012 में गुजरात के नारणपुरा से फिर बड़े अंतर से विधानसभा का चुनाव जीते थे और 2013 में तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह की टीम में राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए थे. इसके बाद 2014 में बीजेपी के अपने बूते केंद्र में सत्ता में आने के बाद नौ जुलाई 2014 को वे राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए थे. वे तब भी विधायक ही थे और उन्होंने कई बार गुजरात विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा भी लिया था. बतौर अध्यक्ष उनका पहला कार्यकाल 2016 तक चला. इसके बाद वे फिर से तीन वर्ष के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. तब भी वे विधायक बने रहे और  इसके बाद 2017 में वे गुजरात से राज्य सभा में आए और बाद में 2019 में उन्होंने गांधीनगर से लोक सभा का चुनाव जीता था.

हालांकि जानकार कहते हैं कि अमित शाह विधायक इसलिए बने रहे ताकि गुजरात में पार्टी संगठन और सरकार पर नजदीक से नजर रख सकें. ऐसा करना इसलिए भी जरूरी था क्योंकि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के दिल्ली आने के बाद गुजरात इकाई परिवर्तन का सामना कर रही थी और पीएम का गृह राज्य होने के नाते यहां बीजेपी की सत्ता में वापसी बहुत आवश्यक थी. 2017 विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर हुई थी और कई चुनाव बाद ऐसा हुआ था जब बीजेपी को सौ से कम सीटें आईं हों. बहरहाल बीजेपी की फिर सरकार बनी और अमित शाह राज्य सभा में 2017 में बीजेपी की गुजरात की जीत के बाद ही आए. इसी तरह जे पी नड्डा जब 2010 में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बने तब वे हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सदस्य थे. उन्हें पार्टी ने 2012 में राज्य सभा भेजा था. 

बीजेपी नेताओं के अनुसार नितिन नवीन के सामने अपने गृह राज्य बिहार में फिलहाल ऐसी कोई चुनौती नहीं है. पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए ने जबर्दस्त सफलता प्राप्त की है. हालांकि बीजेपी और जेडीयू के बीच आंख-मिचौली चलती रहेगी लेकिन इस बात के आसार कम हैं कि नीतीश कुमार फिर से पाला बदलेंगे. यह जरूर है कि जब नवीन को पिछले साल दिसंबर में बीजेपी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया तब यह सुगबुगाहट भी हुई कि शायद बीजेपी उन्हें बिहार की राजनीति को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री पद के लिए तैयार कर रही है.

पार्टी के आला सूत्रों ने इससे साफ इनकार किया. उनका कहना है कि नवीन की अगुवाई में ही बीजेपी 2029 का लोक सभा चुनाव भी लड़ेगी. वैसे बिहार एनडीए में यह प्रश्न जरूर है कि अपने स्वास्थ्य को देखते हुए नीतीश कब तक सीएम पद पर रहेंगे, लेकिन इसका जवाब वह स्वयं ही देंगे. आज बिहार एनडीए में चाहे बीजेपी संख्या बल के हिसाब से जेडीयू से आगे हो लेकिन कांग्रेस के छह विधायकों के जेडीयू में विलय की बात चल रही है.

Nitin Nabin News

जेडीयू बनेगी सबसे बड़ी पार्टी

इससे जेडीयू एनडीए में सबसे बड़ी पार्टी भी बन सकती है. यह सारी उठापटक इस बात की ओर इशारा करती है कि बीजेपी नितिन नवीन के रूप में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की आंखें बिहार में भी मजबूती से गड़ाए रखना चाहती है. उन्हें फिलहाल राज्य सभा न लाने के पीछे यह भी एक कारण हो सकता है. इसके पीछे दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि पार्टी बिहार से राज्य सभा के उम्मीदवार तय करते समय जातीय समीकरणों को साधना चाहेगी. 

राज्यसभा की 71 सीटों पर चुनाव 

वैसे संसद के ऊपरी सदन राज्य सभा के लिए यह साल बेहद महत्वपूर्ण है. इस साल राज्य सभा की 71 सीटों पर चुनाव होना है. साथ ही छह केंद्रीय मंत्रियों का कार्यकाल भी इस साल पूरा हो रहा है. अभी के आंकड़ों के हिसाब से इन 71 सीटों में सबसे अधिक 30 सांसद भारतीय जनता पार्टी के हैं. बीजेपी राज्य सभा में इस समय अपने ऐतिहासिक सर्वाधिक स्तर 103 पर है. इस साल के अंत तक राज्य सभा के चुनाव के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है. कांग्रेस के आठ सांसद भी रिटायर हो रहे हैं जिनमें खुद पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे शामिल हैं. इनके अलावा क्षेत्रीय दलों के सांसद रिटायर हो रहे हैं जिनमें बीजेपी के सहयोगी दलों के सांसद भी हैं.

पश्चिम बंगाल से 5 सांसद रिटायर होंगे

पश्चिम बंगाल से पांच सांसद अप्रैल में रिटायर होंगे. ये सभी तृणमूल कांग्रेस के हैं. अन्य चुनावी राज्य तमिलनाडु से भी छह सांसद अप्रैल में रिटायर हो रहे हैं. असम से तीन सांसद इस साल अप्रैल में रिटायर हो रहे हैं. इन तीनों राज्यों में इसी साल विधानसभा का चुनाव होना है. सबसे अधिक दस सांसद उत्तर प्रदेश से रिटायर हो रहे हैं. इनमें बीजेपी के आठ और सपा तथा बसपा के एक-एक सांसद हैं. मौजूदा संख्या के हिसाब से बीजेपी के सात और सहयोगी दलों का एक तथा सपा के दो उम्मीदवार चुने जा सकते हैं.

Featured Video Of The Day
Pappu Yadav Arrested: पप्पू यादव को जेल में किससे खतरा? | Syed Suhail | Bharat Ki Baat Batata Hoon