- अजित पवार का पार्थिव शरीर देर रात तक विद्या प्रतिष्ठान के मैदान में रखा गया है ताकि लोग अंतिम दर्शन कर सकें
- विद्या प्रतिष्ठान पवार परिवार की विरासत का प्रतीक है और इसकी नींव शरद पवार ने एक बंजर जमीन पर रखी थी
- अजित पवार ने विद्या प्रतिष्ठान को आधुनिक बनाने और इसके इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार में अहम भूमिका निभाई थी
अजीत पवार का पार्थिव शरीर देर रात तक विद्या प्रतिष्ठान के मैदान में रखा जाएगा, ताकि नागरिक और समर्थक अपने प्रिय नेता के अंतिम दर्शन कर सकें. कल सुबह 9:00 बजे गदिमा सभागार से अंतिम यात्रा की शुरुआत होगी. अंतिम यात्रा गदिमा सभागार से शुरू होकर विद्यानगरी चौक, भिगवन सर्विस रोड और विद्या प्रतिष्ठान मराठी स्कूल के आंतरिक मार्ग से होते हुए मुख्य मैदान तक पहुँचेगी. कल सुबह 11:00 बजे विद्या प्रतिष्ठान के मैदान पर ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया संपन्न की जाएगी.
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विद्या प्रतिष्ठान के मैदान में अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार
अजित पवार जा चुके हैं, बारामती के लोगों को इस बात पर विश्वास ही नहीं हो रहा कि उनके दादा अब उनके बीच नहीं रहे. बारामती को लोग गमगीन हैं. विद्या प्रतिष्ठान के मैदान में भारी भीड़ उमड़ रही है. अजीत पवार का पार्थिव शरीर देर रात तक विद्या प्रतिष्ठान के मैदान में रखा जाएगा, ताकि आम लोग और समर्थक अपने प्रिय नेता के अंतिम दर्शन कर सकें. जानें आखिर उनके अंतिम दर्शन के लिए विद्या प्रतिष्ठान ही क्यों चुना गया.
विद्या प्रतिष्ठान से अजित पवार का रिश्ता
विद्या प्रतिष्ठान से अजित पवार का नाता बहुत ही पुराना और खास है. ये ईंट-पत्थर से बनी सिर्फ एक जगह नहीं बल्कि अजित पवार की 'सियासी और सामाजिक' पूंजी है. यह मैदान पवार परिवार की विरासत का प्रतीक है. विद्या प्रतिष्ठान की नींव चाचा शरद पवार ने रखी थी. अजित दादा ने इसे आधुनिक बनाया. इसकी देखरेख उनकी पत्नी सुनैना करती हैं. यही वो जगह भी है, जहां से अजित पवार अपने अंतिम सफर पर जाएंगे और यहीं वह पंचतत्व में विलीन होंगे.
शरद पवार ने रखी विद्या प्रतिष्ठान की नींव
बारामती का विद्या प्रतिष्ठान पवार परिवार के सपनों की वह जगह है, जिसने बारामती की पहचान ही बदल दी. इस जगह से पवार परिवार का रिश्ता खून और पसीने का है. शरद पवार ने विद्या प्रतिष्ठान की नींव एक बंजर जमीन पर 16 अक्टूबर 1972 को रखी थी. तब बारामती बहुत ही पिछड़ा इलाका हुआ करता था. शरद पवार की आंखों मे ये सपना था कि यहां के मजदूरों और किसानों के बच्चे इग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ें. इसी सपने के साथ उन्होंने बंजर जमीन पर विद्या प्रतिष्ठान की शुरुआत हुई.
विद्या प्रतिष्ठान के लिए अजित पवार ने क्या किया?
इसकी नींव शरद पवार ने जरूर रखी थी लेकिन इसे मॉर्डन बनाने में अजित पवार भी खास भूमिका रही. विद्या प्रतिष्ठान को जब भी विस्तार, इंफ्रास्ट्रक्चर या फंड की जरूरत हुई, अजित पवार इसकी ढाल बनकर खड़े रहे. इस जगह पर आईटी कॉलेज से लेकर बायोटेक्नोलॉजी सेंटर तक, सभी सुविधाएं अजित पवार ने सुनिश्चित कीं. इसी वजह से इस जगह को उनके अंतिम संस्कार के लिए चुना गया है. इसी ‘कर्मभूमि' पर उन्होंने शिक्षा के जरिए हजारों जिंदगियां संवारी थीं.
अजित पवार की अंतिम यात्रा गुरुवार सुबह सुबह 9 बजे गदिमा सभागार से शुरू होकर विद्यानगरी चौक, भिगवन सर्विस रोड और विद्या प्रतिष्ठान मराठी स्कूल के आंतरिक मार्ग से होते हुए मुख्य मैदान तक पहुंचेगी. सुबह 11 बजे विद्या प्रतिष्ठान के मैदान पर ही उनका अंतिम संस्कार होगा.













