पीएम मोदी का इजरायल दौरा क्यों इतना अहम? कौन से समझौते होने की संभावना

यह दौरा प्रधानमंत्री नेतन्याहू की दिसंबर 2025 में भारत यात्रा के स्थगित होने और बाद में रद्द होने के बाद हो रहा है. दोनों नेताओं के बीच हुई फोन पर बातचीत में नेतन्याहू ने मोदी को निमंत्रण दिया और बात बन गई.

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2017 में पीएम मोदी की इजरायल यात्रा की तस्वीर.
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  • PM मोदी 25-26 फरवरी को इजरायल की द्विदिवसीय यात्रा पर जाएंगे
  • मोदी नेसेट को संबोधित करेंगे और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे,
  • बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस,लेजर हथियार और अगली पीढ़ी के ड्रोनों के संयुक्त विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25-26 फरवरी को इजरायल की एक महत्वपूर्ण यात्रा पर जा रहे हैं. यह 2017 की ऐतिहासिक यात्रा के बाद उनकी दूसरी यात्रा है और उनके तीसरे कार्यकाल के दौरान पहली यात्रा है. यह यात्रा पश्चिम एशियाई भू-राजनीति के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हो रही है और रक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार और व्यापार के क्षेत्र में भारत-इजरायल संबंधों को मजबूत करने के नए प्रयासों का संकेत देती है. दो दिवसीय यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी नेसेट (इजरायल की संसद) को संबोधित करेंगे. यह एक दुर्लभ सम्मान है, जो दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच राजनीतिक सौहार्द को दर्शाता है. इससे पहले, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 2015 में नेसेट को संबोधित किया था, जो किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की इजरायल की पहली यात्रा थी.

  1. पीएम मोदी भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए आयोजित एक स्वागत समारोह को भी संबोधित करेंगे और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. प्रौद्योगिकी सहयोग, सुरक्षा सहयोग, एआई, कृषि, जल प्रबंधन और व्यापार को कवर करने वाले कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जो द्विपक्षीय साझेदारी के बढ़ते दायरे को दर्शाते हैं.
  2. रक्षा और रणनीतिक सहयोग चर्चा का मुख्य केंद्र होगा. भारत और इजरायल के बीच पहले से ही मजबूत रक्षा संबंध हैं, और इजारायल भारत को उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकी की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में से एक है. अगस्त 2025 में, प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यरुशलम में एनडीटीवी के आदित्य राज कौल को बताया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को इजरायल द्वारा आपूर्ति किए गए उपकरणों ने प्रभावी ढंग से काम किया था, जो चार दिवसीय भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान भारत को इजरायल के समर्थन की स्पष्ट स्वीकृति थी.
  3. नई पहलों का मुख्य उद्देश्य बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम, निर्देशित-ऊर्जा लेजर हथियारों, लंबी दूरी की स्टैंड-ऑफ मिसाइलों और अगली पीढ़ी के ड्रोनों का संयुक्त विकास करना है. ये क्षेत्र रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता के लिए भारत के प्रयासों और अत्याधुनिक सैन्य नवाचार के लिए इजरायल की वैश्विक प्रतिष्ठा के अनुरूप हैं.
  4. इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी भारत को "वैश्विक महाशक्ति" बताया था और कहा था कि रक्षा, नवाचार, आतंकवाद-विरोधी और व्यापार जैसे क्षेत्रों में दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच संबंध "पहले से कहीं अधिक मजबूत" हैं.
  5. उन्होंने ये बातें नवंबर 2025 में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात के बाद एनडीटीवी के आदित्य राज कौल को दिए अपने एकमात्र और विशेष साक्षात्कार में कही थीं. उन्होंने अस्थिर मध्य पूर्व के बीच भारत-इजरायल साझेदारी के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया था.
  6. सार ने कहा, "हम लगातार सुधार कर रहे हैं. हम भारत की मित्रता के लिए आभारी हैं." उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश रक्षा सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने की तैयारी कर रहे हैं, “हम रक्षा, कृषि और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में प्रगति कर रहे हैं, लेकिन हम इसे और भी मजबूत बनाने के लिए हमेशा तत्पर हैं.”
  7. प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दोनों पक्षों के बीच महीनों से चल रही गहन राजनयिक गतिविधियों के बाद हो रही है. विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल के महीनों में इजरायल का दौरा किया है, जबकि कई इजरायली मंत्रियों ने भारत की यात्रा की है. इजरायल ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में एक बड़ा सरकारी और निजी क्षेत्र का प्रतिनिधिमंडल भी भेजा था, जो उभरती प्रौद्योगिकियों, विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता में बढ़ते तालमेल को दर्शाता है.
  8. गौरतलब है कि यह दौरा प्रधानमंत्री नेतन्याहू की दिसंबर 2025 में भारत यात्रा के स्थगित होने और बाद में रद्द होने के बाद हो रहा है. दोनों नेताओं के बीच हुई फोन पर बातचीत में नेतन्याहू ने मोदी को निमंत्रण दिया और बात बन गई. नेतन्याहू ने इससे पहले 2018 में छह दिवसीय भारत यात्रा की थी.
  9. यात्रा की घोषणा करते हुए, प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने X पर लिखा कि इजरायल और भारत के बीच का संबंध "दो वैश्विक नेताओं के बीच एक शक्तिशाली गठबंधन" का प्रतिनिधित्व करता है, जो नवाचार, सुरक्षा और एक साझा रणनीतिक दृष्टिकोण पर आधारित है. प्रधानमंत्री मोदी ने जवाब में कहा कि भारत "विश्वास, नवाचार और शांति एवं प्रगति के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर निर्मित इजरायल के साथ स्थायी मित्रता को गहरा महत्व देता है" और कहा कि वे यरुशलम में विस्तृत चर्चा के लिए उत्सुक हैं.
  10. प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल पहुंचने के साथ ही, यह उम्मीदें प्रबल हैं कि यह यात्रा न केवल दोनों नेताओं के बीच मजबूत राजनीतिक सौहार्द की पुष्टि करेगी, बल्कि भारत-इजरायल संबंधों के लिए एक नई रणनीतिक दिशा भी तय करेगी - जिससे दोनों देश आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय स्थिरता, तकनीकी उन्नति और वैश्विक सुरक्षा को आकार देने में प्रमुख भागीदार के रूप में स्थापित होंगे.

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