ईरान ने दो भारतीय टैंकरों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति क्यों दी? डॉ. एस. जयशंकर ने बताया

भारत दुनिया में द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का चौथा सबसे बड़ा खरीदार और खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है. यह गैस मुख्य रूप से मध्य पूर्व से मंगाई जाती है.

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जयशंकर ने उम्मीद जताई कि जल्द और जहाज होर्मुज से निकलेंगे.
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  • भारत के दो भारतीय ध्वज वाले टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजरने में सफल रहे हैं
  • भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ईरान के साथ बातचीत से कुछ सकारात्मक परिणाम मिलने की जानकारी दी
  • ईरान के साथ कोई व्यापक समझौता नहीं हुआ है, जहाजों की आवाजाही हर बार अलग-अलग घटनाओं के आधार पर होती है
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ईरान पर हमले के कारण दुनिया के सभी देशों के जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में फंस गए हैं, मगर भारत के दो जहाज वहां से निकल गए हैं. ऐसा कैसे हो गया? ईरान ने भारतीय जहाजों को होर्मुज से कैसे गुजरने दिया? इस पर भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि बातचीत से "कुछ परिणाम" निकले हैं और यह प्रक्रिया "जारी" है. 

भारत और ईरान संबंघों को बताया

डॉ. जयशंकर ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया, “मैं इस समय उनसे बातचीत कर रहा हूं और मेरी बातचीत से कुछ नतीजे निकले हैं. यह प्रक्रिया जारी है. अगर इससे मुझे फायदा हो रहा है, तो मैं स्वाभाविक रूप से इस पर आगे भी विचार करता रहूंगा. निश्चित रूप से, भारत के दृष्टिकोण से यह बेहतर है कि हम तर्क-वितर्क करें, समन्वय स्थापित करें और कोई समाधान निकालें.”

विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारतीय ध्वज वाले जहाजों के लिए ईरान के साथ कोई "व्यापक समझौता" नहीं है और "जहाज की प्रत्येक आवाजाही एक अलग घटना है." उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि ईरान को बदले में कुछ मिला है और कहा कि दिल्ली और तेहरान का एक-दूसरे के साथ लेन-देन का इतिहास रहा है... जिसके आधार पर मैंने यह कार्य शुरू किया  उन्होंने कहा, "यह आदान-प्रदान का मुद्दा नहीं है. भारत और ईरान के बीच संबंध हैं और यह एक ऐसा संघर्ष है, जिसे हम बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं."

"अभी तो शुरुआत ही है"

डॉ. जयशंकर ने आगे कहा, "अभी तो शुरुआत ही है. हमारे वहां और भी कई जहाज हैं. इसलिए यह एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन इस पर लगातार काम जारी है, इसलिए बातचीत चलती रहेगी." इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान से बात की और वस्तुओं और ऊर्जा के पारगमन पर चर्चा की.

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मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण अब एक खतरनाक यातायात मार्ग बन चुके होर्मुज जलडमरूमध्य से तरलीकृत पेट्रोलियम गैस ले जा रहे भारतीय ध्वज वाले दो टैंकर सुरक्षित रूप से गुजर गए. यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी से अरब सागर तक पहुंचने का एकमात्र मार्ग है.

भारतीय ध्वज वाले टैंकर, शिवालिक और नंदा देवी, लगभग 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों पर आज ही पहुंचे हैं.

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भारत को क्या है चिंता

वैश्विक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का लगभग 20 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य से ही गुजरता है. अमेरिका और इजरायल के हमलों के चलते ईरान ने इसे चोक कर दिया है. इससे भारत और चीन जैसे एशियाई बाजारों में ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा हो गई हैं.

भारत दुनिया में द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का चौथा सबसे बड़ा खरीदार और खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है. यह गैस मुख्य रूप से मध्य पूर्व से मंगाई जाती है.

आपूर्ति संबंधी चिंताओं के बीच, सरकार ने पहले आदेश दिया था कि घरों और परिवहन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. सिरेमिक टाइल बनाने वाले उद्योगों सहित कई उद्योग गैस की कमी का सामना कर रहे हैं, जिससे उत्पादन ठप हो सकता है.

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