- सपा मुखिया अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी का समर्थन सोशल मीडिया पर किया लेकिन बंगाल में प्रचार नहीं किया
- इंडिया गठबंधन के अन्य दलों के नेता जैसे तेजस्वी और हेमंत सोरेन ने बंगाल में टीएमसी के पक्ष में प्रचार किया
- राहुल गांधी ने बंगाल में टीएमसी पर आरोप लगाए जिससे अखिलेश के प्रचार से दूरी बनाने की संभावना जताई जा रही है
समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए ममता बनर्जी का समर्थन तो किया लेकिन प्रचार करने बंगाल नहीं गए. हालांकि इंडिया गठबंधन के दूसरे घटक दलों के नेता वहां प्रचार करने ज़रूर गए . अब सवाल उठ रहा है कि ये महज एक संयोग है या इसके पीछे कोई राजनीतिक जोड़ घटाव है.
सोमवार शाम बंगाल में दूसरे और अंतिम चरण के लिए चुनाव प्रचार थम गया. दोनों ही तरफ़ से जमकर चुनाव प्रचार किया गया . टीएमसी के चुनाव प्रचार की कमान तो ममता बनर्जी ने ख़ुद अपने हाथों में ले रखी थी लेकिन पार्टी उम्मीदवारों के पक्ष में तेजस्वी यादव और हेमंत सोरेन जैसे इंडिया गठबंधन के घटक दलों के नेताओं ने भी प्रचार किया. यहां तक कि अरविंद केजरीवाल ने भी टीएमसी के पक्ष में प्रचार किया.
अखिलेश ने ममता के समर्थन में क्यों नहीं किया प्रचार?
मगर ममता बनर्जी के बेहद क़रीब माने जाने वाले सपा मुखिया अखिलेश यादव चुनाव प्रचार से दूर रहे. हां , सोशल मीडिया पर ज़रूर यदा कदा उन्होंने ममता बनर्जी के समर्थन में पोस्ट किया । जैसे , पहले चरण के मतदान के तीन दिनों बाद अखिलेश यादव ने X पर पोस्ट करके लिखा :
' एक अकेली लड़ जाएगी
जीतेगी और बढ़ जाएगी!
पहले चरण में ही दीदी की सरकार की बेहद मजबूत बुनियाद बन गई है, दूसरे चरण में बंगाल की अस्मिता बचानेवाली दीदी की सरकार की बुलंद इमारत खड़ी हो जाएगी.
दीदी हैं, दीदी रहेंगी! '
उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अजय पाल को चुनाव आयोग की तरफ़ से पुलिस आब्जर्वर नियुक्त करने को लेकर भी अखिलेश यादव ने बीजेपी पर हमला किया है. मगर उनका ख़ुद बंगाल जाकर ममता बनर्जी के समर्थन में प्रचार नहीं करना कौतूहल का विषय बन गया है. सवाल ये है कि क्या उन्हें प्रचार के लिए बुलाया नहीं गया या फिर उन्होंने किसी रणनीति के तहत दूरी बना ली.
क्या राहुल के हमला करने के बाद बदली रणनीति ?
इंडिया गठबंधन में एक दूसरे की सहयोगी होने के बावजूद कांग्रेस और टीएमसी बंगाल में अलग अलग चुनाव लड़ रही हैं और कांग्रेस ने सभी 294 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं. ऐसे में 2021 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रचार से कन्नी काटने वाले राहुल गांधी ने इस बार छह जनसभाएं की. इन जनसभाओं में राहुल गांधी ने ममता बनर्जी और टीएमसी पर भी जमकर हमला बोला. राहुल गांधी ने यहां तक आरोप लगा दिया कि राज्य में लोकतंत्र नहीं बल्कि टीएमसी का गुंडाराज चल रहा है. माना जा रहा है कि अखिलेश यादव के प्रचार नहीं करने के पीछे ये भी वजह हो सकती है.
क्या है बंगाल और उत्तर प्रदेश का नाता ?
अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के एक साथ चुनाव लड़ने की अटकलें हैं क्योंकि लोकसभा चुनाव में भी दोनों पार्टियां साथ मिलकर चुनाव लड़ी थीं. अब कयास ये लग रहे हैं कि चूंकि राहुल गांधी ने टीएमसी पर कई आरोप लगाए लिहाज़ा अखिलेश यादव के टीएमसी के पक्ष में चुनाव प्रचार करने से उत्तर प्रदेश में दोनों पार्टियों के लिए एक नकारात्मक माहौल बनता. सांकेतिक ही सही , लेकिन संदेश यही जाता कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी एक दूसरे के खिलाफ़ हैं. हालांकि समाजवादी पार्टी के सूत्रों ने बंगाल की राजनीति को यूपी चुनाव से जोड़े जाने को निराधार बताया. उनका कहना है कि अखिलेश यादव सोशल मीडिया के पोस्ट और अपने बयानों ने लगातार ममता बनर्जी का समर्थन करते आ रहे हैं.
जनवरी में हुई थी अखिलेश-ममता की मुलाक़ात
इसी साल जनवरी से एक निजी दौरे पर कोलकाता गए अखिलेश यादव ने अपनी पत्नी और सांसद डिम्पल यादव के साथ ममता बनर्जी से मुलाक़ात की थी. कहा जाता है कि इस मुलाक़ात में ममता ने अखिलेश को यूपी चुनाव के दौरान चुनावी रणनीति बनाने वाली संस्था आईपैक की मदद लेने की सलाह दी थी. बंगाल में टीएमसी की चुनावी रणनीति का जिम्मा आईपैक के कन्धों पर ही है.
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