कौन थे विजयपत सिंघानिया? जिन्होंने रेमंड ग्रुप को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया

विजयपत सिंघानिया रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन, पद्म भूषण से सम्मानित उद्योगपति थे. साथ ही उन्होंने दो दशकों तक रेमंड का नेतृत्व किया और भारतीय उद्योग व एविएशन के क्षेत्र में खास पहचान बनाई.

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विजयपत सिंघानिया का निधन
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  • विजयपत कैलाशपत सिंघानिया का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया, उनका अंतिम संस्कार मुंबई में होगा
  • उन्होंने रेमंड ग्रुप को पारंपरिक कंपनी से वैश्विक स्तर पर एक प्रतिष्ठित ब्रांड बनाया था
  • सिंघानिया ने रेमंड को सूट कपड़ों से आगे बढ़ाकर विभिन्न उद्योग क्षेत्रों में विस्तार किया था
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रेमंड ग्रुप के पूर्व प्रमुख और पद्म भूषण से नवाजे जा चुके विजयपत कैलाशपत सिंघानिया का 87 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. वह लंबे समय से भारतीय उद्योग जगत का एक बड़ा नाम रहे और रेमंड ग्रुप को एक पारंपरिक टेक्सटाइल कंपनी से वैश्विक पहचान दिलाने में उनकी खास भूमिका रही. रेमंड ग्रुप के मौजूदा चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर गौतम सिंघानिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने पिता के निधन की जानकारी साझा की. उन्होंने लिखा, “गहरे दुख के साथ हम पद्म भूषण डॉ. विजयपत कैलाशपत सिंघानिया के निधन की सूचना देते हैं. वह एक दूरदर्शी लीडर, परोपकारी और प्रेरणादायक व्यक्तित्व थे, जिनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन देती रहेगी.”

रेमंड ग्रुप के प्रमुख के रूप में लंबा सफर

विजयपत सिंघानिया 1980 से 2000 तक रेमंड ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रहे. उनके नेतृत्व में रेमंड ने केवल सूट‑कपड़ों तक सीमित न रहकर सिंथेटिक फैब्रिक, डेनिम, स्टील, इंडस्ट्रियल फाइल्स और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में तरक्की की. उन्होंने रेमंड को भारत के सबसे प्रतिष्ठित लाइफस्टाइल और फैब्रिक ब्रांड्स में शामिल कराया.

सिंघानिया परिवार से जुड़ी विरासत

विजयपत सिंघानिया का जन्म 4 अक्टूबर 1938 को प्रतिष्ठित सिंघानिया परिवार में हुआ था. उद्योग जगत में उनकी पहचान एक ऐसे कारोबारी के रूप में रही, जिन्होंने परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाकर कंपनी को नई पहचान दिलाई. बाद में उन्होंने रेमंड की जिम्मेदारी अपने बेटे गौतम सिंघानिया को सौंपी और कंपनी में अपनी 37 प्रतिशत हिस्सेदारी भी ट्रांसफर कर दी.

एविएशन के क्षेत्र में भी खास पहचान

उद्योग के अलावा विजयपत सिंघानिया को एविएशन का गहरा शौक था, वह भारत के सबसे साहसी एविएटर्स में गिने जाते थे. उन्हें 1994 में भारतीय वायुसेना ने ऑनरेरी एयर कमोडोर की उपाधि दी. एविएशन के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है. नवंबर 2005 में, 67 वर्ष की उम्र में, उन्होंने हॉट एयर बैलून से लगभग 69,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की थी. उन्होंने यह उड़ान मुंबई के रेसकोर्स से शुरू की थी और करीब पांच घंटे बाद नासिक के पास लैंडिंग की थी.

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पद्म भूषण से सम्मान

विजयपत सिंघानिया को उनके औद्योगिक और साहसिक योगदान के लिए भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. यह सम्मान उनके बहुआयामी व्यक्तित्व और राष्ट्र के लिए किए गए योगदान को दर्शाता है. विजयपत सिंघानिया के परिवार में उनकी पत्नी आशादेवी सिंघानिया और उनके बच्चे मधुपति सिंघानिया, शैफाली रूइया और गौतम सिंघानिया हैं. उनके निधन की खबर के बाद सोशल मीडिया पर उद्योग जगत और आम लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया.

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