कौन हैं शिवेश राम? जिन्हें BJP ने बिहार से बनाया राज्यसभा का 'सरप्राइज कैंडिडेट'

शिवेश कुमार राम ने विधायक रहते हुए सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और सरकारी योजनाओं के लाभ को गांवों तक पहुंचाने के मुद्दों पर काम किया. वे अनुसूचित जाति से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। पार्टी संगठन में भी उन्होंने जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक कई जिम्मेदारियां निभाई हैं.

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  • भाजपा ने बिहार से राज्यसभा उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर नितिन नवीन और शिवेश कुमार राम को नामित किया है.
  • शिवेश कुमार राम ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संगठनात्मक राजनीति की शुरुआत कर भोजपुर से विधायक चुने गए थे.
  • उनके पिता मुन्नीलाल राम पूर्व सांसद और केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं, जिससे उन्हें राजनीतिक विरासत मिली है.
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राज्य सभा के लिए बीजेपी ने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है. बिहार से पार्टी ने दो उम्मीदवारों के नाम तय किए हैं. इनमें नितिन नवीन और शिवेश कुमार शामिल हैं. शिवेश कुमार राम बिहार की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख दलित चेहरों में गिने जाते हैं. वे लंबे समय से संगठन की राजनीति से जुड़े रहे हैं और पार्टी के भीतर एक अनुशासित और जमीनी कार्यकर्ता के रूप में पहचाने जाते हैं.

शिवेश कुमार राम का राजनीतिक सफर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(RSS) से शुरू हुआ, जहां से उन्होंने संगठनात्मक काम सीखा और बाद में भाजपा की सक्रिय राजनीति में आए. वे भोजपुर जिले की राजनीति से उभरे और 2010 में अगिआंव सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए. इस क्षेत्र में दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं की संख्या अधिक है. इसलिए यहां से उनकी जीत ने उन्हें राज्य स्तर पर पहचान दिलाई.

राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते हैं शिवेश कुमार राम

उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी राजनीतिक रही है. उनके पिता मुन्नीलाल राम सासाराम लोकसभा क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे थे. इसी वजह से शिवेश कुमार राम को बचपन से ही राजनीति का माहौल मिला और सामाजिक मुद्दों की समझ विकसित हुई. परिवार की राजनीतिक विरासत ने उन्हें शुरुआती पहचान दी, लेकिन उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक छवि संगठन और क्षेत्रीय काम के आधार पर बनाई.

शिवेश कुमार राम ने विधायक रहते हुए सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और सरकारी योजनाओं के लाभ को गांवों तक पहुंचाने के मुद्दों पर काम किया. वे अनुसूचित जाति से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं. पार्टी संगठन में भी उन्होंने जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक कई जिम्मेदारियां निभाई हैं. वे प्रदेश पदाधिकारी के रूप में भी काम कर चुके हैं और दलित समाज में भाजपा का आधार मजबूत करने की कोशिश करते रहे हैं.

दलित समाज से आने वाला एक सक्रिय और शिक्षित चेहरा

राजनीतिक रूप से उनका उभार भाजपा के लिए कई तरह से फायदेमंद हो सकता है. बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं. ऐसे में दलित समाज से आने वाला एक सक्रिय और शिक्षित चेहरा पार्टी को सामाजिक संतुलन बनाने में मदद करता है. खासकर सासाराम और शाहाबाद इलाके में दलित वोट बैंक पर पारंपरिक रूप से अन्य दलों की पकड़ रही है.

इसके अलावा, वे संगठन के पुराने कार्यकर्ता रहे हैं, इसलिए पार्टी कैडर में उनकी स्वीकार्यता है. भाजपा यदि उन्हें राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर और बड़ी जिम्मेदारी देती है तो इससे यह संदेश जाएगा कि पार्टी अपने पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को महत्व देती है. इससे दलित समाज के बीच भाजपा की छवि मजबूत हो सकती है.. कुल मिलाकर शिवेश कुमार राम का राजनीतिक कद बढ़ना भाजपा के लिए सामाजिक विस्तार और क्षेत्रीय मजबूती दोनों के लिहाज से लाभकारी साबित हो सकता है. बिहार में आने वाले चुनावों को देखते हुए ऐसे नेताओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, जो संगठन और समाज दोनों में मजबूत पकड़ रखते. 

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