कौन हैं राेहन नायडू? जिन्होंने ‘ब्लैक होल स्टार’ खोजा, 18 साल में इंजीनियरिंग छोड़ी, हैदराबाद से MIT तक पहुंचे

हैदराबाद के खगोलशास्त्री रोहन पी. नायडू ने MIT की टीम के साथ मिलकर शुरुआती ब्रह्मांड में मौजूद संभावित ‘ब्लैक होल स्टार’ का पता लगाया है. नेचर (Nature) जर्नल में प्रकाशित इस शोध से सुपरमैसिव ब्लैक होल और ‘लिटिल रेड डॉट्स’ के रहस्य को समझने में मदद मिल सकती है.

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हैदराबाद के वैज्ञानिक रोहन नायडू की बड़ी खोज, ब्रह्मांड में मिला रहस्यमयी ‘ब्लैक होल स्टार

ब्रह्मांड के शुरुआती इतिहास को समझने की कोशिश में वैज्ञानिकों को एक ऐसी रहस्यमयी खगोलीय वस्तु मिली है, जिसने खगोल विज्ञान की कई पुरानी धारणाओं को चुनौती दे दी है. इस ऐतिहासिक खोज का नेतृत्व हैदराबाद में जन्मे भारतीय मूल के वैज्ञानिक रोहन पी. नायडू ने किया है, जो वर्तमान में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में पप्पालार्डो फेलो हैं. जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से प्राप्त डेटा के आधार पर वैज्ञानिकों ने एक बेहद चमकीली और लाल रंग की वस्तु का अध्ययन किया है. शोधकर्ताओं का मानना है कि यह एक विशाल ब्लैक होल और तारे जैसी गैसीय संरचना का अनोखा मिश्रण हो सकता है, जिसे उन्होंने "ब्लैक होल स्टार" नाम दिया है.

कौन है रोहन नायडू? कैसे तय किया हैदराबाद से MIT तक का सफर?

रोहन पी. नायडू का सफर सामान्य नहीं रहा. उनकी MIT प्रोफाइल के अनुसार, वह हैदराबाद में पले-बढ़े और 18 वर्ष की उम्र में इंजीनियरिंग कॉलेज छोड़ने का फैसला किया. इसके बाद उन्होंने पहली बार हवाई यात्रा की और सिंगापुर के येल-एनयूएस कॉलेज के पहले बैच का हिस्सा बने. यहीं से उनका झुकाव खगोल विज्ञान की ओर बढ़ा. स्नातक के दौरान उन्होंने ब्लेजार्स पर शोध किया और बाद में हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी की. उनका शोध आकाशगंगा (मिल्की वे) के दूरस्थ हिस्सों और उन प्राचीन आकाशगंगाओं पर केंद्रित रहा, जो अरबों वर्ष पहले हमारी आकाशगंगा में समाहित हो गई थीं. वर्तमान में वह MIT में शुरुआती ब्रह्मांड और पहली आकाशगंगाओं पर काम कर रहे हैं. खगोल विज्ञान के अलावा उन्हें टेस्ट क्रिकेट, कविता और क्विज प्रतियोगितियों का भी शौक है.

Rohan Naidu Black Hole Star Study: स्टडी का निष्कर्ष

आखिर क्या है MoM-BH-1?

12 अगस्त 2026 को प्रतिष्ठित जर्नल Nature में प्रकाशित अध्ययन में इस वस्तु को MoM-BH-1 नाम दिया गया. वैज्ञानिकों के अनुसार यह वस्तु बिग बैंग के लगभग 66 करोड़ वर्ष बाद मौजूद थी, यानी ब्रह्मांड अभी अपनी शुरुआती अवस्था में था. यह वस्तु आकार में हमारे सौर मंडल जितनी बड़ी दिखाई देती है, लेकिन इसकी चमक किसी सामान्य तारे से लगभग 100 अरब गुना अधिक है. यही कारण था कि शोधकर्ताओं को लगा कि इसके भीतर कोई अत्यंत शक्तिशाली ऊर्जा स्रोत मौजूद है.

Rohan Naidu Black Hole Star Study: ब्लैक होल स्टार

जेम्स वेब टेलीस्कोप ने देखा रहस्यमयी लाल बिंदु

यह खोज तब सामने आई जब MIT और अन्य संस्थानों के वैज्ञानिक शुरुआती ब्रह्मांड की सबसे पुरानी आकाशगंगाओं की तलाश कर रहे थे. उन्होंने अपने सर्वे का नाम रखा था "Mirage or Miracle" (MoM). इसी दौरान वैज्ञानिकों को एक असाधारण लाल और बेहद चमकीला बिंदु दिखाई दिया. शुरुआत में इसे बहुत दूर स्थित एक प्राचीन आकाशगंगा माना गया, लेकिन इसकी विशेषताएं किसी सामान्य आकाशगंगा से मेल नहीं खा रही थीं.

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Rohan Naidu Black Hole Star Study: ब्लैक होल स्टार

"ब्लैक होल स्टार" की अवधारणा

अध्ययन के प्रमुख लेखक रोहन नायडू के अनुसार, "हमारी समझ लगातार विकसित हो रही है. हमें लगता है कि इसके केंद्र में सूर्य से करीब एक लाख गुना अधिक द्रव्यमान वाला ब्लैक होल मौजूद है. इसके चारों ओर गैस का एक अत्यंत विशाल आवरण है, जो देखने में तारे जैसा लगता है." वैज्ञानिकों के मुताबिक यह संरचना सामान्य सितारों की तरह परमाणु संलयन (Nuclear Fusion) से ऊर्जा नहीं बना रही थी. इसके विपरीत, इसकी ऊर्जा का स्रोत केंद्र में मौजूद सक्रिय ब्लैक होल हो सकता है, जो अपने आसपास की गैस को तेजी से निगल रहा था.

वैज्ञानिकों को क्यों चौंकाया इस खोज ने?

इस वस्तु की सबसे बड़ी खासियत इसका असामान्य लाल रंग और अत्यधिक चमक थी. MIT के वैज्ञानिक रॉबर्ट सिमको ने कहा, "आमतौर पर जब हम ब्रह्मांड में कोई बहुत लाल वस्तु देखते हैं तो समझते हैं कि उसके आसपास धूल है. लेकिन यहां ऐसा कोई संकेत नहीं मिला." शोधकर्ताओं ने पाया कि इसमें लगभग केवल हाइड्रोजन और हीलियम मौजूद थे. धातुओं या अन्य भारी तत्वों के संकेत नदारद थे, जिससे यह शुरुआती ब्रह्मांड की एक बेहद दुर्लभ वस्तु बन गई.

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"लिटिल रेड डॉट्स" का रहस्य सुलझा सकती है खोज

जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप पिछले कुछ वर्षों में शुरुआती ब्रह्मांड में हजारों छोटे लाल बिंदु देख चुका है. इन रहस्यमयी वस्तुओं को वैज्ञानिक "Little Red Dots" कहते हैं. रोहन नायडू का मानना है कि MoM-BH-1 इन सभी रहस्यमयी वस्तुओं की पहचान समझने की कुंजी साबित हो सकती है. उन्होंने कहा, "ये छोटे लाल बिंदु शुरुआती ब्रह्मांड में हर जगह दिखाई देते हैं, लेकिन आज के ब्रह्मांड में लगभग गायब हो चुके हैं. वास्तव में ये क्या हैं, यह JWST युग के सबसे बड़े सवालों में से एक है."

सिमुलेशन से मिला जवाब

रहस्य सुलझाने के लिए वैज्ञानिकों ने अलग-अलग कंप्यूटर मॉडल तैयार किए. उन्होंने जांचा कि क्या केवल हाइड्रोजन गैस के अत्यधिक घने बादल किसी वस्तु को इतना लाल और चमकीला बना सकते हैं. कई परीक्षणों के बाद शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि सबसे उपयुक्त मॉडल वही था, जिसमें एक विशाल ब्लैक होल घने हाइड्रोजन आवरण के भीतर मौजूद हो. यही मॉडल JWST द्वारा रिकॉर्ड किए गए आंकड़ों से सबसे ज्यादा मेल खाता था.

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