कौन हैं अशोक कुमार लाहिड़ी, जो बने नीति आयोग के उपाध्यक्ष, अटल सरकार में भी निभा चुके हैं अहम भूमिका

दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र डॉ. लाहिड़ी कोलकाता के रहने वाले हैं और बंगाल के विकास और प्रगति में उनका अहम योगदान रहा है.

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  • भारत सरकार ने नीति आयोग में बड़े बदलाव करते हुए डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी को नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया है.
  • नीति आयोग में 5 नए पूर्णकालिक सदस्यों की नियुक्ति की गई है जिनमें राजीव गौबा और प्रो. के. वी. राजू शामिल हैं.
  • अशोक कुमार लाहिड़ी ने PM मोदी से मुलाकात कर इस नियुक्ति की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की है.
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भारत सरकार ने नीति आयोग की संरचना में एक बड़ा फेरबदल करते हुए अशोक कुमार लाहिड़ी को आयोग का नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया है. इस संगठनात्मक विस्तार के तहत सरकार ने पांच नए पूर्णकालिक सदस्यों की भी घोषणा की है, जिनमें राजीव गौबा, प्रो. के. वी. राजू, प्रो. गोबर्धन दास, प्रो. अभय करंदीकर और डॉ. एम. श्रीनिवास शामिल हैं. आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ये सभी नियुक्तियां कार्यभार संभालने की तिथि से प्रभावी होंगी और सभी नवनियुक्त पदाधिकारी निर्धारित नियमों एवं शर्तों के आधार पर अपनी भूमिका निभाएंगे.

नीति आयोग का नया उपाध्यक्ष (वाइस-चेयरमैन) नियुक्त किए जाने के बाद प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. अशोक लाहिड़ी ने शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी में PM मोदी से मुलाकात की है. मुलाकात के बाद डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इसकी जानकारी दी. पोस्ट में उन्होंने लिखा, "आज मेरी मुलाकात माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई."

भारत के सबसे अनुभवी और वरिष्ठ अर्थशास्त्रियों में शुमार डॉ. लाहिड़ी का चार दशकों से अधिक का करियर रहा है. उन्होंने नीतिगत क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं, जिनमें मुख्य आर्थिक सलाहकार से लेकर वित्त आयोग के सदस्य, एशियाई विकास बैंक, विश्व बैंक और आईएमएफ शामिल हैं.  साथ ही वह बंगाल के बालुरघाट से विधायक रह चुके हैं और लाहिड़ी अटल सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार थे. दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र डॉ. लाहिड़ी कोलकाता के रहने वाले हैं और बंगाल के विकास और प्रगति में उनका अहम योगदान रहा है.

वहीं, नीति आयोग के सदस्य डॉ. गोबर्धन दास एक प्रख्यात आणविक विज्ञान के प्रोफेसर हैं, जिन्होंने लगभग तीन दशकों के वैज्ञानिक करियर में प्रतिरक्षा विज्ञान, संक्रामक रोगों और कोशिका जीव विज्ञान में विशेषज्ञता हासिल की है. डॉ. दास तपेदिक के रोगजनन पर उनके शोध के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है.

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