दिल्ली में तुर्कमान मस्जिद के पास से कब्जा हटाने की लड़ाई लड़ने वाले प्रीत सिरोही ने जानें क्या-क्या कहा

प्रीत सिरोही ने कहा कि एमसीडी ने सर्वे किया और सर्वे की रिपोर्ट में जो हमने दावा किया कि वो सत्य पाया गया, लेकिन फिर भी कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद हम दिल्ली हाईकोर्ट गए क्योंकि सरकारी जमीन पर कार्यक्रम के लिए लोगों से पैसे वसूले जा रहे थे.

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  • पुरानी दिल्ली के फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध निर्माण पर एमसीडी ने बुलडोजर से रातों रात कार्रवाई की
  • कार्रवाई के दौरान उपद्रव हुआ, पुलिस पर पथराव और आंसू गैस के गोले चलाने पड़े, कई पुलिसकर्मी घायल हुए
  • याचिकाकर्ता प्रीत सिरोही ने बताया कि सार्वजनिक भूमि पर कब्जे और अवैध निर्माण की शिकायत के बाद मामला दर्ज हुआ
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पुरानी दिल्ली में तुर्कमान गेट के पास फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास MCD का बड़ा एक्शन हुआ. अवैध निर्माण पर रातों रात बुलडोजर कार्रवाई की गई जिसमें लोगों ने पथराव भी किया और पुलिस को आंसू गैस के गोले भी दागने पड़े. अज्ञात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है और वहीं इस मामले में 10 लोग हिरासत में लिए गए हैं. बता दें कि बुलडोजर कार्रवाई के दौरान जमकर उपद्रव हुआ और कुछ लोग बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़े. एसएचओ समेत 5 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. इस मामले में याचिकाकर्ता प्रीत सिरोही ने दिल्ली प्रशासन और एमसीडी की तारीफ करते हुए बताया कि जब मैंने फैज-ए-इलाही परिसर के बारे में शोध शुरू किया तो मुझे पता चला कि सार्वजनिक भूमि पर परिसर और अवैध निर्माण है. भूमि का स्वामित्व सार्वजनिक परिवहन विभाग (पीडब्ल्यूडी) और MCD के पास है. मई से अक्टूबर तक लगातार मैं एमसीडी को चिट्ठियां लिखता रहा, लेकिन इस मामले को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हुई. फिर अक्टूबर में जाकर एमसीडी ने सर्वे किया और सर्वे की रिपोर्ट में जो हमने दावा किया कि वो सत्य पाया गया, लेकिन फिर भी कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद हम दिल्ली हाईकोर्ट गए, हम इसलिए गए कि सरकारी जमीन पर कार्यक्रम के लिए भी भोले-भाले लोगों से पैसे वसूले जा रहे हैं. यहां पर सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा करके बारात घर, डायग्नोस्टिक सेंटर, डायलेसिस सेंटर, मेटरनिटी सेंटर और पार्किंग के साथ-साथ कई कमर्शियल एक्टिविटि चल रही थीं.

इसके बाद प्रीत सिरोही ने बताया कि हमने जो डॉक्यूमेंट दिल्ली हाईकोर्ट में पेश किए वो सही पाए गए. उन सबूतों में इतनी जान थी कि चीफ जस्टिस ने 3 महीने में अतिक्रमण को हटाने का निर्देश दिया. एमसीडी को डायरेक्शन दिया आप मस्जिद कमेटी को सुनेगी. इसके बाद MCD ने वक्फ बोर्ड और कमेटी को सुना और लिखित दस्तावेज एमसीडी अधिकारियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में पेश भी किए, लेकिन उन्होंने भ्रम फैलाया कि हमें सुना नहीं गया. उन्होंने कोर्ट में पिटिशन लगाई और अपोज करते रहे, लेकिन उनके पास कोई ऐसा कागज नहीं था कि जिससे ये बात साबित होती हो कि इसकी जमीन की ओनरशिप वक्फ या मस्जिद कमेटी के पास हो. इन्हें कोई स्टे नहीं मिला और फैसले के बाद एमसीडी ने अतिक्रमण पर कार्रवाई की. दिल्ली प्रशासन और एमसीडी ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बहुत अच्छा काम किया.

बता दें कि इस मामले पर सियासत भी तेज हो गई है. बीजेपी ने कहा है कि पुलिस पर पथराव दुर्भाग्यपूर्ण है और कार्रवाई रोकने वालों पर सख्त एक्शन होना चाहिए तो वहीं कांग्रेस ने कहा कि अतिक्रमण के नाम पर कमजोरों पर अत्याचार करके मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है.

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