छोटा बिजनेस करने वालों के सामने दो बड़ी चुनौतियां अक्सर सामने आती हैं. पहली- बड़ी कंपनियां पेमेंट में देरी करती हैं. और दूसरी- मामला कोर्ट में जाए तो निपटारे में बहुत समय लग जाता है. अब इन दोनों ही परेशानियों को दूर करने के लिए राज्यसभा में एक अहम बिल पास हुआ है.
यह बिल MSME यानी माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज के लिए है. MSME डेवलपमेंट (अमेंडमेंट) बिल 2026 का मकसद यही है कि पेमेंट टाइम पर मिले और विवाद का निपटारा जल्दी हो. MSME को लेकर 2006 में कानून बना था, जिसे अब संशोधित किया गया है. विपक्ष के हंगामे के बीच सोमवार को यह बिल राज्यसभा में ध्वनिमत से पास हो गया.
इस बिल को पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि विपक्ष इसमें उनका सहयोग देगी लेकिन विपक्ष इसका विरोध कर रहा है. उन्होंने कहा कि इस बिल का मकसद प्रशासनिक ढांचे में सुधार और पेमेंट सिस्टम को आसान बनाकर MSME सेक्टर की चुनौतियों का समाधान करना है.
इस बिल से फायदा क्या होगा?
- फंसा पैसा वापस मिलेगा: बिल में प्रावधान है कि अगर कोई बड़ी कंपनी MSME का पैसा नहीं देती है और कोर्ट में केस फाइल करती है और अगर वह केस 6 महीने से ज्यादा खिंचता है तो कोर्ट उस कंपनी को आदेश दे सकती है कि वह कम से कम 50% पैसा तुरंत MSME को दे, ताकि उसका काम न रुके.
- लगान की तरह वसूली: समझौते या कानूनी फैसले के बाद भी अगर कोई कंपनी MSME का पैसा नहीं चुकाती है तो उस पैसे की वसूली लैंड रेवेन्यू के बकाये की तरह वसूली जा सकती है. ये वसूली कलेक्टर या डिप्टी कमिश्नर करेंगे.
- जल्द निपटेगा विवाद: मीडिएशन से विवाद सुलझाने की प्रक्रिया को 90 दिन में पूरा करना होगा. अगर मामला आर्बिट्रेशन में जाता है तो दलीलें पूरी होने के 90 दिन के भीतर फैसला सुनाना होगा. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी विवाद को निपटाया जाएगा, ताकि छोटे कारोबारियों को बार-बार कोर्ट के चक्कर न काटने पड़ें.
- अपील पर पैसा जमा करना होगा: अगर MSME के पक्ष में फैसला आता है और सामने वाली पार्टी इसके खिलाफ अपील करती है तो उसे पहले विवादित रकम का 75% कोर्ट में जमा करना होगा. अगर कोर्ट में यह केस 6 महीने से ज्यादा खिंचता है तो अदालत उस जमा रकम का कुछ हिस्सा MSME यानी सप्लायर को तुरंत जारी करने का आदेश दे सकती है.
- TReDS जरूरी होगा: अब केंद्र की सभी सरकारी कंपनियों को PSU को अब अपने MSME सप्लायरों का बिल TReDS सिस्टम से सेटल करना होगा. इस सिस्टम के तहत बैंक तुरंत बिल का पैसा देते हैं और कंपनी बाद में बैंक को लौटाती है. इससे MSME को तुरंत कैश मिलेगा.
- छोटी गलतियों पर जेल नहीं: बिल में छोटी-मोटी गलतियों पर जेल के प्रावधान को हटा दिया गया है. छोटे-मोटी गलतियों पर अब छोटे कारोबारियों को जेल की सजा या भारी जुर्माना नहीं होगा. पहली गलती पर सिर्फ चेतावनी दी जाएगी और बाद में आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा.
- फ्री ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन: MSME के लिए एक नेशनल डिजिटल प्लेटफॉर्म बनेगा. प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन वैकल्पिक और फ्री होगा. पोर्टल इसलिए बनेगा, ताकि MSME को केंद्र सरकार की योजनाओं और कानून का फायदा मिले. राज्य सरकारें भी ऐसा कर सकती हैं.
क्यों जरूरी था ये बिल?
MSME देश के लिए बहुत जरूरी हैं. केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने संसद में बताया है कि MSME देश की GDP में 31%, मैनुफैक्चरिंग में 36% और एक्सपोर्ट में 41% का योगदान देते हैं.
लेकिन MSME के सामने सबसे बड़ी समस्या लेट पेमेंट की ही थी. केंद्र सरकार के Samadhaan पोर्टल पर अब तक 2.57 लाख से ज्यादा शिकायतें हैं, जिसमें 55, 244 करोड़ रुपये फंसे हैं. हालांकि, इकनॉमिक सर्वे 2025-26 कहता है कि MSME के 8.1 लाख करोड़ रुपये फंसे हुए हैं.
इन समस्याओं को ठीक करने के लिए ही 2006 के कानून में संशोधन किया गया है. मांझी ने कहा कि सरकार 'चैंपियन MSME' बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.
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