ममता की एक रैली से आंखों देखी - जय बांग्ला से शुरू, जय बांग्ला पर खत्म

ममता बनर्जी के भाषण में तमाम राजनीतिक बातों के अलावा मछली का जिक्र भी होता है, जिसमें वह कहती हैं कि बीजेपी आई तो मछली को बेचने पर भी प्रतिबंध लग जाएगा.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भाषण की एक ही थीम है- जय बांग्ला. सब कुछ उसी के इर्द-गिर्द बोला जाता है
  • ममता जब आती हैं तो बैकग्राउंड में फाइटर दीदी वाला गाना बजता है. पिछला "खेला होबे" गाना इस बार गायब है
  • ममता बनर्जी रैली में अपने भाषण के अंत में कहती हैं- बोलबो रे, लड़बो रे, कोरबो रे, जीतबो रे...
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

पश्चिम बंगाल की चुनावी गहमागहमी. ममता बनर्जी की रैली का दृश्य, अभी उनको आने में वक्त है और स्थानीय नेताओं के भाषण चल रहे हैं, मगर सबके भाषण की एक ही थीम है- जय बांग्ला. सब कुछ उसी के इर्द-गिर्द बोला जाता है. पहले जय बांग्ला का नारा लगता है, फिर जय बंगाल का. उसके बाद ममता बनर्जी और अभिषेक के नारे. 

ये सब चल रहा होता है, तभी ममता बनर्जी के आने का वक्त हो जाता है. उनके हैलीपैड के आसपास के लोगों को सफेद टोपी बांटी जा चुकी है. जैसे ही हेलिकॉप्टर के आने की आवाज आती है, मंच से कहा जाता है कि दीदी के आने पर सफेद टोपी लहराकर उनका स्वागत किया जाए.

ममता बनर्जी के स्टेज तक आने के रास्ते में महिलाएं बड़े-बड़े ढोल लेकर खड़ी रहती हैं. किसी के हाथ में घंटी भी होती है. बैकग्राउंड में फाइटर दीदी वाला गाना बजता है, जिसमें ये कहा गया है कि दीदी हम सबके लिए लड़ रही हैं. जिस पर महिलाएं नाचती हैं. गाने के बोल हैं- "जे लोड़छे साबार डाके… से जे पावे बांग्ला मां के". इस बार पिछली बार वाला "खेला होबे" वाला गाना गायब है.

ममता बनर्जी के स्टेज पर आते ही वह पूरे मंच का नियंत्रण अपने हाथ में ले लेती हैं. आसपास के जितने भी उम्मीदवार हैं, उनका परिचय भीड़ से करवाती हैं. फिर जय बांग्ला के नारों के बीच ममता बनर्जी का भाषण शुरू होता है. ममता का पूरा भाषण बांग्ला में होता है, मगर बीच-बीच में दो-तीन बार हिंदी में भी बोलती हैं. शायद नेशनल मीडिया को ध्यान में रखकर.

Advertisement

ममता बनर्जी के भाषण में तमाम राजनीतिक बातों के अलावा मछली का जिक्र भी होता है, जिसमें वह कहती हैं कि बीजेपी आई तो मछली को बेचने पर भी प्रतिबंध लग जाएगा. इसके लिए वह बिहार के उपमुख्यमंत्री के बयान का भी जिक्र करती हैं. मछली और बंगालियों का जो भावनात्मक संबंध है, उसी को वह अपने तरफ करना चाहती हैं. 

ममता बनर्जी फिर अपने भाषण में रवींद्रनाथ टैगोर, बंकिम बाबू जैसे शख़्सियतों का उल्लेख करती हैं. साथ ही उनकी कविताएं पढ़ती हैं. अपने भाषण में नज़रुल इस्लाम का जिक्र करना नहीं भूलतीं. उनकी भी कविता पढ़ती हैं. बांग्ला में दुर्गा पाठ करती हैं, काली मां का जिक्र करती हैं और शिव स्तुति भी बोलती हैं.

Advertisement

ममता बनर्जी अपने भाषण में लक्ष्मी भंडार योजना का जिक्र करती हैं और महिलाओं से कहती हैं कि जिनको लाभ मिल रहा है, वो सब हाथ उठाओ. फिर यह भी नहीं बोलना भूलतीं कि केंद्र सरकार डिलिमिटेशन या परिसीमन के बहाने पश्चिम बंगाल के तीन टुकड़े करना चाहती हैं. और अंत में कहती हैं- बोलबो रे, लड़बो रे, कोरबो रे, जीतबो रे...

ममता का भाषण जब खत्म होता है, तब मंच पर उन सभी महिलाओं को बुलाया जाता है जो बड़े-बड़े ढोल लेकर उनका स्वागत करने आई थीं. उन्हीं में से एक महिला से घंटी लेकर खुद बजाने लगती हैं.

कहने का मतलब है कि यदि आप दिल्ली से गए हैं और हिंदी भाषी हैं तो ममता बनर्जी की चुनावी रैली शुरू से अंत तक आपको पूरी तरह से बांग्ला में एक मास्टर क्लास की तरह लगेगी. और यही ममता बनर्जी चाहती हैं. जय बांग्ला से उनकी रैली शुरू होती है और उसी पर खत्म होती है.

देखें- बंगाल की लड़ाई मछली पर आई, ममता ने लगाया आरोप, PM मोदी ने बिहार का नाम लेकर किया पलटवार
 

Advertisement
Featured Video Of The Day
Dhar Murder Mystery: बेवफा Wife ने Lover के साथ रची खौफनाक साजिश, Husband को मिली दर्दनाक मौत