पर्चा दाखिल करने से 18 घंटे पहले कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ने के लिए कहा गया था : खड़गे

मल्लिकार्जुन खड़गे को इंदिरा गांधी के समय से गांधी परिवार का करीबी माना जाता रहा है. यही वजह है कि अध्यक्ष पद के लिए उनके नाम पर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी तीनों की सहमति थी.

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मल्लिकार्जुन खड़गे को इंदिरा गांधी के समय से गांधी परिवार का करीबी माना जाता रहा है.

कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 80 साल के मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) का मुकाबला शशि थरूर (Shashi Tharoor) से है. इसके लिए 17 अक्टूबर को वोटिंग होगी और नतीजा 19 अक्टूबर को आएगा. जिस तरह खड़गे को पार्टी नेताओं का समर्थन और गांधी परिवार की सहमति मिली है, उससे उनका कांग्रेस अध्यक्ष (Congress presidential Election) बनना लगभग तय माना जा रहा है. इस बीच मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को कहा कि उन्हें नामांकन पत्र दाखिल करने से 24 घंटे पहले कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के लिए कहा गया था. खड़गे ने कहा कि हालांकि, उनका भी मानना है कि राहुल गांधी को अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ना चाहिए था. 

खड़गे ने पटना में बिहार कांग्रेस मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "मुझे नामांकन पत्र दाखिल करने से 18 घंटे पहले कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के लिए कहा गया था. जब मैंने पूछा कि मुझे आखिर ऐन वक्त पर ऐसा करने के लिए क्यों कहा जा रहा है, तो मुझे बताया गया कि राहुल गांधी नहीं चाहते हैं कि उनके परिवार का कोई सदस्य पार्टी के शीर्ष पद पर रहे." 

कांग्रेस में व्यापक रूप से लोकप्रिय खड़गे ने कहा, "मेरा मानना ​​​​है कि पार्टी को राहुल गांधी और उनके नेतृत्व की आवश्यकता है. उन्हें फिर से पार्टी अध्यक्ष बनना चाहिए था, लेकिन मैं उनकी भावनाओं का सम्मान करता हूं". 

मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना है कि ये संगठन का चुनाव है, हमारे घर का मामला है. हर कोई किसी को भी वोट देने के लिए स्वतंत्र है. लोगों ने मेरा समर्थन किया और मैं उम्मीदवार हूं. कांग्रेस जैसा विशाल संगठन चलाने के लिए गांधी परिवार का मार्गदर्शन चाहिए. अगर कोई कहता है कि उन्हें छोड़कर पार्टी को चलाया जा सकता है तो यह असंभव है.

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खड़गे की जिंदगी हमेशा मुश्किल भरी रही, लेकिन लीडरशिप की क्वालिटी उनमें बचपन से थी. वे स्कूल में हेड बॉय थे. कॉलेज गए तो स्टूडेंट लीडर बन गए. गुलबर्गा जिले के पहले दलित बैरिस्टर बने, पहली बार में विधायक बने और 9 बार चुने गए. वह दो बार सांसद भी रहे, लेकिन तीन बार कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए. बता दें कि मल्लिकार्जुन खड़गे को इंदिरा गांधी के समय से गांधी परिवार का करीबी माना जाता रहा है. यही वजह है कि अध्यक्ष पद के लिए उनके नाम पर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी तीनों की सहमति थी. व्यापक रूप से माना जाता है कि राहुल गांधी ने कांग्रेस में "वंशवाद के शासन" के बीजेपी के आरोप को खारिज करने के लिए अध्यक्ष पद  का चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था. 

इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मल्लिकार्जुन खड़गे ने ऐलान किया है कि अगर चुनाव में वे जीत जाते हैं तो पार्टी के 50 फीसदी पदों पर 50 साल से कम उम्र के नेताओं की नियुक्ति की जाएगी. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक पश्चिम बंगाल के कांग्रेस डेलिगेट्स के साथ मुलाकात के दौरान खड़गे ने कहा कि अगर अध्यक्ष का चुनाव जीता तो उदयपुर डिक्लेरेशन को पूरी तरह से लागू किया जाएगा. 

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उन्होंने कहा कि महिलाओं, एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के नेताओं को भी उचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा. मल्लिकार्जुन खड़गे ने ये भी कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष बना तो ये भी सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी नेता एक पद पर पांच साल से अधिक समय तक ना रहे. ये मेरा वादा है. 80 साल के वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर भी जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र में विनिवेश कर रही है. 

तिरुवनंतपुरम से पार्टी सांसद शशि थरूर भी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे हैं. खड़गे ने कहा, "मैं यहां एक भूमिका निभाने के लिए हूं, लेकिन कई चीजें हैं जो मैं सार्वजनिक रूप से नहीं कहना चाहूंगा". उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस "संविधान को बचाने" के लिए प्रतिबद्ध है, जिस पर कथित तौर पर केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी द्वारा हमला किया जा रहा था.

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